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43 साल का इंतज़ार, कब मिलेगा कोटालपोखर को अपना प्रखंड?

समाचार चक्र संवाददाता

कोटालपोखर-यह केवल एक प्रशासनिक मांग नहीं,बल्कि 43 वर्षों से अधूरी उम्मीदों,टूटे भरोसे और विकास की प्रतीक्षा की कहानी है।पश्चिम बंगाल की सीमा से सटा कोटालपोखर आज भी उस दिन का इंतजार कर रहा है,जब उसे अपना प्रखंड और अंचल मिलेगा।वर्ष 1983 में शुरू हुई यह मांग आज भी सरकारी फाइलों में घूम रही है।इस दौरान बिहार से झारखंड बना, कई मुख्यमंत्री आए और गए,कई विधायक और सांसद बदले,कई सरकारें बनीं और गिरीं,लेकिन कोटालपोखर की किस्मत नहीं बदली।


चार दशक का संघर्ष, फिर भी अधूरी मंजिल

जब 6 अक्टूबर 1994 को तत्कालीन बिहार के मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव ने कोटालपोखर, मंडरो और उधवा को प्रखंड बनाने की घोषणा की थी,तब लोगों में नई उम्मीद जगी थी।लेकिन बाद में मंडरो और उधवा को प्रखंड का दर्जा मिल गया,जबकि कोटालपोखर पीछे छूट गया।1996 में फिर प्रस्ताव गया,2000 में झारखंड बनने के बाद उम्मीद जगी,2009 में फाइल कैबिनेट तक पहुंची,2013-14 में रिपोर्ट मांगी गई,2025 में जिला परिषद ने फिर प्रस्ताव पारित किया।हर बार आश्वासन मिला, लेकिन निर्णय नहीं।

जनता पूछ रही है-हमसे आखिर क्या गलती हुई?

कोटालपोखर के लोगों का सवाल है कि जब समान परिस्थितियों वाले अन्य क्षेत्रों को प्रखंड का दर्जा मिल सकता है,तो कोटालपोखर को क्यों नहीं?आज भी यहां के लोगों को जन्म प्रमाण पत्र,जाति,आय, आवासीय प्रमाण पत्र, पेंशन,राशन कार्ड,जमीन से जुड़े मामलों और अन्य सरकारी कार्यों के लिए बरहरवा प्रखंड कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ते हैं।बरसात के दिनों में यह दूरी और कठिन हो जाती है।गरीब,बुजुर्ग,महिलाएं और दिव्यांगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है।

सीमा का महत्वपूर्ण क्षेत्र, फिर भी उपेक्षित

कोटालपोखर केवल एक गांव नहीं,बल्कि व्यापार, रेलवे और सीमा क्षेत्र के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। यहां बड़ी आबादी निवास करती है और आसपास की लगभग 10 पंचायतें सीधे इससे जुड़ी हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक सुविधाओं का अभाव क्षेत्र के विकास में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है।

जनप्रतिनिधियों से बड़ा सवाल–

हर चुनाव में विकास के वादे किए जाते हैं। चुनावी सभाओं में कोटालपोखर को प्रखंड बनाने की बात भी उठती है, लेकिन चुनाव समाप्त होते ही यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला जाता है।
अब सवाल केवल सरकार से नहीं,बल्कि स्थानीय विधायक, सांसद,जिला परिषद सदस्य और अन्य जनप्रतिनिधियों से भी है.

क्या 43 वर्षों का संघर्ष अभी और लंबा होगा?

क्या कोटालपोखर को सिर्फ आश्वासन ही मिलता रहेगा?

क्या जनप्रतिनिधि इस मुद्दे को विधानसभा और संसद में मजबूती से उठाएंगे?

