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Maqsood Alam
(News Head)

पत्थर खदान में विस्फोट मामले में खदान मालिक जियाउल शेख के विरुद्ध एफआईआर दर्ज, मैनेजर को भी बनाया गया है आरोपी

विस्फोटक पदार्थ अधिनियम एवं आईपीसी की धारा 286,337 एवं 338 के तहत दर्ज हुआ मामला

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Gunjan Saha
(Desk Head)

पाकुड़ जिले के हिरणपुर थाना क्षेत्र के मनसिंघपुर में बीते सोमवार को अहले सुबह एक पत्थर खदान में अचानक हुए विस्फोट में दो मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए। खदानों में विस्फोट करना और उसके द्वारा उत्पादन एक सामान्य सी बात है। लेकिन इसमें सबसे पहले नियमों के अनुसार विस्फोटक अनुज्ञप्ति प्राप्त कर निर्गत मात्रा के अनुरूप मैगजीन हाउस बनाकर उसमें विस्फोटक स्टोर करने का प्रावधान है।

बताया जाता है कि उक्त खदान में कोई भी मैगजीन हाउस नहीं है। ऐसे में विस्फोटक अनुज्ञप्ति मिलने पर भी संदेह पैदा होता है। इनसब के बावजूद कुछ मीडिया में बात सामने आई कि ड्रिलिंग के समय मजदूरों के गिरने से घायल हुए है।

सवाल उठता है कि जब खदान के पास अपना मैगजीन हाउस नहीं है, अनुज्ञप्ति के प्राप्ति पर भी सवाल उठ रहे हैं, तो ऐसे में खदान में ड्रिलिंग आखिर क्यों की जा रही थी और ड्रिलिंग के समय मजदूरों के गिरने तथा घायल होने की झूठी बातों को फैलाकर क्या विस्फोट करने, विष्फोट होने एवं अवैध विस्फोटक की उपस्थिति किसी भी दृष्टिकोण से नकारा जा सकता है?

यह एक यक्ष प्रश्न है। लेकिन खदान मालिक एवं कुछ तथाकथित मीडिया कर्मियों के द्वारा ड्रिलिंग के समय मजदूरो के गिरने और घायल होने की बात कहना क्या इसका सबूत नहीं है कि वहां विष्फोट हुआ करता था और यह भी एक अवैध विष्फोट था। ऐसे में इन सभी बातों पर विचार करते हुए एसपी पाकुड़ हृदीप पी जनार्दनन ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए इस घटना पर हिरणपुर थाना को एफआईआर दर्ज कर अनुसंधान का मौखिक आदेश दिया।

ऐसे में बेलपहाड़ी गांव के चौकीदार फुंनु माल के द्वारा जय गुरु स्टोन वर्क्स के मालिक जियाउल शेख एवं मैनेजर पर विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत 286, 337, 338 आईपीसी के तहत मामला दर्ज कराया गया।

एफआईआर में फुंनु माल ने जो भी लिखित शिकायत की है, उस आधार पर खदान में विस्फोटक रहने, विस्फोट होने एवं दो मजदूरों की घायल होने की बात कही है। ऐसे में यह एक गंभीर जांच का विषय है कि उक्त खदान में मैगजीन हाउस न होने के बाद भी सुबह सुबह लगभग छह बजे कैसे विस्फोट हो गया एवं विस्फोटक कहां से और कब लाया गया। क्योंकि जब भी विस्फोटक लाकर विस्फोट के लिए उसको आरोपित किया जाता है, उसमें काफी वक्त लगता है। ऐसे में तमाम बातों और नियमों की अनदेखी भी कर दें तो विस्फोटक रात में या एक दिन पहले ही खदान में पहुंच गया होगा। जबकि नियम ऐसा है कि सुबह छह बजे के बाद से लेकर शाम छह बजे तक ही विस्फोटक मैगजीन हाउस से बाहर निश्चित मात्रा में उपयोग के लिए रह सकता है। यह पूरा मामला तकनीकी दृष्टिकोण से अनुसंधान की मांग रखता है। क्योंकि सतही अनुसंधान हर एक पन्ना नहीं खोल सकेगा।

अवैध विस्फोट का चर्चा गर्म

फिलवक्त पत्थर खदान में विस्फोट में घायल मजदूरों का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। पत्थर खदान मालिक जियाउल शेख के विरुद्ध केस दर्ज होने के बाद चर्चा का बाजार और भी गर्म हो गया है। अब तो यह भी चर्चा जोरों पर है कि अवैध विस्फोटक पदार्थ का इस्तेमाल और अवैध तरीके से विस्फोट का खेल कितने दिनों से चल रहा है। विशेषकर उस माहौल में, जब राज्य में अवैध पत्थर खनन का मामला गरमाया हुआ है। पाकुड़ जिले में प्रशासन अवैध रूप से पत्थर खनन, परिवहन और भंडारण के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई कर रही है।

वहीं सूत्रों का कहना है कि मानसिंघपुर में संचालित उक्त खदान में पत्थरों का अवैध उत्खनन कोई नई बात नहीं है। यहां विस्फोट भी नियम कानूनों को ताक पर रखकर किया जाता रहा है।

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