
पाकुड़ । बिजली विभाग की नाकामी ने उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है। जिससे उपभोक्ताओं में आक्रोश बढ़ रहा है। यूं कहें कि बिजली विभाग के रवैए ने उपभोक्ताओं का जीना दुश्वार कर दिया है। लगातार बिजली कट की समस्याओं ने परेशान कर रखा है। निर्बाध बिजली की बात कौन करें, यहां नियमित रूप से आठ दस घंटा बिजली भी नसीब नहीं हो रहा है। यह कहीं ना कहीं विभागीय अधिकारियों की कमजोर इच्छा शक्ति या उपभोक्ताओं के प्रति उदासीन रवैया का ही नतीजा है।
यूं तो अनियमित बिजली आपूर्ति शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्र के उपभोक्ताओं के लिए सरदर्द का कारण बना हुआ है। शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति ज्यादा दयनीय है। ग्रामीण उपभोक्ता सालों भर परेशान रहते हैं। इधर पिछले दो दिनों की बात करें तो बिजली की दुर्दशा और विभागीय अधिकारियों की उदासीनता का साफ अंदाजा लगाया जा सकता है। शनिवार को बल्लभपुर सब स्टेशन में एबी स्वीच में खराबी की वजह से लगातार करीब छह घंटा बिजली आपूर्ति बंद रहा। दोपहर बाद से बिजली गायब रही। भीषण गर्मी में लोग परेशान रहे। शाम में बिजली आपूर्ति बहाल भी हुई, तो हर दस पंद्रह मिनट में बिजली का आना जाना लगा रहा।
वहीं रात्रि में कुछ घंटे बिजली रही, लेकिन मध्य रात्रि करीब दो बजे कट गई। इसके पीछे कारण ब्रेक डाउन बताया गया। इसके बाद ब्रेक डाउन की वजह से बिजली गायब ही हो गई। करीब तेरह घंटे बाद रविवार को दोपहर करीब तीन बजे आपूर्ति बहाल हुई। हालांकि इसके बाद भी बिजली की आंखमिचौली जारी रहा। यह हाल है ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति और बल्लभपुर सब स्टेशन का, जहां कई फिडर के माध्यम से बिजली आपूर्ति होती है।
यह कोई एक दिन की बात नहीं है। तकरीबन हर रोज की कहानी है। ये तो हो गया एबी स्वीच और ब्रेक डाउन की बात, ऐसे हर दिन बिजली का गायब होना और दस पंद्रह मिनट या हर आधे एक घंटे में बिजली की लुकाछिपी मानो नियति बन गया है। बिजली कट की समस्या उपभोक्ताओं के लिए सिरदर्द बना हुआ है। अगर बात पावर कम मिलने की हो, तो इसे माना जा सकता है। लेकिन हर दिन कभी एबी स्वीच में खराबी तो कभी ब्रेकडाउन, कभी तार टूटना, कभी पोल टूटना और ना जाने क्या क्या!
बिजली विभाग के सम्मानित पदाधिकारियों को एक बार सोचना चाहिए। कोई ठोस कदम उठाने चाहिए। ताकि इस तरह की समस्यायों से बचा जा सके और नियमित रूप से बिजली आपूर्ति हो सके। फिलवक्त बिजली आपूर्ति की ऐसी दयनीय स्थिति से उपभोक्ताओं में आक्रोश बढ़ रहा है। उपभोक्ताओं में विभाग के साथ-साथ तमाम राजनीतिक दलों के नेताओं के प्रति भी रोष व्याप्त है। जिन्होंने हमेशा उपभोक्ताओं को झुठा आश्वासन दिया और बिजली की लाचार स्थिति पर चुप बैठे हैं। पक्ष और विपक्ष दोनों तरफ से एक शब्द भी नहीं निकल रहा है। नेताओं की चुप्पी से भी उपभोक्ताओं में नाराजगी दिख रहा है।
वहीं उपभोक्ताओं का कहना है कि अधिकारियों के पास ऐसी कोई प्लान या योजना नहीं है, जिससे कि उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली मिले। आधुनिकता के इस दौर में इंसान पूरी तरह बिजली पर निर्भर हो गए हैं। ऐसे में बिजली की बदतर स्थिति ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है।