हेमंत सरकार के सामने सुनहरा अवसर

झारखंड सरकार यदि कोटालपोखर को प्रखंड एवं अंचल का दर्जा देती है, तो यह केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं होगा,बल्कि चार दशक से अधिक समय से संघर्ष कर रहे हजारों लोगों की उम्मीदों का सम्मान होगा।मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन अक्सर गांव और अंतिम व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने की बात करते हैं। ऐसे में कोटालपोखर को प्रखंड का दर्जा देना इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

अब इंतजार नहीं,निर्णय चाहिए–

43 वर्षों का संघर्ष यह बताने के लिए काफी है कि यह मांग किसी राजनीतिक दल की नहीं, बल्कि जनता की सामूहिक आवाज है।
अब कोटालपोखर के लोग केवल घोषणा नहीं, बल्कि सरकारी अधिसूचना देखना चाहते हैं।वे चाहते हैं कि आने वाली पीढ़ी यह न कहे कि “हमारे बुजुर्ग प्रखंड की मांग करते-करते चले गए,लेकिन कोटालपोखर आज भी प्रखंड नहीं बन सका।”अब समय है कि सरकार और जनप्रतिनिधि इस ऐतिहासिक मांग पर ठोस निर्णय लें,ताकि 43 वर्षों का इंतजार आखिरकार खत्म हो सके।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद हरकत में आया प्रशासन,पोखर अतिक्रमण हटाने को तीन सदस्यीय जांच टीम गठित

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़।झारखंड उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद पाकुड़ जिला प्रशासन हरकत में आ गया है।तालाब एवं सार्वजनिक जलस्रोतों पर अतिक्रमण के मामले में हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के अनुपालन को लेकर जिला प्रशासन ने एक ओर जहां तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया है,वहीं दूसरी ओर अंचल कार्यालय ने विवादित पोखर की भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का नोटिस भी जारी कर दिया है। अब इस पूरे मामले पर 31 जुलाई को होने वाली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई से पहले प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।मामला झारखंड उच्च न्यायालय में लंबित अवमानना वाद से जुड़ा है। Contempt Case (Civil) No. 88 of 2026 में याचिकाकर्ता अफरोज खान द्वारा सार्वजनिक तालाब पर अतिक्रमण का मामला उठाया गया था।सुनवाई के दौरान माननीय न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दायर अंतरिम आवेदन पर सुनवाई करते हुए पाकुड़ प्रशासन को 29 जुलाई 2026 तक अतिक्रमण हटाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई पूरी कर अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की गई है।

जांच के लिए बनी तीन सदस्यीय टीम—

उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जिला विधि शाखा, पाकुड़ ने अनुमंडल पदाधिकारी,अंचल अधिकारी सदर एवं कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद को शामिल करते हुए तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया है।जांच दल को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करे तथा विस्तृत संयुक्त जांच प्रतिवेदन उपायुक्त को सौंपे,ताकि समय पर न्यायालय में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके।

अतिक्रमणकारियों को नोटिस,तालाब अस्तित्व में लाने का निर्देश —

इधर अंचल कार्यालय, पाकुड़ ने भी हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई तेज कर दी है। अंचल अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में मौजा-पाकुड़, थाना संख्या-128, खाता संख्या-588, प्लॉट संख्या-1345 की भूमि को सरकारी अभिलेखों में पोखर बताया गया है।
नोटिस में कहा गया है कि भूमि का स्वरूप बदलकर अन्य उपयोग किया गया है,जो संताल परगना काश्तकारी अधिनियम,1949 की धारा-35 तथा उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध है।संबंधित रैयतों को निर्देश दिया गया है कि वे भूमि को पुनः पोखर के मूल स्वरूप में बहाल करें। यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो प्रशासन स्वयं अतिक्रमण हटाकर भूमि को मूल स्वरूप में बहाल करेगा और इस कार्रवाई का पूरा खर्च संबंधित व्यक्तियों से वसूला जाएगा।

29 जुलाई तक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश, अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर अस्तित्व में लाने का निर्देश

हाईकोर्ट के इस आदेश को सार्वजनिक तालाबों और जलस्रोतों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी तालाबों पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और प्रशासन को समयबद्ध कार्रवाई कर जवाबदेही निभानी होगी।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकुड़ प्रशासन 29 जुलाई की समय-सीमा के भीतर अतिक्रमण हटाकर न्यायालय को संतोषजनक अनुपालन रिपोर्ट सौंप पाएगा?इस मामले पर अब पूरे जिले की नजरें टिकी हैं। यदि प्रशासन समयबद्ध कार्रवाई करता है,तो यह न केवल हाईकोर्ट के आदेश का पालन होगा, बल्कि सार्वजनिक जलस्रोतों की रक्षा और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल भी बनेगा।

