समाचार चक्र संवाददाता
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पाकुड़-परीक्षा की तैयारी जब तक नहीं करेंगे तबतक सफलता हासिल करना मुश्किल होगा.आज का अनुशासन ही कल की पहचान है,परीक्षा का समय किसी भी विद्यार्थी के जीवन का सबसे महत्वपूर्ण और निर्णायक समय होता है। उपरोक्त बातें डॉन बॉस्को स्कूल के प्राचार्य शिव शंकर दुबे ने कही. उन्होंने कहा की यह वह समय है जब केवल किताबी ज्ञान ही नहीं,बल्कि विद्यार्थी का धैर्य,अनुशासन,आत्मनियंत्रण और मेहनत भी परखी जाती है। जो छात्र इस समय को गंभीरता से लेते हैं, वही भविष्य में सफलता की ऊँचाइयों तक पहुँचते हैं.प्रधानाचार्य शिव शंकर दुबे का मानना है कि परीक्षा में सफलता अचानक नहीं मिलती। यह रोज़ की गई छोटी-छोटी मेहनत, समय की सही योजना और अनुशासित जीवनशैली का परिणाम होती है। जो विद्यार्थी रोज़ एक निश्चित समय पर पढ़ाई करते हैं, समय पर सोते-जागते हैं और अपने कार्य को टालते नहीं हैं, वे तनाव से दूर रहते हैं और आत्मविश्वास से भरे रहते हैं।धैर्य परीक्षा की तैयारी का सबसे बड़ा हथियार है। अगर कोई विषय या अध्याय पहली बार में समझ न आए, तो निराश होना कमजोरी नहीं, बल्कि प्रयास छोड़ देना कमजोरी है। बार-बार अभ्यास करने से ही कठिन विषय सरल बनते हैं। याद रखें—असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की पहली सीढ़ी होती है।अनुशासन हमें यह सिखाता है कि मनोरंजन और पढ़ाई में संतुलन कैसे बनाया जाए। मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और अनावश्यक गतिविधियाँ विद्यार्थियों की सबसे बड़ी बाधा हैं। जो छात्र इनसे दूरी बनाकर अपने लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं, वही समय का सही उपयोग कर पाते हैं।परीक्षा केवल अंक प्राप्त करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह हमारे चरित्र, जिम्मेदारी और मेहनत की सच्ची पहचान है। आज की गई लापरवाही कल पछतावे में बदल सकती है, और आज की मेहनत कल गर्व का कारण बन सकती है। इसलिए हर विद्यार्थी को चाहिए कि वह पूरे मन, पूरे अनुशासन और पूरे धैर्य के साथ अपनी तैयारी करे।जो आज खुद पर नियंत्रण रखता है, वही कल अपने भविष्य को नियंत्रित करता है।अनुशासन और धैर्य के बिना मेहनत अधूरी है,और मेहनत के बिना सफलता असंभव।
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