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समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। नगर परिषद के उपाध्यक्ष पद के लिए गुरुवार को संपन्न हुए चुनाव काफी दिलचस्प रहा। अंतिम फैसला के लिए लॉटरी की प्रक्रिया का सहारा लेना पड़ा। एक वोट रिजेक्ट क्या हो गए, कि राणा ओझा को किस्मत का साथ मिल गया और उपाध्यक्ष बन गए। दरअसल नगर परिषद कार्यालय में गुरुवार को नवनिर्वाचित अध्यक्ष एवं वार्ड पार्षदों के शपथ ग्रहण के साथ-साथ उपाध्यक्ष पद के लिए चुनाव होना था। निर्धारित समय पर चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई और निर्वाचित सभी 21 वार्ड पार्षद चुनाव प्रक्रिया में शामिल हुए। नियम अनुसार उपाध्यक्ष पद के लिए जादुई आंकड़ा 11 वोटों का था। जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीसी मनीष कुमार की विशेष उपस्थिति में चुनाव शुरू हुआ। उपाध्यक्ष पद के लिए वार्ड नंबर 4 की पार्षद रूपाली सरकार और वार्ड नंबर 5 के पार्षद राणा ओझा ने नामांकन कराया। नामांकन एवं सभी प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद मतदान की प्रक्रिया शुरू हुई। दोनों प्रत्याशियों के पक्ष में वार्ड पार्षदों का मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया। लेकिन परिणाम ने रोमांचक मोड़ ले लिया। जब 21 वार्ड पार्षदों के द्वारा उपाध्यक्ष पद के दोनों प्रत्याशियों को किए गए मतों की गिनती हुई, तो दोनों प्रत्याशियों को बराबर यानी 10-10 वोट मिले। इस तरह परिणाम टाई पर अटक कर रह गया। परिणाम टाई होने की मुख्य वजह एक वोट अमान्य यानी रिजेक्ट कर दिया गया। एक वोट के रिजेक्ट होने के बाद बराबर मत मिलने की वजह से नियम अनुसार लॉटरी की प्रक्रिया अपनाई गई। लॉटरी की प्रक्रिया में राणा ओझा को किस्मत का साथ मिला और उपाध्यक्ष बन गए। यूं तो पूरे चुनाव के दौरान दोनों ही उम्मीदवारों की धड़कनें तेज रही। लेकिन जब लॉटरी की बारी आई तो दोनों प्रत्याशियों के धड़कनों की रफ्तार और ज्यादा तेज हो गई। इधर अंदरखाने से मिलती सूचनाएं भी बाहर खड़े समर्थकों की भीड़ में रोमांच पैदा कर रहा था। नगर परिषद कार्यालय के बाहर परिणाम का इंतजार कर रहे लोगों में उत्सुकता दिखाई दिया। इसी दौरान लॉटरी की प्रक्रिया की सूचना पर बाहर खड़े लोगों में नियमों को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई। इधर उपाध्यक्ष निर्वाचित होने के बाद राणा ओझा के समर्थकों ने उनका जोरदार स्वागत किया। कार्यालय से निकलने के बाद फूल मालाओं से स्वागत किया गया। जिंदाबाद के नारों के साथ शहर में विजय जुलूस निकला। इस दौरान रंग अबीर भी खेली गई। नवनिर्वाचित उपाध्यक्ष राणा ओझा और जुलूस में शामिल लोगों ने एक दूसरे को जमकर रंग लगाया। वहीं पूरे जुलूस के दौरान आतिशबाजी भी की गई।
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