समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। मां दुर्गा की आराधना,पारंपरिक परिधानों की खूबसूरती,डांडिया की खनक और संगीत की मधुर धुनों के बीच पाकुड़ का आरजे स्टेडियम नवरात्रि के उल्लास में सराबोर हो उठा। सरस्वती पुस्तकालय सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति की ओर से आयोजित भव्य डांडिया उत्सव में भक्ति और संस्कृति का ऐसा संगम देखने को मिला,जहां हर थाप के साथ उत्साह बढ़ता गया और हर कदम मां दुर्गा की आराधना का प्रतीक बनता नजर आया। बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं और युवतियों की मौजूदगी ने आयोजन को यादगार बना दिया।
दीप प्रज्वलन और मां की आरती से हुआ शुभारंभ—
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कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी संजीत कुमार चंद्र तथा समिति के अध्यक्ष सह समाजसेवी अमलान कुसुम सिन्हा उर्फ बुलटी दा ने दीप प्रज्वलित कर किया।इसके बाद मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और आरती की गई।मां के जयकारों और भक्तिमय वातावरण के बीच डांडिया उत्सव का आगाज हुआ। धार्मिक अनुष्ठान के बाद जैसे ही संगीत की धुन गूंजी,पूरा स्टेडियम उत्साह और उमंग से भर उठा।

डांडिया की थाप पर थिरके कदम, रंग-बिरंगे परिधानों ने मोहा मन—
पारंपरिक परिधानों में सजी महिलाएं और युवतियां इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण रहीं। रंग-बिरंगे लहंगे, पारंपरिक आभूषण और हाथों में सजी डांडिया की छड़ियों के साथ प्रतिभागियों ने सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। संगीत की लय के साथ घूमते कदम और डांडिया की आपसी टकराहट से पूरा परिसर उत्सवमय हो गया।महिलाओं ने न केवल नृत्य का आनंद लिया,बल्कि अपनी कला और प्रतिभा का भी प्रदर्शन किया। युवाओं की उत्साही भागीदारी ने आयोजन में चार चांद लगा दिए।वहीं, कोलकाता से आए कलाकारों की डांडिया प्रस्तुतियों ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। कलाकारों के नृत्य और संगीत की ताल पर दर्शक भी झूमने को मजबूर हो गए।

डांडिया सिर्फ नृत्य नहीं,शक्ति की आराधना का प्रतीक—
नवरात्रि में डांडिया का विशेष सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व माना जाता है।पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार,डांडिया नृत्य देवी दुर्गा और महिषासुर के बीच हुए युद्ध तथा बुराई पर अच्छाई की विजय से जुड़ा है। इसमें इस्तेमाल की जाने वाली सजी हुई लकड़ियों को देवी की तलवार का प्रतीक माना जाता है। इसी कारण डांडिया को स्वॉर्ड डांस यानी तलवार नृत्य भी कहा जाता है।डांडिया की हर थाप शक्ति, साहस और सकारात्मक ऊर्जा का संदेश देती है। नवरात्रि के दौरान इस नृत्य के माध्यम से लोग मां दुर्गा के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। यही वजह है कि धार्मिक आस्था से जुड़ा यह आयोजन आज सामाजिक मेल-मिलाप और सांस्कृतिक उत्सव का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन गया है।
महिलाओं के लिए उत्साह,आत्मविश्वास और मेल-मिलाप का मंच–
कार्यक्रम में शामिल महिलाओं ने कहा कि नवरात्रि के दौरान डांडिया उत्सव का आयोजन उन्हें नई ऊर्जा और उत्साह से भर देता है। व्यस्त दिनचर्या के बीच ऐसे कार्यक्रम महिलाओं को एक-दूसरे से मिलने, अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने और सांस्कृतिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्रदान करते हैं।
उनके अनुसार,डांडिया केवल मनोरंजन नहीं है,बल्कि परंपरा को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। ऐसे आयोजन से महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ता है और समाज में आपसी सहयोग तथा एकजुटता की भावना मजबूत होती है।
परंपरा और आधुनिक उत्सव का खूबसूरत संगम—
सरस्वती पुस्तकालय सार्वजनिक दुर्गापूजा समिति की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम ने पाकुड़ में नवरात्रि के उत्साह को एक अलग रंग दिया। धार्मिक अनुष्ठान से शुरू हुआ आयोजन संगीत, नृत्य और सामूहिक उल्लास के साथ आगे बढ़ा। आरजे स्टेडियम में उमड़ी भीड़ ने आयोजन की लोकप्रियता को दर्शाया।डांडिया की खनक में जहां मां दुर्गा की शक्ति की आराधना थी, वहीं थिरकते कदमों में सामाजिक एकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश भी छिपा था। पाकुड़ का यह डांडिया उत्सव साबित कर गया कि त्योहारों की असली खूबसूरती केवल सजावट और रोशनी में नहीं, बल्कि उन खुशियों में है, जो लोगों को एक साथ लाकर रिश्तों में अपनापन और समाज में सद्भाव बढ़ाती हैं।