भाजपा कार्यकर्ताओं को आपसी समन्वय व अनुशासन के साथ संगठन को मजबूत करने का संदेश

समाचार चक्र संवाददाता

अमड़ापाड़ा। भारतीय जनता पार्टी की ओर से रविवार को मुख्य बाजार स्थित आरएस पैलेस में संथाल परगना प्रमंडल (दुमका, पाकुड़ एवं साहिबगंज) के मंडल प्रवासी कार्यकर्ता बैठक का आयोजन किया गया। बैठक में संगठन को बूथ स्तर तक और अधिक मजबूत बनाने, आगामी राजनीतिक कार्यक्रमों की रणनीति तथा कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर विस्तृत चर्चा की गई। बैठक में भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं संथाल परगना प्रभारी बाल मुकुंद सहाय मुख्य रूप से उपस्थित रहे। उनके साथ प्रदेश संगठन एवं जिला स्तर के कई पदाधिकारी मंच पर मौजूद रहे। कार्यक्रम में पाकुड़, साहिबगंज और दुमका जिले के भाजपा पदाधिकारियों, मंडल प्रभारियों, मंडल प्रवासियों, मंडल अध्यक्षों, जिला पदाधिकारियों, प्रदेश कार्यसमिति सदस्यों तथा वर्तमान एवं पूर्व जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान प्रदेश नेतृत्व की ओर से संगठनात्मक गतिविधियों की समीक्षा की गई। कार्यकर्ताओं से गांव-गांव तक पार्टी की नीतियों और केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाने का आह्वान किया गया। साथ ही बूथ सशक्तिकरण, सदस्यता विस्तार, आगामी चुनावी तैयारियों और संगठन को और अधिक सक्रिय बनाने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में प्रदेश संगठन महामंत्री कर्मवीर सिंह एवं प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्रा के प्रस्तावित कार्यक्रम का भी उल्लेख किया गया। बैठक में उपस्थित नेताओं ने कार्यकर्ताओं से आपसी समन्वय और अनुशासन के साथ संगठन को मजबूत करने का संदेश दिया। इससे पूर्व बैठक में शामिल होने के लिए विभिन्न जिलों से पहुंचे कार्यकर्ताओं का स्वागत किया गया। बैठक शांतिपूर्ण एवं संगठनात्मक माहौल में संपन्न हुई। अंत में कार्यकर्ताओं ने आगामी कार्यक्रमों को सफल बनाने तथा बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने का संकल्प लिया।

एसआईआर में कोई पात्र मतदाता न छूटे,बूथ स्तर तक संगठन को करें मजबूत-विधायक हेमलाल मुर्मू

समाचार चक्र संवाददाता

लिट्टीपाड़ा-झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आगामी राजनीतिक और संगठनात्मक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान तथा संगठन विस्तार को लेकर अपनी गतिविधियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में रविवार को लिट्टीपाड़ा प्रखंड के गुतु गलांग में झामुमो प्रखंड कमेटी की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष प्रसाद हांसदा ने की, जबकि मुख्य अतिथि के रूप में लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू मौजूद रहे।बैठक को संबोधित करते हुए विधायक हेमलाल मुर्मू ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिया कि एसआईआर अभियान के दौरान कोई भी पात्र मतदाता मतदाता सूची से वंचित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक कार्यकर्ता अपने-अपने बूथ क्षेत्र में सक्रिय रहकर मतदाताओं को जागरूक करें और जिन लोगों को दस्तावेज़ी या अन्य प्रकार की सहायता की आवश्यकता हो,उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान करें।उन्होंने कहा कि मतदाता सूची लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि कोई पात्र नागरिक सूची से बाहर रह जाता है तो वह अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो सकता है। इसलिए कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी केवल पार्टी तक सीमित नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत करने की भी है।बैठक में विधायक ने संगठनात्मक मजबूती पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि झामुमो को बूथ स्तर तक और अधिक सशक्त बनाने की आवश्यकता है। इसके लिए नए कार्यकर्ताओं को जोड़ने, गांव-गांव में संगठन की सक्रियता बढ़ाने तथा जनता के बीच लगातार संवाद बनाए रखने का आह्वान किया।उन्होंने कहा कि मजबूत संगठन ही जनता की समस्याओं को सरकार तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने और जनहित के मुद्दों पर संघर्ष करने की सबसे बड़ी ताकत होता है। इसलिए प्रत्येक कार्यकर्ता को संगठन की रीढ़ बनकर काम करना होगा।बैठक में झामुमो जिला अध्यक्ष अजीजुल इस्लाम, जिला उपाध्यक्ष समद अली, प्रखंड कमेटी के पदाधिकारी एवं बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उपस्थित रहे। बैठक के दौरान एसआईआर अभियान की प्रगति,संगठन विस्तार और आगामी कार्यक्रमों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

