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समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। सदर प्रखंड अंतर्गत चापाडांगा गांव में स्थित जन लोक कल्याण परिषद के द्वारा संचालित बाल आश्रय गृह बेसहारा बच्चों की परवरिश में मिल का पत्थर साबित हो रहा है। यहां अनाथ और दुर्व्यवहार के शिकार बच्चों की परवरिश में कोई कमी नहीं रहती। एक बच्चे की परवरिश में जिन चीजों की सामान्य तौर पर जरूरत पड़ती है, वो तमाम सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती है। अनाथ और दुर्व्यवहार के शिकार बेसहारा बच्चों के लिए पढ़ाई से लेकर रहने और खाने की सारी बेहतरीन व्यवस्थाएं मौजूद हैं। यूं कहे कि व्यवस्थाएं ऐसी कि बच्चों को कभी भी खालीपन या अकेलेपन बिल्कुल भी महसूस नहीं होती। किसी परिवार में आमतौर पर जो रिश्ते नाते प्यार मोहब्बत देखने को मिलती है, वो सारी चीजें बाल आश्रय गृह में पुरी की जाती है। इस बाल आश्रय गृह में मौजूद पदाधिकारी और कर्मचारियों का कहना है कि आश्रय गृह में रह रहे बच्चों को न केवल सुरक्षित आवास और पोस्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, बल्कि उनके सर्वांगीण विकास के लिए निशुल्क शिक्षा, खेलकूद और परामर्श की भी व्यवस्था है। कहा कि संस्था का मुख्य उद्देश्य इन बच्चों को समाज के मुख्य धारा से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है। आश्रय गृह में वर्तमान समय में 37 बच्चे हैं। पदाधिकारियों का कहना है कि उनका लक्ष्य पाकुड़ और आसपास के क्षेत्र से महिला तथा बाल संरक्षण सुरक्षित करना है। बाल विवाह जैसे कुप्रथाओं को खत्म करना है। जन लोक कल्याण परिषद न केवल बच्चों को आश्रय देती है, बल्कि समुदाय के स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलती है।
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