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Maqsood Alam
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मैं हवा हूँ, कहाँ वतन मेरा, खुशबू बिखरेगी मेरी, जहाँ भी हो तन तेरा

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Gunjan Saha
(Desk Head)

कृपा सिंधु तिवारी (बच्चन)

पाकुड़-फूलों की महक को किसी विज्ञापन या चक्के की जरूरत नहीं होती, ये फिजाओं में यूं ही बिखर जाती है चारसू। आपने अहसास होगा, बुजुर्गों ने कहा भी है कि कर्म करो, फल उपरवाले पर छोड़ दो।

पाकुड़ के एक पत्थर व्यवसाई को पिछले दिनों मुंबई और कोलकाता में दो अलग अलग संस्थाओं द्वारा सम्मानित और पुरस्कृत किया गया। एक दूसरे व्यवसाई और एक राजनैतिक पार्टी के नेता भी हरिद्वार में सम्मानित हुए। जैसी और जिन संस्थाओं ने इन दोनों को सम्मानित किया उससे पाकुड़ की मान और शान में चार चाँद लगे। सबसे बड़ी बात तो ये है कि इन संस्थाओं का यहां कोई ब्रांच नहीं है, तो इतनी दूर तलक बात गई कैसे?

पहले व्यापारी ने कोविड के समय हजारों परिवार को राशन और दवाईयां उपलब्ध कराई। इस पुनीत कार्य में सीमाओं का बंधन नहीं था। झारखंड से बंगाल तक कोविड को चुनौती देते हुए उन्होंने अपना सेवा कार्य जारी रखा। उनके कार्यों ने अहसास कराया कि “मैं हवा हूं कहां वतन मेरा“।

स्वाभाविक है उनके कार्यों की सौंधी महक खुशबू बन उनके कार्य सीमाओं से दूर बहुत दूर तलक गई। बड़े मंचों पर देश के बड़े लोगों द्वारा सराहे गए।

दूसरे व्यवसाई के साथ भी कुछ ऐसा ही था, लेकिन उनका राजनीति से जुड़ा रहना, और उनकी पार्टी के लोगों की इतराहट ने उन्हें थोड़ा असहज महसूस कराया, पर पत्रकारिता की हमारी निष्पक्ष नजरों में दोनों ही व्यक्तित्व ने हम सभी और शहर का मान बढ़ाया। उन दोनों का नाम नहीं लेना यहां, बस इसलिए कि इसे कोई पीत पत्रकारिता न समझ ले।

क्योंकि पाकुड़ में एक गलत परम्परा घर कर गई है, कि अगर कोई मेहनत कर अपने व्यवसाय, राजनीति, पत्रकारिता या किसी तरह प्रगति करे तो उसे माफिया घोषित करने से नहीं हिचकते। एक तबका ऐसा बन गया है जिन्हें नकारात्मक मानसिकता ने घेर रखा है। इसमें हर वर्ग से हर तरह के लोग शामिल हैं, पत्रकार बिरादरी भी इससे अछूता नहीं है।
शासन प्रशासन हो या कोई व्यवसाई अगर सराहनीय कार्य करें तो सराहना लाज़मी है, लेकिन यहां इस सराहना में भी नकारात्मकता अपना पक्ष, पहलू थोप देता है।

खैर यहां की खुशबू ने जिस तरह से अपनी महक बिखेरी है, वैसे ही यहां के प्रशासन ने एक बदबू को चहारदीवारी में समेट भी दिया है।

“ये सकूं पाकुड़ को अबके मिला है बच्चन, जो हवा द्वेष व नफ़रत की चले तो सिमट जाएगा “हमारे पोर्टल ने हर एक पहलू पर रिपोर्टिंग की है। हमें पढ़ने वाले मेरे ख़ामोश शब्दों में नामों को पहचान जायेंगे।

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