अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। आंधी-बारिश में भी बिजली विभाग में कार्यरत कर्मी दूसरों के घरों को रौशन कर रहे हैं। अपनी जान की परवाह किए बिना दिन-रात जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं। यह कहना गलत नहीं होगा कि मामूली तनख्वाह पर काम करने वाले ये बिजली कर्मी दूसरों के घरों को रौशन करने की कोशिश में अपनी जान की बाजी लगा रहे हैं। पिछले चार-पांच दिनों से तेज हवाओं के साथ लगातार मूसलाधार बारिश हो रही है। इस दौरान पोल और बिजली तार के गिरने का सिलसिला जारी है। इससे बिजली बाधित होना लाजिमी है। ऐसे में बिजली कर्मियों पर नजर डालें तो दिन-रात पोल और तार को व्यवस्थित करने में लगे हैं। दिन के उजालों में ही नहीं, रात के अंधेरों में भी ये बिजली कर्मी बारिश में भीग भीग कर गिरे पोल या टूटे तार को व्यवस्थित करने में जुट जाते हैं। इतना ही नहीं खेत खलियानों में गिरे पड़े पोल और टूटे तार को व्यवस्थित करने के लिए सुबह का इंतजार नहीं करते, बल्कि आधी रात को भी दौड़ पड़ते हैं। यह कह सकते हैं कि इन बिजली कर्मियों को नींद भी ठीक से नसीब नहीं होती है। मोबाइल की घंटी बजते ही सीधे फॉल्ट को ढूंढने में लग जाते हैं। इनके कार्य या ड्यूटी के प्रति वफादारी का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि बिजली विभाग के एक ह्वाट्सएप ग्रुप में चौबिसों घंटे बिजली से संबंधित जानकारियां मिलती रहती है। अगर रात बारह बजे या आधी रात के बाद भी ग्रुप को खोलकर देखेंगे तो बिजली से संबंधित अपडेट मिल जाएंगे। अगर हम सोचें कि ये कर्मी भी बाहर निकलने की बजाय घर में बैठकर बारिश का मजा लेते, तो फिर क्या हालत होती। इन कर्मियों को भी बहाना बनाना जरुर आता होगा, लेकिन ये बहाना ढूंढने की बजाय, बारिश में भी भीग भीग कर फॉल्ट ढूंढने निकल पड़ते हैं। आप और हम टीवी या मोबाइल में आंखें गड़ाए बारिश का मजा लेते होंगे, लेकिन इन्हें वहां आंख गढ़ाना होता है, जिसकी वजह से आपकी और हमारी टीवी बंद हो जाती है, मोबाइल का स्वीच ऑफ हो जाता है। इसलिए हमें इन बिजली कर्मियों की मेहनत को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। बल्कि इन्हें हौंसला भी मिलना चाहिए। यह कतई नहीं भुलना चाहिए कि दिन-रात मेहनत करने वाले ये बिजली कर्मी विकट परिस्थितियों में भी फील्ड में उतर कर बिजली आपूर्ति को बहाल करवाते हैं।