मां शिक्षिका पिता मेडिकल स्टोर संचालक, अनोखे संयोग से मंसूर को मिली प्रेरणा, नीट में लहराया परचम

अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। जिला मुख्यालय से करीब पंद्रह
किलोमीटर दूर गांव में बसे एक परिवार में नीट परीक्षा में बेटे की सफलता के बाद खुशी का माहौल बना हुआ है। पूरे गांव में जश्न का माहौल है। आस-पड़ोस, रिश्तेदार और मित्रों की ओर से बधाई संदेश आ रहे हैं। सदर प्रखंड के किस्मत कदमसार गांव के रहने वाले होनहार छात्र मंसूर आलम ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। मंशुर के परिवार में एक बेहद खास संयोग यह है कि उनकी मां सगीरा बेगम एक शिक्षिका (टीचर) हैं और उनके पिता रफीकुल इस्लाम एक दवा विक्रेता (मेडिकल स्टोर संचालक) हैं। माता-पिता के इस अनोखे कार्यक्षेत्र के जुड़ाव (शिक्षा और चिकित्सा) ने मंसूर को डॉक्टर बनकर समाज सेवा करने की प्रेरणा दी। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को हासिल करने वाले मंसूर आलम की पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखा जाए तो मंसूर आलम की माता अध्यापन के कार्य से जुड़ी हैं, जिससे उन्हें घर में शुरू से पढ़ाई का माहौल मिला। वहीं पिता दवा विक्रेता हैं, जिसके कारण उनका जुड़ाव बचपन से ही चिकित्सा क्षेत्र से रहा। इन सबके बीच मंसूर की इस सफलता में उनका कठिन परिश्रम शामिल है। मंसूर ने बिना विचलित हुए अनुशासित दिनचर्या का पालन किया और नियमित रूप से मॉक टेस्ट और अभ्यास सत्रों में भाग लिया। उन्होंने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां के मार्गदर्शन, पिता के अटूट विश्वास और अपने शिक्षकों की सही रणनीतियों को दिया है। उनके भविष्य के लक्ष्य की बात करें तो मंसूर का सपना देश के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर एक योग्य डॉक्टर बनना और पाकुड़ सहित समाज के जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है। पाकुड़ जैसे छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की इस बेहद प्रतिस्पर्धी परीक्षा को पास करना यह साबित करता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में निरंतरता हो, तो सीमित संसाधनों के बीच भी बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। मंसूर की इस कामयाबी से उनके पूरे परिवार और जिले के अन्य नीट अभ्यर्थियों में खुशी और प्रेरणा का माहौल है। मंसूर की इस सफलता को लेकर लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मंसूर आलम ने नीट परीक्षा में कुल अंक 720 में से 621 अंक लाकर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। इस शानदार सफलता के साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 4967 हासिल की है। मंसूर ने सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। इधर मंसूर आलम ने कहा कि मैं डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना चाहता हूं। मेरे माता-पिता का भी यही सपना रहा है। अपनी पढ़ाई को लेकर कहा कि आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई पाकुड़ सेंट जोसेफ स्कूल से पूरी की है। नौंवी कक्षा से आगे की पढ़ाई अल अमीन मिशन कोलकाता में की है। मैं हर दिन आठ से नौ घंटे स्टडी करता था।

