
हिरणपुर । प्रखंड मुख्यालय स्थित मवेशी हाट परिसर में आयोजित नौ दिवसीय राम कथा पाठ के तीसरे दिन रविवार देर शाम को प्रवचन से पूरा गांव में भक्ति की बयार बह गई।
आयोजित राम कथा में चित्रकूट मिथलांचल हरिद्वार से आए कथावाचक कुमार रवि शंकर ने श्रद्धालुओं को शिव पार्वती के विवाह की कथा सुनाते हुए कहा कि भगवान शिव की बारात जब हिमाचल पहुंची तो माता पार्वती के माता-पिता बारात में सम्मिलित भूत, प्रेत औघड़ को देखकर चकित रह गए। उन्होने कहा कि भगवान शिव प्रकृति की सभी जीवों में आपसी समन्वय बनाए रखने के लिए अपने साथ भूत, बैताल से लेकर सर्प एवं जानवरों को भी साथ रखते थे। भगवान शिव पार्वती के विवाह की कथा सुन पंडाल में काफी संख्या में उपस्थित महिला, पुरुष भाव विभोर हो गए।
वहीं राजा हिमाचल माता शती की पिता ने जब महायज्ञ किया। जिसमें सभी राजा महाराजा, देवी देवताओं को निमंत्रण दिया गया। इस यज्ञ में सभी को सम्मलित होने का निमंत्रण दिया। परंतु अपने ही पुत्री माता शती पार्वती और अपने दामाद भगवान शंकर को नहीं दिया। यह सुन माता शती भगवान शंकर जी इच्छा के विरुद्ध अपने पिता की यज्ञ में शामिल होने आए। परंतु अपनी पुत्री माता पार्वती को देख कर उनके पिता ने अभिवादन न कर तिरस्कार करना शुरू किया। तिस्कार में माता शती की पतिदेव बाबा शंकर का तिरस्कार उनके पिता के द्वारा भला बुरा कहने लगे। यह तिरस्कार भला कोई पति व्रता अपने ही पति को उनके पिता के द्वारा करने पर केसे शांत रहती। यह सुनकर माता शती उस यज्ञनिकुंड में कूद गई। यह देख नाथो के नाथत्रिलोक शती की शव को लेकर तांडव करते हुए पुरे ब्रह्मांड त्राहिमाम मचा दिया। इसे हरि नारायण ही शांत कर पाए। यह पूरी प्रसंग कथावाचक के द्वारा माता शती के पिता के द्वारा अभिमानी होने का दंड के बारे में विस्तार पूर्वक बताया।
मौके पर बजरंगबली पूजा कमिटी के अध्यक्ष राजेश भगत, सचिव पिंटू भगत, बिपिन यादव, लक्ष्मण गुप्ता, बाबूराम दास, राजकुमार बागति, उत्तम साहा आदि की अहम भूमिका रही।