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Maqsood Alam
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बचपन में बंदूक व टैंक के खिलौने के शौकीन रॉकी अब करेंगे देश की सुरक्षा

सीआरपीएफ में मिली नौकरी,जम्मू-कश्मीर में होगी पहली पोस्टिंग

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Gunjan Saha
(Desk Head)

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अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। पश्चिम बंगाल के सीमा क्षेत्र से सटा सदर प्रखंड के हमरुल गांव के रहने वाले 22 साल का नौजवान मो. नूरनवी उर्फ रॉकी ने अनुशासन, कड़ी मेहनत और सही मार्गदर्शन से सेना में जाने के सपने को साकार कर दिखाया है। जिसे वह बचपन से देखते आ रहा था। यह सपना सिर्फ एक वर्दी नहीं, बल्कि राष्ट्र की सेवा, सम्मान और एक अनुशासित जीवन का प्रतीक भी हैं। यह सफलता रॉकी के देशभक्ति का जज्बा, शारीरिक और मानसिक दृढ़ता को भी दर्शाता है। दरअसल रॉकी को एसएससी जीडी के एग्जाम में ना सिर्फ सफलता मिली है, बल्कि सीआरपीएफ के लिए ट्रेनिंग से लेकर मेडिकल और तमाम ‌परीक्षाओं को पास कर गए हैं। मेरिट लिस्ट में पूरे झारखंड में टॉपर भी रहा है। इस समय रॉकी की सफलता से पूरे परिवार में खुशी का माहौल है। माता-पिता ही नहीं, पूरे गांव में जश्न का माहौल है। परिवार और गांव वाले इसलिए भी ज्यादा खुश और गर्वित हैं कि रॉकी ने देश की सेवा के लिए सीमा पर सुरक्षा के रास्ते को चुना। रॉकी की देशभक्ति के इस जज्बे को हर कोई सलाम कर रहा है। पिता कबीर शेख एक साधारण व्यक्तित्व वाले इंसान है। मां तूहीबिना बीवी गृहिणी और स्वास्थ्य सहिया है। रॉकी के मो. नूर तस्लीम शेख और यूसुफ नबी दो भाई भी हैं। इनमें सबसे छोटा भाई मो. नूर तस्लीम शेख ग्रेजुएशन कर रहे हैं। नूर तस्लीम शेख का सपना पुलिस में जाना और दरोगा बनने का है। अगर रॉकी की इस सफलता से सबसे ज्यादा कोई खुश है, तो उनके माता-पिता और भाई ही हैं। पिता कबीर शेख ने बताया कि रॉकी को बचपन से ही सेना में जाने का सपना था। इसलिए रॉकी ने इसी रास्ते को चुना। उन्होंने कहा कि रॉकी में बचपन से ही सेना में जाने का गुण और लक्षण साफ दिखता था। इसलिए हमने भी रॉकी का हर पल हिम्मत बढ़ाया।

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ताकि उसका सपना पूरा हो और देश के जांबाज सेनाओं में नाम शामिल हो। उन्होंने कहा कि बचपन में रॉकी बंदूक और युद्ध के टैंक के खिलौने का बहुत ज्यादा शौकीन था। उन्होंने कहा कि कभी भी मेला घूमने जाते तो उसकी नजर हमेशा बंदूक और टैंक के खिलौने की ओर चली जाती थी। बंदूक और टैंक के खिलौने की दुकान पर नजर पड़ते ही खरीदने के लिए जिद में आ जाता और जब तक बंदूक और टैंक खरीद कर नहीं देते, तब तक शांत नहीं होता था। अपने बंदूक और टैंक से दिन-रात खेलता रहता था। युद्ध में लड़ाई के दौरान जवानों के वीडियो को गौर से देखता था और दिन-रात उसकी नकल भी करता था। पिता कबीर शेख ने कहा कि रॉकी एक मेहनती और अनुशासित युवा है। इन्हीं गुणों ने उसे इस मुकाम तक पहुंचा है। नियमित पढ़ाई और खान-पान के साथ-साथ सुबह-सुबह जल्दी उठ जाना और दौड़ लगाना, उसकी दिनचर्या में शामिल था। पिता कबीर शेख ने बताया कि रॉकी की प्रारंभिक पढ़ाई गांव में ही तीलपहाड़ी प्राइमरी स्कूल में हुई। मैट्रिक की पढ़ाई नगरनवी हाई स्कूल से पुरा किया। केकेएम कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने बताया कि रॉकी ने एसएससी जीडी का एग्जाम 2023 में दिया था। जिसमें सफलता के बाद सिलीगुड़ी में रनिंग और कोलकाता में मेडिकल और फिर चेन्नई में ट्रेनिंग चली। इन सारे परीक्षाओं में सफल हुए। मेरिट लिस्ट में झारखंड टॉपर बने। उन्होंने बताया कि रॉकी को जम्मू कश्मीर में पोस्टिंग मिली है। यहां से ट्रेनिंग पूरी करने के बाद जम्मू कश्मीर जाने की तैयारी चल रही है। इसी साल 13 जनवरी को ट्रेनिंग के लिए घर से विदा हुए। इस दौरान पूरे गांव में जश्न का माहौल था। ट्रेनिंग के लिए विदाई के दौरान पूरे परिवार के लोग, रिश्तेदार, आस-पड़ोस के लोग, ग्रामीण और दूर दराज के जानने वाले हजारों लोग पहुंचे थे। लोगों ने फूल-माला से लादकर रंग अबीर लगाकर हंसते हुए विदा किया। हालांकि इस दौरान परिवार और तमाम लोगों की आंखों में आंसू जरूर थे, लेकिन वह गर्व के आंसू थे। इस दौरान हर कोई रॉकी के जज्बे को सैल्यूट कर रहे थे। लोग अंदर ही अंदर यह कहने से चूक नहीं रहे थे कि…. मंजिल उन्हीं को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है, पंख से कुछ नहीं होता, हौसलों से उड़ान होती है।

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