अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। इंसानियत हमें एक-दूसरे के प्रति दया, सहानुभूति और सम्मान सिखाती है। आज भी भागदौड़ भरी जिंदगी में ये सिर्फ कहने की बातें नहीं रह गई है, बल्कि ये देखे और महसूस भी किए जा सकते हैं। यूं कहे कि इंसानियत अभी जिंदा है। हाल ही में एक घटना सामने आई है, जो इस कथन को सही साबित करते दिखाई देती है। दरअसल पाकुड़ सदर ब्लाक के एक गांव से आठवीं क्लास का छात्र घर से लापता हो गया था। वह गत 3 दिसंबर को घर से निकला था और फिर वापस नहीं लौटा। इसके बाद परिजनों ने खोजबीन शुरू किया। परिजन अपने सभी रिश्तेदार और जान पहचान के लोगों से संपर्क किया। लेकिन बच्चे का कोई अता-पता नहीं चल पाया। इसके बाद अचानक ही एक अंजान नंबर से फोन आया कि वह बच्चा किसी ट्रेन में है और वह ट्रेन कश्मीर जाने वाली है। वो अंजान शख्स बताता है कि वह उसी ट्रेन में सफर कर रहे हैं और कश्मीर जाने वाले हैं। ट्रेन अभी तेलंगाना राज्य से गुजर रही है और रामागुंडम स्टेशन आने वाली है। उस शख्स ने बताया कि बच्चा काफी रो रहा था, तभी उस पर नजर पड़ी और बच्चे से पूछताछ किया। इस दौरान बच्चे ने रास्ता भटक जाने की बात कही। तभी बच्चे से पूछताछ के दौरान परिजन का मोबाइल नंबर मिला। उस शख्स ने बच्चे के पिता को सांत्वना और आश्वासन देते हुए बताया कि बच्चे को रेलवे पुलिस को सौंप रहा है। ताकि बच्चा सुरक्षित रहे और किसी तरह की चिंता की कोई बात नहीं हो। उस शख्स ने थोड़ी देर बाद फिर से फोन लगाया और कहा कि उन्होंने बच्चे को रामागुंडम स्टेशन पर रेलवे पुलिस को सुरक्षित सौंप दिया है। इसके बाद रेलवे पुलिस में कार्यरत सुरेश नाम के व्यक्ति का फोन आता है। उन्होंने बच्चे के पिता को सांत्वना देते हुए कहा कि कोई चिंता फिक्र ना करें। बच्चा सुरक्षित है और नियम अनुसार अनाथ आश्रम को दे देंगे। परिजन सुविधा अनुसार अनाथ आश्रम जाकर बच्चे को लेकर जा सकते हैं। इसके बाद अनाथ आश्रम से वीरेंद्र नाम के व्यक्ति का फोन आता है। उस व्यक्ति ने भी बच्चे के पिता को सांत्वना देते हुए किसी तरह की चिंता या फिक्र नहीं करने की बात कही। उन्होंने कहा कि बच्चा एकदम सुरक्षित है और चिंता करने की कोई बात नहीं है। यहां तक कि उस शख्स ने अपने मोबाइल से वीडियो कॉलिंग के जरिए बच्चे को दिखाया और बात भी कराया। इसके बाद परिजन बच्चे को लाने घर से निकले और 8 दिसंबर को तेलंगाना के रामागुंडम स्टेशन पहुंचे। इसके बाद खास बात यह है कि जैसे ही पिता ने अनाथ आश्रम के उस व्यक्ति को फोन लगाया, वह तुरंत ही खुद ही स्टेशन पहुंच गए। इसके बाद उस व्यक्ति ने बच्चे के पिता का किसी मेहमान की तरह स्वागत और सम्मान किया। भोजन, चाय नाश्ता और ठहरने के लिए सारी व्यवस्थाएं की। इसके बाद नियम या कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चे को पिता को सौंप दिया। इतना ही नहीं बच्चे और पिता को भी सुरक्षित वापस लौटने का इंतजाम तक कर दिया। इधर बच्चे के पिता ने बताया कि घर वापस आने के दौरान रास्ते में कम से कम 8 से 10 बार रेलवे पुलिस और अनाथ आश्रम के व्यक्ति का फोन आया। घर पहुंचने के बाद भी फोन किया। यहां तक कि वीडियो कॉलिंग कर बच्चे से भी बात की। पिता ने कहा कि मैं उन सभी का आभारी हूं, जिन्होंने मेरे बच्चे को कहीं और भटकने से बचा लिया। अन्यथा बच्चे के साथ कुछ भी घटना हो सकती थी। मैं उन लोगों का आभारी हूं और जिंदगी भर एहसानमंद रहूंगा।
Maqsood Alam
(News Head)
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