एक साल से धूल फांक रही सुसज्जित तीन एम्बुलेंस,तकनीकी पेंच में फंसा है मामला

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मक़सूद आलम की रिपोर्ट

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पाकुड-उद्योग और औद्योगिक घरानों पर हमेशा से आरोप यह लगता आया है,की वो अपनी कमाई तो करते हैं लेकिन प्रभावित लोगों एवं आमजनता के लिए कुछ नही करते।हम यह इस लिए कहना चाह रहे है कि कोल विस्थापितों के कई आंदोलनों,विरोधों एवं राजनैतिक खेलों को पाकुड जिला ने देखा है।लेकिन बीजीआर कोल कंपनी के सीएसआर मद से दिए गए तीन एम्बुलेंस पुराने सदर अस्पताल कैम्प्स में अपनी बैधब्यता को रो रहा है।तकरीबन एक वर्ष पहले बीजीआर कंपनी ने तीन एम्बुलेंस तमाम एमरजेंसी सुविधा सहित पाकुड़ जिला प्रशासन को सौंपा। स्वाभाविक रूप से एम्बुलेंस था,इस लिए सिविल सर्जन पाकुड़ ने उसे प्राप्त किया,चर्चाएं हुई कि रेड क्रॉस सोसाईटी के द्वारा इन एम्बुलेंसों का संचालन किया जाना है।सिविल सर्जन ने उसी वक्त एम्बुलेंस रेड क्रॉस सोसाईटी को हैंड ओवर कर दिया।किसी भी एम्बुलेंस को चलाने के लिए कम से कम एक चालक और एक मेडिकल ट्रेंड सहायक की आवश्यकता होती है।वर्ष बीत गए लेकिन इन एम्बुलेंसों की वैधब्यता पर चालक रूपी सिंधु और सहायक रूपी बिंदी अबतक लग नही सका।आश्चर्य है कि बैठकें होती है इसपर चर्चाएं भी होती हैं लेकिन एक वर्ष में बमुश्किल दो चालक ही चयनित किये गए हैं।स्वाभाविक रूप से सहायक के बिना यह भी किसी काम के नही।नतीजतन तीन में से एक गाड़ी खराब  हो गई है। बाकी बचें दो को स्वास्थ्य विभाग के ड्राइवर स्टार्ट करके जान फूंके हुए है।एम्बुलेंस के इंजन तो स्टार्ट हो जाते हैं लेकिन उसके अंदर पड़ी स्वास्थ्य सुविधाओं की मशीनें तो बस पड़ी ही है,वह अकस्मात आवश्यकता होने पर कितना सक्षम होगा यह कह पाना फिलवक्त नामुमकिन है।लेकिन इस बाबत जब सिविल सर्जन एम के टेकड़ीवाल से बात की गई तो उन्होंने कहा कि निर्णय के अनुसार मैंने रेड क्रॉस सोसाईटी को एम्बुलेंस सही सलामत हैंडओवर कर दिया है।चालक और सहायक की व्यवस्था करना रेडक्रॉस सोसाईटी और बीजीआर के जिम्मे है।चालक तथा सहायकों का पेमेंट भी बीजीआर से होना है इस लिए इस बाबत विशेष और सटीक जानकारी आपको रेडक्रॉस सोसाईटी और बीजीआर से ही मिल सकती है।रेडक्रॉस के पदेन सचिव अनुमंडल पदाधिकारी हरिवंश पंडित ने बताया कि बहुत जल्द इस पर निर्णय ले लिया जाएगा और आमजनता को इसकी सेवा दी जाएगी।समय सीमा पूछे जाने पर उन्होंने कहा दस दिनों के अंदर इस मामले को कार्यरूप दे दिया जाएगा।अब देखना यह है कि पिछले एक वर्ष से यूं ही बेकार पड़ी एम्बुलेंस की गाड़ियां दस दिनों में सड़क पर दौड़ती नजर आती है या फिर आमजनता इस सुविधा के लिए टकटकी लगाए रखे।

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