समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। ईमानदारी से काम करने वालों के शौक भले ही पूरे ना हो, पर नींद जरूर पूरी होती है। आज के समय में इन बातों को शायद कम लोग ही मानते होंगे। ईमानदार लोगों का मिलना बहुत मुश्किल भी है। लेकिन इस बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता कि दुनिया में ईमानदारी अभी भी बची है।
शनिवार को एक ऐसी तस्वीर सामने आई, जो इस बात को साबित करने के लिए काफी है। दरअसल तीन दिन पहले ही बिरसा चौक के पास सदर प्रखंड के इलामी गांव के सरफराज आलम का पासबुक, पैन कार्ड और आधार कार्ड खो गया था। तीन दिनों से परेशान फिर रहे सरफराज को शनिवार को अचानक एक अनजान नंबर से फोन आया। अनजान फोन से सरफराज को ना सिर्फ राहत मिली, बल्कि आंखों के सामने इमानदारी की वो तस्वीर भी तैरने लगा, जो दिल को अजीब सा सुकून महसूस करा रहा था। अनजान नंबर से फोन कहीं ओर से नहीं, बल्कि सरफराज का खोया दस्तावेज संभाल कर रखने वाले की ओर से था। सदर प्रखंड के ही शहरकोल पंचायत के दुर्गापुर गांव का रहने वाला आदिवासी युवक गयना टुडू ने दस्वावेज मिलने की बात अपने पहचान के जुलियस सोरेन को बताया।
जुलियस ने आधार कार्ड में पता देखकर सरफराज से संपर्क किया। फिर सरफराज आलम ने गयना टुडू से मिलकर अपना खोया दस्तावेज लिया। वहीं सरफराज ने युवक गयना टुडू का धन्यवाद किया और तस्वीर भी खिंचवाया। इस दौरान सरफराज ने कहा कि गयना टुडू जैसा ईमानदार युवक समाज के लिए मिसाल है। ऐसे लोगों की वजह से ही दुनिया में ईमानदारी बची है।