अपने स्वार्थ को त्याग दूसरों की जान बचाने में जुटी है राहत फाउंडेशन

साढ़े चार महीने में 90 यूनिट रक्तदान कर बनाई अलग पहचान

0
275

विज्ञापन

add

अबुल काशिम की ग्राउंड रिपोर्ट
पाकुड़। अपने लिए तो सब जीते हैं, जी कर देखो थोड़ा दूसरों के लिए। कुछ तो ऐसा करो कि याद आओ जाने के बाद भी। मील का पत्थर बनो, ना पत्थर बनो ठोकरों के लिए। इसी राह पर चल रहे राहत फाउंडेशन के युवाओं की चर्चा आज पूरे क्षेत्र में है। राहत फाउंडेशन ने ब्लड डोनेशन में अपनी अलग ही पहचान बना ली है। महज चार साढ़े चार महीने में 90 यूनिट से ज्यादा रक्तदान किया और कराया। यह आंकड़ा ही राहत फाउंडेशन की रक्तदान में दिलचस्पी को साफ दर्शाता है। यह समाजसेवा ही नहीं, बल्कि दूसरों के लिए जीना भी कह सकते हैं। अपने सारे स्वार्थ को त्याग कर दूसरों की जान बचाना बहुत बड़ी बात है। मरीजों की जान बचाने में राहत फाउंडेशन के युवाओं के जज्बे का कोई विकल्प नहीं है। जिस तरह रात-दिन चौबीस घंटे मेहनत करते हैं, वाकई में प्रशंसनीय है।इस नेक काम में सबसे अहम भूमिका फाउंडेशन के अध्यक्ष मो. मुखलेसुर रहमान, उपाध्यक्ष नास्तारुल शेख, सचिव नाजमी आलम एवं कोषाध्यक्ष अंसारुल शेख ने निभाया। फाउंडेशन के सदस्य सलमान शेख, अनारुल शेख, सुरज कुमार केवट, मुबारक शेख, अंजारुल शेख सहित तमाम सदस्यों की भी अहम भूमिका रही। सभी सदस्य फाउंडेशन के साथ साए की तरह खड़े रहे। कंधे से कंधा मिलाकर मरीजों की जान बचाने में जुटे रहे। आज भी निरंतर सेवा दे रहे हैं। कुल मिलाकर राहत फाउंडेशन ने एक मिसाल कायम किया है। अध्यक्ष मो. मुखलेसुर रहमान ने बताया कि 1 मार्च 2023 से लेकर अब तक 90 यूनिट से भी ज्यादा ब्लड डोनेट किया गया है। इसमें राहत फाउंडेशन के सभी साथियों का भरपूर सहयोग मिला। आगे भी साथ मिलकर जरुरतमंदों के लिए निःस्वार्थ भाव से ब्लड डोनेशन के लिए काम करते रहेंगे।

विज्ञापन

polytechnic
Google search engine

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here