कड़ाके की ठंड में गरीबों में दस हजार कंबल और टोपी बांटने चले समाजसेवी लुत्फुल हक

गरीबों की मदद करना सबसे बड़ा कर्म- लुत्फुल हक

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समाचार चक्र संवाददाता

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पाकुड़। ये हाड़ कंपा देने वाली ठंड के थपेड़ों से थम न जाए उनकी जिंदगी, इन्हें गर्म कपड़े दान कर आईए निभाएं अपनी जिम्मेदारी। इसी नेक इरादों के साथ पाकुड़ के जाने-माने और चर्चित समाजसेवी लुत्फुल हक 10,000 (दस हजार) कंबल और टोपी गरीबों को बांटने चले हैं। इसकी शुरुआत शनिवार को पाकुड़ प्रखंड के मनीरामपुर पंचायत से हुई। मनीरामपुर में समाजसेवी लुत्फुल हक ने अपने हाथों से सैंकड़ों गरीबों को कंबल और टोपी दिया। उन्होंने यहां मनीरामपुर सहित रहसपुर, नवादा, ईशाकपुर और जयकिस्टोपुर के गरीब जरूरतमंदों को कंबल और टोपी बांटे। इस दौरान मुखिया मजिबूर रहमान सहित गांव के गणमान्य लोग मौजूद थे। इसके बाद इलामी और तारानगर पंचायत में भी सैंकड़ों गरीबों को कंबल और टोपी का वितरण किया। इलामी के नाबू मोड़ और तारानगर पंचायत भवन में 500 जरूरतमंद महिला और पुरुष लाभुकों को कंबल और टोपी मुहैया कराया गया। लुत्फुल हक का कंबल और टोपी वितरण का सिलसिला यहीं नहीं रुका। इसके बाद चेंगाडांगा क्रिकेट मैदान में पांच-पांच पंचायत के जरूरतमंदों के बीच कंबल और टोपी बांटे। यहां हजारों की संख्या में पहुंचे गरीबों को ठंड से राहत पहुंचाने का काम किया। इस तरह तकरीबन दर्जन भर पंचायत के गरीब जरूरतमंद कंबल और टोपी से लाभान्वित हुए। इस दौरान कड़ाके की ठंड में बड़ी मुश्किल से रात बिताने वाले गरीबों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने समाजसेवी लुत्फुल हक को दीर्घायु और तरक्की की दुआएं दी। वहीं समाज के लोगों ने लुत्फुल हक की काफी प्रशंसा की और कहा कि गरीबों की परेशानी को महसूस करने वाले ऐसे लोग बहुत कम मिलते हैं। आज के समय में जहां लोग सिर्फ और सिर्फ खुद के लिए ही सोचते हैं। ऐसे में लुत्फुल हक की जितनी भी प्रशंसा की जाए, वह काम है। मौके पर लुत्फुल हक ने गरीबों से अपना बीते दिनों की बातों को साझा करते हुए कहा कि कभी मैं भी गरीब और असहाय था। मैं बचपन से ही गरीबी की मार को महसूस करते आ रहा हूं। मेरा बचपन ही गरीबी में बीता है। मैं अपने दौर के उन दिनों को आज भी याद करता हूं, जब मैं एक-एक चीज का मोहताज था। आज ऊपर वाले ने मुझे गरीबों की सेवा करने का अवसर दिया है। मैं ऊपर वाले का लाख-लाख शुक्रिया अदा करता हूं। आप सभी का भी शुक्र अदा करता हूं कि आपने मेरे दान को कबूला। मैं आप सभी को भरोसा दिलाता हूं कि आगे भी इंशाल्लाह आप लोगों के बीच आता रहूंगा। उन्होंने यह भी कहा कि मैं गरीबों की सेवा को सबसे बड़ा कर्म मानता हूं। मेरा मानना है कि अगर खुदा ने हमें इस लायक बनाया है, तो दूसरों की मदद के लिए आगे आना चाहिए। मौके पर मुखिया अब्दुल समद, अब्दुल लतीफ, अंसारुल हक, नसीम आलम, अजमल हुसैन आदि मौजूद थे।

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