अबुल कासिम की रिपोर्ट
पाकुड़। झारखंड में उत्पादित बिजली से बांग्लादेश रोशन हो रहा है और पाकुड़ जिला अंधेरे में है। पाकुड़ के कोयले से पंजाब और दूसरा राज्य जगमगा रहा है और पाकुड़ वासी बिजली के लिए तरस रहे हैं। यह पाकुड़ के बिजली उपभोक्ताओं की मन की बात है।
उपभोक्ताओं को यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि बिजली कटौती से उब चुके हैं। अब तो विभाग और जिम्मेदार लोगों से भी भरोसा टूटने लगा है। उपभोक्ताओं को अपने हाल पर छोड़ देने वाले बिजली विभाग और जिम्मेदार लोगों से शिकायत करना भी नहीं चाहते हैं। निरंतर जारी बिजली कट की समस्या अब उपभोक्ताओं की नियति भी बन चुकी है। उपभोक्ताओं को लगने लगा है कि पाकुड़ में बिजली आपूर्ति में सुधार होने वाला नहीं है। इसके लिए चाहे जितना भी शिकायत करें, कोई फायदा नहीं है। इसलिए उपभोक्ता शिकायत करने से भी परहेज कर रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि भीषण गर्मी के बीच बार-बार बिजली का आना-जाना और घंटों गायब रहने का सिलसिला जारी है। पिछले कई महीनो से ऐसी स्थिति बनी हुई है। हालत यह है कि बड़ी मुश्किल से कुछ ही घंटे अनियमित रूप से बिजली मिलती है। झारखंड राज्य बनने के बाद से ही 24 घंटे बिजली आपूर्ति की बात कहीं जाती है। लेकिन यह सिर्फ लॉलीपॉप ही साबित हो रहा है। इसमें चाहे बिजली विभाग हो या फिर जिम्मेवार लोग हो, किसी की कथनी में कोई सच्चाई नहीं दिख रहा है। झारखंड राज्य और पाकुड़ जिला बनने के दशकों बाद भी बिजली आपूर्ति में सुधार नहीं होना निराशाजनक है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि पाकुड़ के कोयले से दूसरा राज्य जगमगा रहा है और पाकुड़ अंधेरे में है। यह कहीं ना कहीं बिजली विभाग और झारखंड बनने के बाद कुर्सी हासिल करने वाले तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं की कमजोर इच्छा शक्ति का ही नतीजा है।