Homeपाकुड़तालाब व डोभा निर्माण में गड़बड़ी, वृक्षारोपण में जमीन घोटाले की आशंका
Maqsood Alam
(News Head)

तालाब व डोभा निर्माण में गड़बड़ी, वृक्षारोपण में जमीन घोटाले की आशंका

पंचायत सचिव, रोजगार सेवक को दरकिनार कर घोटाले को अंजाम दे रहे बिचौलिया,तालाब निर्माण में जेसीबी मशीन चलाया गया

Gunjan Saha
(Desk Head)

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समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़ सदर प्रखंड के रामचंद्रपुर पंचायत अंतर्गत निहारपाड़ा एवं किस्टोनगर मौजा में मनरेगा के तहत तालाब व डोभा निर्माण एवं वृक्षारोपण की योजनाओं में गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है।

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पंचायत सचिव एवं रोजगार सेवक को दरकिनार कर बिचौलिए घोटाले को अंजाम दे रहे हैं। पंचायत के जानकार ग्रामीणों ने नाम ना छापने के शर्त पर मीडिया के माध्यम से जानकारी देते हुए प्रशासन से जांच कर कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।

ग्रामीणों ने बताया कि तालाब और डोभा निर्माण में प्राक्कलन के मुताबिक काम नहीं हुआ है। प्राक्कलन के अनुसार दस फीट गहराई होना चाहिए। लेकिन पांच से सात फीट गहराई की गई है। पटाल में मिट्टी को ऊंचा कर भरा गया है। जिसे गहराई में जोड़कर दिखाया जा रहा है। अगर गहराई की जांच करें तो बिचौलियों की करतूतें पकड़ी जाएगी। यह भी बताया कि बिना जॉब कार्ड धारी मजदूरों से भी काम लिया गया है। मास्टर रोल में फर्जी हस्ताक्षर किया गया है। अगर मास्टर रोल की जांच कराई जाए तो चौंकाने वाली बातें सामने आएगी।

ग्रामीणों ने यह भी कहा कि निहारपाड़ा के एक तालाब में शुरू में जेसीबी से खुदाई किया गया था। जिसे बाद में मजदूरों के द्वारा कटिंग किया गया। मनरेगा मजदूरों के लिए तालाब या डोभा निर्माण स्थल पर कोई सुविधा नहीं थी। प्राथमिक उपचार के लिए ना ही दवा थी और ना ही टेंट लगा था। इसी तरह वृक्षारोपण की योजनाओं में भी लूट मची है। वृक्षारोपण के नाम पर सरकारी पैसों की लूट हो रही हैं। इसमें जमीन की भौतिक सत्यापन होने पर हैरान कर देने वाली गड़बड़ियां सामने आ सकती है। ग्रामीणों के मुताबिक एक ही प्लांटेशन की योजना के नाम पर कई योजनाओं की राशि की निकासी हो रही है। तर्क दिया है कि अगर एक वृक्षारोपण की योजना के लिए एक एकड़ जमीन की आवश्यकता है, तो दस योजना के लिए दस एकड़ जमीन होना चाहिए। लेकिन जितनी जमीन चाहिए, उतनी है नहीं। सिर्फ कागजों में जमीन दिखाकर राशि निकासी किया जा रहा है। अगर एक एक कर योजना की बारीकी से जांच की जाए, तो सारी सच्चाई सामने आ जाएगी। ग्रामीणों ने कहा कि तत्काल राशि निकासी पर रोक लगाया जाए। योजनाओं की जांच के बाद ही भुगतान मिले।

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