मां शिक्षिका पिता मेडिकल स्टोर संचालक, अनोखे संयोग से मंसूर को मिली प्रेरणा, नीट में लहराया परचम

अबुल काशिम@समाचार चक्र


पाकुड़। जिला मुख्यालय से करीब पंद्रह किलोमीटर दूर गांव में बसे एक परिवार में नीट परीक्षा में बेटे की सफलता के बाद खुशी का माहौल बना हुआ है। पूरे गांव में जश्न का माहौल है। आस-पड़ोस, रिश्तेदार और मित्रों की ओर से बधाई संदेश आ रहे हैं। सदर प्रखंड के किस्मत कदमसार गांव के रहने वाले होनहार छात्र मंसूर आलम ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में शानदार सफलता हासिल कर पूरे क्षेत्र का नाम रोशन किया है। मंशुर के परिवार में एक बेहद खास संयोग यह है कि उनकी मां सगीरा बेगम एक शिक्षिका (टीचर) हैं और उनके पिता रफीकुल इस्लाम एक दवा विक्रेता (मेडिकल स्टोर संचालक) हैं। माता-पिता के इस अनोखे कार्यक्षेत्र के जुड़ाव (शिक्षा और चिकित्सा) ने मंसूर को डॉक्टर बनकर समाज सेवा करने की प्रेरणा दी। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि को हासिल करने वाले मंसूर आलम की पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखा जाए तो मंसूर आलम की माता अध्यापन के कार्य से जुड़ी हैं, जिससे उन्हें घर में शुरू से पढ़ाई का माहौल मिला। वहीं पिता दवा विक्रेता हैं, जिसके कारण उनका जुड़ाव बचपन से ही चिकित्सा क्षेत्र से रहा। इन सबके बीच मंसूर की इस सफलता में उनका कठिन परिश्रम शामिल है। मंसूर ने बिना विचलित हुए अनुशासित दिनचर्या का पालन किया और नियमित रूप से मॉक टेस्ट और अभ्यास सत्रों में भाग लिया। उन्होंने अपनी इस सफलता का पूरा श्रेय अपनी मां के मार्गदर्शन, पिता के अटूट विश्वास और अपने शिक्षकों की सही रणनीतियों को दिया है। उनके भविष्य के लक्ष्य की बात करें तो मंसूर का सपना देश के एक प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर एक योग्य डॉक्टर बनना और पाकुड़ सहित समाज के जरूरतमंद लोगों की सेवा करना है। पाकुड़ जैसे छोटे शहर से निकलकर राष्ट्रीय स्तर की इस बेहद प्रतिस्पर्धी परीक्षा को पास करना यह साबित करता है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत में निरंतरता हो, तो सीमित संसाधनों के बीच भी बड़ी से बड़ी सफलता हासिल की जा सकती है। मंसूर की इस कामयाबी से उनके पूरे परिवार और जिले के अन्य नीट अभ्यर्थियों में खुशी और प्रेरणा का माहौल है। मंसूर की इस सफलता को लेकर लोगों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मंसूर आलम ने नीट परीक्षा में कुल अंक 720 में से 621 अंक लाकर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया है। इस शानदार सफलता के साथ ही उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 4967 हासिल की है। मंसूर ने सीमित संसाधनों के बावजूद कड़ी मेहनत से यह मुकाम हासिल किया है। इधर मंसूर आलम ने कहा कि मैं डॉक्टर बनकर गरीबों की सेवा करना चाहता हूं। मेरे माता-पिता का भी यही सपना रहा है। अपनी पढ़ाई को लेकर कहा कि आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई पाकुड़ सेंट जोसेफ स्कूल से पूरी की है। नौंवी कक्षा से आगे की पढ़ाई अल अमीन मिशन कोलकाता में की है। मैं हर दिन आठ से नौ घंटे स्टडी करता था।

तीन पालियों में शांतिपूर्ण संपन्न हुई JSSC परीक्षा, 15 केंद्रों पर रही कड़ी निगरानी; हर पाली में करीब 20% रही उपस्थिति

