पाकुड़। देश के सबसे पिछड़े जिलों में शामिल पाकुड़ ने गरीबी को बेहद करीब से देखा है। उबड़-खाबड़ रास्ते से दो-तीन पैसेंजर को बैठाकर साठ साल के बुजुर्ग को रिक्शा खींचते भी देखा है। भारी भरकम लोड लेकर ठेला खींचते बुजुर्ग के माथे से टपकती पसीने भी देखें है। पेट की आग बुझाने के लिए दूसरे राज्यों में बुजुर्ग दंपति की पलायन की तस्वीरों को भी कौन भूल सकता है। इन सबके बीच पाकुड़ में गरीब बेबसों को इंसानियत का कंधा भी मिलता रहा है। यूं कहे कि गरीबी और मानवता में चोली दामन का रिश्ता रहा है।
पाकुड़ वासियों ने जाति धर्म से उपर उठकर हमेशा से मानवता दिखाई है। यही वजह है कि पाकुड़ जिला पूरे झारखंड में सांप्रदायिक सौहार्द के लिए भी जाना जाता है। यूं तो सैंकड़ों लोगों ने गरीबों को मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। जिन्हें पाकुड़ वासी हमेशा याद रखेंगे। इन्हीं में से एक नाम लुत्फुल हक का भी है। जिनके अंदर की मानवता और इंसानियत ने पाकुड़ का नाम लंदन और सिंगापुर में भी रौशन किया है।
लुत्फुल हक ने देश के अंदर मुंबई, दिल्ली और कोलकाता जैसे शहरों में नामचीन हस्तियों के हाथों सम्मानित हुए और पाकुड़ वासियों को गौरवान्वित महसूस कराया। पाकुड़ का नाम बड़े-बड़े मैगजीन और अखबार चैनलों में सुर्खियां बटोरी। लंदन और सिंगापुर में पाकुड़ का नाम मानव सेवा के लिए चर्चा में रहा। यहां दिलचस्प बात तो यह है कि देश विदेशों में अवार्ड हासिल करने वाले लुत्फुल हक को इसका जरा सा भी गुरुर नहीं है। बेहद ही सरल स्वभाव और शांत रहने वाले लुत्फुल हक शालीनता से अपने काम में व्यस्त रहते हैं। पत्थर व्यवसाय से खुद को स्थापित करने वाले लुत्फुल हक आज समाजसेवी के रूप जाने जाने लगे हैं। यह जानकर आश्चर्य होगा कि चर्चित समाजसेवी के रूप में गरीबों के लिए खड़े रहने वाले लुत्फुल हक का बचपन बेहद ही गरीबी में गुजरा है। दो वक्त की रोटी की कौन कहे, भुखे पेट भी रात गुजारे हैं। पेट की आग बुझाने के लिए ना जाने कितने दर्द झेलने पड़े है। इन बातों को एक्सेप्ट करने में आज भी उन्हें कोई हर्ज नहीं है। शायद यही वजह है कि उन्हें गरीबी का दर्द आज भी महसूस होता है और इसलिए गरीबों के हमदर्द बने हैं।
गरीबी में बचपन बिताने वाले लुत्फुल हक आज हर दिन सैंकड़ों गरीबों की भूख मिटा रहे हैं और यह सिलसिला लगातार जारी है। पाकुड़ रेलवे स्टेशन पर हर दिन तकरीबन 250 लोगों के लिए भोजन बनते हैं। शाम के समय शुरू होकर देर रात तक स्टेशन से होकर गुजरने वाले भूखों को खाना परोसा जाता है।
यहां बताना जरूरी होगा कि समाजसेवी लुत्फुल हक पाकुड़ में ही नहीं बंगाल में भी हजारों जरुरतमंदों को भोजन, सुखा राशन, कपड़े और आर्थिक मदद पहुंचाते हैं। उनके द्वार पर आने वाले भी खाली हाथ नहीं लौटते। यूं कहे कि समाजसेवी लुत्फुल हक में गरीबों के लिए इंसानियत और मानवता कूट-कूट कर भरे है। दूसरों के लिए मिसाल बने पाकुड़ के ऐसे समाजसेवी को सैल्यूट है, जिनके नेक इरादों से हजारों गरीबों के पेट की आग बुझती है।