Homeपाकुड़विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन, सनातनियों की उमड़ी भीड़
Maqsood Alam
(News Head)

विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन, सनातनियों की उमड़ी भीड़

सनातन संस्कृति विश्व की सबसे बड़ी, सभ्य और पुरातन संस्कृति- अजय

Gunjan Saha
(Desk Head)

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समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़। हिंदू समन्वय समिति के द्वारा शहर के बलिहारपुर स्थित सरस्वती शिशु विद्या मंदिर प्रांगण में विराट हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों की संख्या में हिंदू सनातनियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ नगर कीर्तन के साथ हुआ। इसके पश्चात मंच कार्यक्रम किया गया। मंचीय कार्यक्रम में भक्ति गीत पर नृत्य भक्ति गीत की प्रस्तुति और छोटे बच्चों के द्वारा भारत की वीरांगनाओं पर भाषण दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सामाजिक कार्यकर्ता अजय जी, सामाजिक कार्यकर्ता आलोक मंडल, सामाजिक कार्यकर्ता देवकांत जी, समाज कार्यकर्ता मृत्युंजय जी, सामाजिक कार्यकर्ता श्रवण जी शामिल हुए। अजय ने कहा कि सनातन संस्कृति विश्व की सबसे बड़ी, सभ्य और पुरातन संस्कृति है। मगर कुछ लोग हिंदू समाज को तोड़ना चाहते है। जिसमें की लव जिहाद सबसे बड़ा मुद्दा है। पूरे हिंदू समाज को बचाने के लिए हमें अपने बच्चे को गुरुकुल की शिक्षा प्रदान करने चाहिए और हम सब हिंदू भाई-भाई इस विचार को अपने जीवन में उतारकर सभी हिंदुओं को आपस में एकजुट रहना चाहिए। साथ ही सभी हिन्दू के घरों में शंख बजाना, रीति रिवाज से सभी अनुष्ठानों और पूजा पाठ में शामिल होना और उसको स्वयं करना चाहिए। भारत के मंदिर हिंदू समाज के श्रद्धा का केंद्र है। पुरातन समय में मंदिर के द्वारा ही समाज के किसी गरीब बेटी के विवाह हेतु, किसी बीमार व्यक्ति के इलाज हेतु या समाज के हर प्रकार की समस्या के निदान हेतु सहयोग मिलता रहा। आक्रमणकारियों ने इस बात को समझा और सबसे पहले समाज को तोड़ने के लिए हिंदू मंदिरों को तोड़ा, जिससे समाज बिखर गया। मगर अब हिंदू समाज जाग चुका है और लगातार भारत विश्व गुरु की और कदम बढ़ा रहा है। समाज की रक्षा के लिए हमारे साधु संतों ने अपना बलिदान दिया है। महर्षि ददीचि जी ने राक्षसों का वध करने के लिए अपने हड्डी का दान किया था और उन्होंने सभी से आवाहन किया कि हमें अपनी पर्यावरण को सुरक्षित करने के लिए पेड़ लगाना, सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल ना करना हमारे नदियों और तालाबों को स्वच्छ बनाएं रखें। साथी इस देश प्रति भी हमारा कर्तव्य है उसका भी हमें पालन करना है। जहां तक हो सके स्वदेशी भारत में निर्मित वस्तुओं का ही उपयोग करें, ताकि भारत के लोगों का विकास हो।

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