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़-झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) रांची द्वारा आयोजित झारखंड क्षेत्रीय कार्यकर्ता प्रतियोगिता परीक्षा- 2024 रविवार को जिले के 15 परीक्षा केंद्रों पर तीन पालियों में शांतिपूर्ण एवं कदाचारमुक्त माहौल में संपन्न हुई।जिला प्रशासन ने परीक्षा संचालन को लेकर सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। जिला नियंत्रण कक्ष से पूरे दिन परीक्षा की निगरानी की गई और प्रत्येक पाली से पहले तथा बाद में सभी केंद्राधीक्षकों से रिपोर्ट ली गई।पहली पाली सुबह 8:30 बजे से 10:30 बजे तक आयोजित हुई। इस पाली में 6,000 अभ्यर्थियों में से 1,179 परीक्षार्थी उपस्थित हुए, जबकि 4,821 अनुपस्थित रहे।उपस्थिति 19.65 प्रतिशत दर्ज की गई। परीक्षा शुरू होने से पहले सभी केंद्रों पर स्टैटिक मजिस्ट्रेट,पुलिस बल और प्रश्न पत्र उपलब्ध होने की पुष्टि की गई। परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी की सूचना नहीं मिली।जबकि दूसरी पाली 11:30 बजे से 1:30 बजे तक हुई। इसमें भी 6,000 अभ्यर्थियों के विरुद्ध 1,179 अभ्यर्थी उपस्थित और 4,821 अनुपस्थित रहे।

इस पाली में भी 19.65 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की गई। जिला नियंत्रण कक्ष ने परीक्षा पूर्व सभी केंद्रों की तैयारियों की समीक्षा की और परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी केंद्रों से शांतिपूर्ण संचालन की रिपोर्ट प्राप्त हुई।तीसरी एवं अंतिम पाली 3:30 बजे से 5:30 बजे तक आयोजित की गई। इस पाली में 6,000 अभ्यर्थियों में से 1,178 अभ्यर्थी उपस्थित हुए, जबकि 4,822 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे।उपस्थिति 19.63 प्रतिशत रही। परीक्षा समाप्त होने के बाद सभी 15 केंद्रों से प्राप्त रिपोर्ट में पुष्टि की गई कि कहीं से भी कदाचार,

अव्यवस्था अथवा किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।जिला प्रशासन के अनुसार,तीनों पालियों में परीक्षा पूरी तरह शांतिपूर्ण,निष्पक्ष और कदाचारमुक्त वातावरण में संपन्न हुई।परीक्षा के दौरान सुरक्षा,गोपनीयता और पारदर्शिता के सभी मानकों का पालन सुनिश्चित किया गया। परीक्षा के सफल संचालन में प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी,पुलिस पदाधिकारी,केंद्राधीक्षक तथा अन्य अधिकारियों और कर्मियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

रेल यात्रियों के लिए राहत की उम्मीद: पाकुड़ सहित संताल परगना की वर्षों पुरानी मांगों पर रेलवे ने दिखाई सकारात्मक पहल

