समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। शादी का झांसा देकर यौन शोषण करने और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने के मामले में पाकुड़ की अदालत ने मुख्य आरोपी जोहर आलम को सात वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिवाकर पांडेय की अदालत ने आरोपी पर 50 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माने की राशि जमा नहीं करने पर उसे एक वर्ष का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
शादी का भरोसा देकर बनाए संबंध, फिर मुकरने का आरोप—
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मामला मालपहाड़ी थाना क्षेत्र का है। पीड़िता के लिखित फर्द बयान के आधार पर मालपहाड़ी थाना में कांड संख्या 189/2025 दर्ज किया गया था। अभियोजन के अनुसार,आरोपी जोहर आलम ने पीड़िता को शादी का भरोसा दिया और उसके साथ कई बार शारीरिक संबंध बनाए। बाद में जब पीड़िता ने शादी की बात कही तो आरोपी कथित तौर पर अपने वादे से मुकर गया।
फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी देकर ब्लैकमेल–
अभियोजन के मुताबिक,आरोपी के पास पीड़िता के आपत्तिजनक फोटो और वीडियो भी थे। इन्हें सोशल मीडिया पर वायरल करने की धमकी देकर पीड़िता को ब्लैकमेल किए जाने का आरोप लगाया गया। शिकायत में गाली-गलौज और मारपीट के आरोप भी लगाए गए थे।
घर में घुसकर तोड़फोड़ और मारपीट का भी आरोप–
मामले में आरोपी के परिजनों और अन्य लोगों को भी नामजद किया गया था। आरोप था कि पीड़िता के घर का ताला तोड़कर सामान निकाल लिया गया तथा उसकी मां के साथ मारपीट की गई।इस मामले में यफर शेख,नासिर शेख,जुबेर आलम, भदौरी बीबी और हबीबुल शेख को भी आरोपी बनाया गया था।
साक्ष्य और गवाहों के आधार पर कोर्ट का फैसला—
पुलिस ने मामले में बीएनएस की धारा 69, 77, 88, 324(2), 351(3), 3(5) तथा पोक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत कार्रवाई करते हुए आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया था। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से पेश किए गए साक्ष्यों और गवाहों पर विचार करने के बाद अदालत ने मुख्य आरोपी जोहर आलम को बीएनएस की धारा 69 के तहत दोषी ठहराया।अदालत ने उसे 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं, मामले के अन्य सह-अभियुक्तों को अदालत ने एक वर्ष के एडमॉनिशन/ चेतावनी के आधार पर बॉन्ड भरवाकर रिहा कर दिया।
कोर्ट के फैसले से स्पष्ट संदेश:–
मामले में अदालत का फैसला ऐसे समय आया है, जब शादी का झांसा देकर यौन शोषण और आपत्तिजनक सामग्री के जरिए ब्लैकमेल किए जाने की शिकायतें गंभीर सामाजिक और कानूनी चिंता का विषय बनी हुई हैं। इस मामले में न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मुख्य आरोपी को दोषी ठहराते हुए कारावास और आर्थिक दंड दोनों की सजा सुनाई है।
