समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। मुफस्सिल थाना क्षेत्र के गोपीनाथपुर गांव में जाहिलों की लड़ाई में दो-दो मासूम को गोलीबारी का शिकार होना पड़ा। एक की तो जान ही चली गई,वहीं दूसरा बाल-बाल बच गया। जिनका इस लड़ाई से कोई मतलब ही नहीं था।

लड़ाने वालों को तो तसल्ली मिल गई होगी, पर जिन्हें गोलियां खानीं पड़ी, उन्हें इंसाफ कौन दिलाएगा। इन्हीं सब सवालों को जन्म देती ऐसी घटनाओं से इंसान को सीख जरुर लेना चाहिए। अगर थोड़ा सा भी परिणाम का ध्यान रखा जाता,तो शायद ऐसी घटनाएं नहीं घटती। प्रशासन परेशान,आम जनता परेशान,समाज के जिम्मेदार लोग परेशान रहे। इस परेशानियों को खड़े करने वाले लोगों ने अक्लमंदी नहीं दिखाई, इस बात से कम-से-कम इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल प्रशासन के तत्परता से मामला तो शांत हो गया है।लेकिन गोली खाने वाले दोनों मासुम को कब तक न्याय मिलेगा,यह देखने वाली बात होगी। दरअसल बंगाल सीमा पर मुफ्फसिल थाना क्षेत्र अंतर्गत गोपीनाथपुर गांव में ईद वाली दिन प्रतिबंधित जानवर की कुर्बानी को लेकर दो समुदाय आपस में भीड़ गए थे। इसकी आंच सीमा पार बंगाल तक पहुंच गई।पाकुड़ के गोपीनाथपुर और सीमा से सटा बंगाल किस्टोनगर के ग्रामीणों के बीच हिंसक झड़प हो गई। जिसमें बमबाजी हुई,गोलियां चली, ईंट पत्थर चले,आगजनी हुई, तोड़फोड़ किया गया,लाठियां बरसाई गई। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए मामले को शांत करा दिया। अगले दिन मंगलवार को मामले ने विकराल रूप ले लिया। इस दिन बमबाजी, तोड़फोड़,आगजनी,पत्थरबाजी के साथ ही गोलीबारी भी हुई। पुलिस को अतिरिक्त सुरक्षा बल के साथ मोर्चा संभालना पड़ा। इसी दौरान दो मासूम को गोलीबारी का शिकार होना पड़ गया। जिसमें बंगाल किस्टोनगर गांव के एक बच्चे की मौत हो गई। लगभग पंद्रह साल के शोयब शेख (पिता- डालीम शेख) को गोलीबारी में जान गंवानी पड़ी। इधर पाकुड़ हरिगंज के पंद्रह वर्षीय अरसलाम शेख (पिता- हुमायूं शेख) के पैर में गोली लगने से घायल हो गया। हालांकि गोली कहां से चली, यह स्पष्ट नहीं है।लेकिन अलग-अलग तरीके से दावा जरुर किया जा रहा है।