
पाकुड़। बैंक कॉलोनी के पास स्थित मैरिज हॉल में रविवार को जाने-माने चर्चित समाजसेवी लुत्फुल हक के सम्मान में समारोह का आयोजन किया गया। आयोजित समारोह में आमंत्रित अतिथियों ने लुत्फुल हक को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। उन्हें मोमेंटो भी प्रदान किया। इस दौरान समारोह स्थल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।

अतिथियों ने अपने संबोधन के जरिए लुत्फुल हक की जमकर प्रशंसा की। जरुरतमंदों की सेवा में लुत्फुल हक के द्वारा किए जा रहे कार्यों की खुब सराहना की। जिसके लिए उन्हें देश-विदेश में भी सम्मान मिला। इससे पूर्व लुत्फुल हक और सभी अतिथियों का गुलदस्ता देकर स्वागत किया गया। अतिथियों ने दीप प्रज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया।

अतिथियों में शामिल सिविल सर्जन डॉ. मंटू कुमार टेकरीवाल, रेड क्रॉस सोसाइटी के डॉ. बिंदु भूषण, फेस संस्था की सचिव रितु पांडेय, सारस्वत स्मृति के अध्यक्ष एवं शिक्षाविद रामरंजन सिंह, केकेएम कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. मनोहर कुमार, इंसानियत फाउंडेशन के अध्यक्ष बानिज शेख, मिथलेश ठाकुर, अजीजुर रहमान आदि ने समारोह को संबोधित किया।

पूरे कार्यक्रम के दौरान मंच संचालक के रूप में मौजूद बिहार के सीतामढ़ी से पहुंचे उर्दू के शायर जमील अख्तर शफीक ने अपने शेरो शायरी से न सिर्फ मौजूद लोगों का मनोरंजन किया, बल्कि समाज सेवा और शिक्षा के प्रति प्रेरित भी किया। अतिथियों ने लुत्फुल हक का मिसाल देते हुए लोगों को समाज सेवा के लिए प्रेरित भी किया। अपने समाज में समाज सेवा के साथ-साथ शिक्षा को बढ़ावा देने की भी अपील की। पूरे कार्यक्रम में जहां लुत्फुल हक की समाज सेवा के क्षेत्र में किए गए एवं किया जा रहे कार्यों की जमकर प्रशंसा हुई, वहीं नारी शिक्षा पर विशेष रूप से जोर दिया गया। वहीं कार्यक्रम को शुरू कराने और आगे बढ़ाने से लेकर समापन तक अताउर रहमान फैजी की सराहनीय भूमिका रही।
रामरंजन सिंह (अध्यक्ष सारस्वत स्मृति सह शिक्षाविद)– इंसान के रूप में दुनिया में आने वाले हर शख्स की जिम्मेवारी है कि जरूरतमंदों की सेवा करें। लुत्फुल हक हर इंसान के लिए एक मिसाल है। इंसान का अगर जन्म हुआ है तो उन्हें मृत्यु का भी सामना करना पड़ेगा। इंसान जब दुनिया से विदा होंगे, तब उनके कार्य ही इस दुनिया में रह जाएंगे। इसलिए जरूरतमंदों की मददगार बने। इस बात का भी ध्यान रखना होगा कि समाज को शिक्षा के जरिए भी मजबूत बनाना है। यूं कहे कि शिक्षा के बिना बेहतर समाज का निर्माण संभव नहीं है। विशेष रूप से हमारी समाज की बेटियों को पढ़ाना जरूरी है। बेटियों को पिता और ससुराल दोनों घर संभालना पड़ता है। अगर बेटियां पढ़ गई, तो एक नहीं दो-दो घर मजबूती के साथ संभालेंगी।
डॉ. मंटू टेकरीवाल (सिविल सर्जन)– लुत्फुल हक जैसे समाजसेवी बहुत कम होते हैं। मैं पाकुड़ में आने के बाद से ही इनके द्वारा समाज के लिए किए जा रहे हैं कार्यों को विभिन्न माध्यमों से देखता हूं। इन्हें स्थानीय और कई बड़े स्तर पर भी सम्मानित किया गया है। इंसान की मौत के बाद उनका शरीर चला जाता है। लेकिन उनके किए गए कार्य, नाम, शोहरत यही रह जाती है। लुत्फुल हक का जो कार्य है, वह अलग है। लुत्फुल हक समाज सेवा में जो काम कर रहे हैं, वो पाकुड़ की धरती, पूरा भारत, विश्व याद रखेगा। उन्होंने कहा कि काम ऐसा करो कि पहचान बन जाए, हर कदम ऐसा चलो की मिसाल बन जाए।
रितु पांडेय (फेस संस्था की सचिव)– यह बहुत ही सुनहरा समय, पल और मौका है। जिन्होंने समाज के लिए कुछ काम किया और हम उन्हें याद कर रहे हैं। यह कोई ऐसे नहीं मिलता है, यह ऊपर वाले की देन है कि आज हम सब एकत्रित होकर उन्हें सम्मानित कर रहे हैं। कहीं ना कहीं हम सब उस खुशी को जाहिर कर रहे हैं, उन हर मौकों को अपने से सम्मानित कर रहे हैं, जो उन्हें आगे और काम करने के लिए प्रेरित करेगा। पाकुड़ में बहुत सारे चीजों की कमी है। मैं लुत्फुल हक से निवेदन करूंगी कि यहां जो शिक्षा की कमी है, उस पर भी कम करें। हम उनके साथ खड़े हैं। बहुत सारे बच्चों में हुनर होने के बाद भी आगे नहीं बढ़ पाते हैं। उनके लिए ऐसा कुछ करें कि हम बच्चों को शिक्षित करें और आगे जाकर वो अपने पांव पर खड़े हो पाए। विशेष रूप से बच्चियों को आगे बढ़ाने की जरूरत है। यहां बहुत सारे मामले आते हैं कि बच्चियां मैट्रिक पास भी नहीं कर पाती है कि उनकी शादियां करा दी जाती है। यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है। इनके लिए विशेष रूप से काम करने की जरूरत है।
डॉ. मनोहर कुमार (प्रोफेसर केकेएम कॉलेज)– लुत्फुल हक जैसे शख्सियत पाकुड़ के लिए गर्व है। आने वाले समय में उनकी पहचान समाज सेवा के क्षेत्र में और बढ़े। इसके लिए हम उनके साथ हैं और उन्हें शुभकामनाएं देते हैं। मैं उनसे यही गुजारिश करता हूं कि जिस तरह जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं, शिक्षा के क्षेत्र में भी कुछ इसी तरह पहल करें। ताकि शिक्षा से वंचित छात्र या आर्थिक अभाव में शिक्षा से दूर हो रहे हैं छात्रों को मंजिल तक पहुंचाया जा सके।
बानिज शेख (अध्यक्ष इंसानियत फाउंडेशन)– लुत्फुल हक हम जैसे युवाओं के लिए प्रेरणा है। युवाओं से अपील है कि समाज सेवा के कार्यों में रुचि लें। इंसानियत फाउंडेशन के माध्यम से हमारी टीम जरूरतमंद मरीजों को रक्तदान करती है। युवाओं को प्रेरित कर रक्तदान कराया जाता है। इसमें एक अजीब सा सुकून है, जिसे आप और हम पैसे से खरीद नहीं सकते। आप सबों से रक्तदान के लिए अनुरोध करता हूं।