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़– रेल यात्रियों की सुविधाओं को लेकर लंबे समय से उठ रही मांगों को एक बार फिर जोरदार तरीके से पूर्व रेलवे मुख्यालय, कोलकाता में रखा गया। ईस्टर्न जोनल रेलवे पैसेंजर्स एसोसिएशन (हावड़ा मंडल) के अध्यक्ष-सह-भाजपा जिला उपाध्यक्ष हिसाबी राय एवं सचिव राणा शुक्ला ने पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक मिलिंद देउस्कर से उनके कार्यालय में मुलाकात कर तीन सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उप महाप्रबंधक शिवराम मांझी भी उपस्थित रहे।करीब 40 मिनट तक चली विस्तृत बैठक में यात्रियों की समस्याओं और उनके समाधान पर तकनीकी स्तर पर चर्चा हुई। प्रतिनिधिमंडल ने रामपुरहाट-साहिबगंज नई मेमू ट्रेन शुरू करने की मांग करते हुए कहा कि इससे पाकुड़, बरहरवा,तीनपहाड़, मुरारोई और आसपास के हजारों दैनिक यात्रियों, छात्रों, नौकरीपेशा लोगों तथा व्यापारियों को बड़ी राहत मिलेगी।इसके अलावा ईशाकपुर एलसी गेट संख्या-39 (पाकुड़ वेस्ट केबिन) तथा मालपहाड़ी अंतरराज्यीय सड़क पर रोड ओवरब्रिज निर्माण की लंबित मांग को भी दोहराया गया। वहीं कोलकाता- काजीरंगा साप्ताहिक एक्सप्रेस का पाकुड़ स्टेशन पर ठहराव, पाकुड़-रामगढ़ स्टेशन पर यात्रियों के लिए पेयजल सुविधा हेतु उद्योगपति लुतफल हक द्वारा उपलब्ध कराए गए चार फ्रिज रेलवे को हस्तांतरित करने,तथा पाकुड़ स्टेशन के ऑटो स्टैंड में हाईमास्ट लाइट और वीडियो वॉल लगाने की मांग भी रखी गई।
महाप्रबंधक मिलिंद देउस्कर ने आश्वस्त किया कि यात्रियों की सुविधा सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने बताया कि रामपुरहाट-साहिबगंज मेमू ट्रेन के संचालन की संभावनाओं पर समय- सारिणी तैयार करने के लिए मुख्य यात्री संचालन प्रबंधक को निर्देश दिए गए हैं।साथ ही कोलकाता-काजीरंगा एक्सप्रेस के पाकुड़ ठहराव,रोड ओवरब्रिज निर्माण और स्टेशन परिसर में हाईमास्ट लाइट एवं वीडियो वॉल लगाने की दिशा में भी आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है।यदि ये सभी प्रस्ताव धरातल पर उतरते हैं तो पाकुड़ सहित संताल परगना के लाखों रेल यात्रियों को वर्षों से चली आ रही समस्याओं से राहत मिलेगी।अब आमजन की निगाहें रेलवे के आश्वासनों को जल्द हकीकत में बदलते देखने पर टिकी हैं।यदि चाहें, मैं इसके लिए एक हार्ड हेडलाइन और यूट्यूब थंबनेल लाइन भी तैयार कर सकता हूँ।

रात में चेकपोस्ट कर्मी से अभद्रता पड़ी भारी, सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में ट्रक चालक गिरफ्तार

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़-जिले में सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाने और चेकपोस्ट कर्मी को धमकाने के मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए एक ट्रक चालक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।प्राप्त जानकारी के अनुसार,रात्रि जांच के दौरान एक ट्रक चालक ने चेकपोस्ट पर तैनात कर्मी के साथ कथित रूप से गाली-गलौज की। इतना ही नहीं, चालक पर ट्रक चढ़ाकर जान से मारने की धमकी देने,सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने तथा ड्यूटी पर तैनात लोकसेवक को भयभीत करने का भी आरोप है।घटना के बाद प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी के आवेदन के आधार पर संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी सुलेमान शेख,पिता जाकिर शेख,निवासी ग्राम नगरनबी,थाना मालपहाड़ी ओपी,जिला पाकुड़ को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया।पुलिस ने स्पष्ट किया है कि सरकारी कार्य में बाधा डालने, ड्यूटी पर तैनात कर्मियों के साथ अभद्र व्यवहार करने तथा कानून व्यवस्था बिगाड़ने की कोशिश करने वालों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी।

संत जेवियर्स स्कूल, कोटालपोखर में दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम संपन्न, विद्यार्थियों,अभिभावकों और शिक्षकों को नई शिक्षा नीति व आधुनिक शिक्षण पद्धतियों से कराया गया परिचित

