नाजिर हुसैन@समाचार चक्र
महेशपुर। थाना क्षेत्र के एक गांव से बाल विवाह जैसी सामाजिक कुरीति के खिलाफ साहसिक कदम और त्वरित पुलिसिया कार्रवाई का एक सराहनीय मामला सामने आई है। जहां एक 15 वर्षीय छात्रा ने अपनी सूझबूझ से न केवल अपना भविष्य बचाया, बल्कि बाल विवाह जैसी कुरीति के खिलाफ एक मिसाल भी पेश की। उस बच्ची ने शादी से इंकार कर दिया और स्कूल जाकर शिक्षकों से आगे की भविष्य के लिए गुहार लगाई। पुलिस ने भी इस मामले में गंभीरता दिखाई। बुद्धिजीवी समाज बच्ची के इस साहसिक कदम की सराहना कर रहे हैं। मिली जानकारी के मुताबिक महेशपुर के एक स्कूल में पढ़ने वाली 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के परिजनों ने उसका विवाह तय कर दिया था। अपनी पढ़ाई जारी रखने और कम उम्र में शादी के बंधन से बचने के लिए, लड़की ने साहस जुटाया और सीधे अपने स्कूल पहुंच गई। वहां उसने शिक्षकों को अपने विवाह के बारे में सूचित करते हुए स्पष्ट रूप से शादी से इनकार कर दिया।वहीं स्कूल प्रबंधन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत महेशपुर थाना के प्रभारी रवि शर्मा को इसकी सूचना दी। पुलिस बच्ची के घर पहुंच गई। घर पहुंचकर विवाह को तत्काल रोक दिया।थाना प्रभारी रवि शर्मा पुलिस बल के साथ पीड़ित बच्ची के घर पहुंचे। परिजनों को कानूनी चेतावनी दी गई।पुलिस ने लड़की के माता-पिता और परिजनों को बाल विवाह के कानूनी परिणामों और स्वास्थ्य संबंधी खतरों के बारे में समझाया। पुलिस की मध्यस्थता के बाद शादी को रोक दिया गया और परिजनों ने बच्ची की पढ़ाई जारी रखने का आश्वासन दिया। इधर लोग चर्चा कर रहे हैं कि यह घटना दर्शाती है कि यदि बच्चे जागरूक हों और उन्हें शिक्षकों व झारखंड पुलिस जैसे संस्थानों का साथ मिले, तो समाज से ऐसी कुरीतियों को जड़ से मिटाया जा सकता है
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बाल विवाह के खिलाफ कानूनी प्रावधान
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जानकारों का कहना है कि भारत में बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 के तहत नाबालिग की शादी कराना एक दंडनीय अपराध है। लड़कियों के लिए विवाह की न्यूनतम कानूनी आयु 18 वर्ष है। दोषी पाए जाने पर कठोर कारावास और जुर्माने का प्रावधान है।