समाचार चक्र संवाददाता

कोटालपोखर-साहिबगंज जिले के कोटालपोखर स्थित संत जेवियर्स स्कूल में नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 के शुभारंभ के अवसर पर 17 एवं 18 जुलाई 2026 को विद्यार्थियों,अभिभावकों और शिक्षकों के लिए दो दिवसीय अभिमुखीकरण (ओरिएंटेशन) कार्यक्रम का सफल आयोजन किया गया।न्यू सरस्वती हाउस के रिसोर्स पर्सन अरिंदम बानीक एवं विनीत कुमार सिंह के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यालय परिवार के सभी सदस्यों को नई शैक्षणिक व्यवस्था, अनुशासन,आधुनिक शिक्षण पद्धतियों तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के प्रमुख पहलुओं से परिचित कराना था।कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य फादर डॉक्टर स्टीफन राज के स्वागत भाषण से हुआ।उन्होंने दोनों रिसोर्स पर्सन का शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया और कहा कि विद्यालय केवल शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि चरित्र निर्माण और व्यक्तित्व विकास की प्रयोगशाला है।उन्होंने सभी विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों से मिलकर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का वातावरण तैयार करने का आह्वान किया।पहले दिन विद्यार्थियों के लिए आयोजित सत्र में रिसोर्स पर्सन ने विद्यालय के नियमों,अनुशासन, शैक्षणिक गतिविधियों, परीक्षा प्रणाली एवं उपलब्ध संसाधनों की विस्तृत जानकारी दी। विद्यार्थियों को नियमित अध्ययन,समय-पालन, नैतिक मूल्यों, सकारात्मक सोच तथा विद्यालय की प्रत्येक सुविधा का जिम्मेदारीपूर्वक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया गया। साथ ही उन्हें यह संदेश दिया गया कि किसी भी समस्या के समाधान के लिए वे अपने शिक्षकों एवं विद्यालय प्रशासन से बिना संकोच संपर्क करें।


इसी दिन अभिभावकों के लिए भी विशेष ओरिएंटेशन सत्र आयोजित किया गया। इसमें विद्यालय की शैक्षणिक नीतियों, मूल्यांकन प्रणाली, सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी साझा की गई। शिक्षकों ने अभिभावकों को बच्चों की नियमित उपस्थिति, गृहकार्य,अध्ययन की आदत,डिजिटल सुरक्षा, स्वास्थ्य,नैतिक शिक्षा तथा घर में सकारात्मक शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने के महत्व से अवगत कराया। अभिभावकों से विद्यालय के साथ निरंतर संवाद बनाए रखने और बच्चों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने का भी आग्रह किया गया।
दूसरे दिन,18 जुलाई को शिक्षकों के लिए विशेष अभिमुखीकरण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस सत्र में रिसोर्स पर्सन ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, अनुशासन,नवाचार एवं विद्यार्थियों के समग्र विकास में शिक्षकों की भूमिका पर विस्तार से चर्चा की।विशेषज्ञ प्रशिक्षकों ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति के प्रमुख प्रावधानों,आधुनिक शिक्षण तकनीकों, डिजिटल शिक्षण संसाधनों, गतिविधि- आधारित शिक्षण,सतत एवं व्यापक मूल्यांकन, समावेशी शिक्षा तथा विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत मार्गदर्शन दिया।


कार्यक्रम के दौरान समूह गतिविधियाँ,विचार- विमर्श और प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किए गए, जिनमें शिक्षकों ने सक्रिय भागीदारी निभाई।उन्हें विद्यालय की वार्षिक कार्ययोजना,परीक्षा प्रणाली,सह-शैक्षणिक गतिविधियों,सुरक्षा मानकों तथा विद्यालय के नियमों से भी अवगत कराया गया।दो दिवसीय इस अभिमुखीकरण कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। विद्यालय प्रबंधन ने विश्वास व्यक्त किया कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के साथ-साथ शिक्षा की गुणवत्ता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।बहरहाल
संत जेवियर्स स्कूल, कोटालपोखर का यह दो दिवसीय ओरिएंटेशन कार्यक्रम केवल औपचारिक परिचय तक सीमित नहीं रहा,बल्कि नई शिक्षा नीति, आधुनिक शिक्षण तकनीकों,नैतिक मूल्यों, डिजिटल सुरक्षा और विद्यालय-अभिभावक साझेदारी को मजबूत बनाने की दिशा में एक सार्थक एवं प्रेरणादायक पहल साबित हुआ। यह कार्यक्रम नए शैक्षणिक सत्र की सकारात्मक और प्रभावशाली शुरुआत का संदेश देने में पूरी तरह सफल रहा।