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Maqsood Alam
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तालाब व डोभा निर्माण में गड़बड़ी, गड्ढे में मेढ़ बांधकर 4.5 लाख की निकासी

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Gunjan Saha
(Desk Head)

पाकुड़। सदर प्रखंड अंतर्गत झिकरहटी पश्चिमी पंचायत में मनरेगा योजना में लूट मची है। यूं कहे कि मनरेगा योजना को लूटलेगा योजना बना दिया है। इसमें पंचायत सचिव, रोजगार सेवक और निर्माण कार्य से जुड़े स्थानीय बिचौलियों की भूमिका संदिग्ध है। दरअसल तालाब और डोभा निर्माण में गड़बड़ी की गई है। गड्ढे में मेढ़ बांधकर दोनों योजना के नाम पर लगभग साढ़े चार लाख रुपए की निकासी कर ली गई है। हालांकि इस संबंध में पंचायत सचिव से जानकारी लेने पर उन्होंने किसी भी तरह की गड़बड़ियों से इनकार किया। वहीं तत्कालीन रोजगार सेवक राकेश कुमार ने फोन रिसीव नहीं किया।

बता दें कि झिकरहटी पश्चिमी पंचायत के देवतल्ला गांव में नजरुल शेख (पिता-काशिम शेख) के जमीन पर डोभा निर्माण और फारुख शेख (पिता- अलीमुद्दीन शेख) के जमीन पर तालाब निर्माण की स्वीकृति मिली थी। यह दोनों योजना वित्तीय वर्ष 2022-23 की है। जिसकी लागत क्रमशः 1 लाख 76,800 रुपए और 4 लाख 99,600 रुपए है। इन दोनों योजनाओं का निर्माण स्थल को देख सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि इसमें किस तरह गड़बड़ी की गई है।

ग्रामीणों से जानकारी मिली कि जमीन तो निजी है और कई लोगों की जमीन एक ही लाइन में हैं। लेकिन देखने से यह किसी नहर की तरह ही है। जिसमें सालों भर पानी भरा रहता है। नहर की तरह दिखने वाली इस जमीन में पहले से ही गड्ढे हैं। निर्माण कार्य में लगे लोगों ने चारों तरफ से मेढ़ बांधकर तालाब और डोभा का रुप दे दिया। हालांकि कि उसी जमीन से मिट्टी काटकर मेढ़ बनाया गया है। लेकिन इस बात से इनकार करना भी मुश्किल होगा कि यह जमीन समतल नहीं थी। यह जमीन पहले से ही गड्ढा नुमा था। जिसमें चारों तरफ मेढ़ यानी पटाल बनाकर तालाब और डोभा का रुप दे दिया गया। दोनों योजना के बीच की जमीन और पास की जमीन को भी (जिसमें पानी भरा हुआ है) देखने से ही सब कुछ स्पष्ट रूप से समझा जा सकता है।

इधर तालाब निर्माण के नाम पर 02 लाख 90 हजार 824 रुपए और डोभा निर्माण के नाम पर 01 लाख 62 हजार 169 रुपए की निकासी कर ली गई है। वहीं शेष बचे राशि की निकासी के भी फिराक में है। इधर गड्ढे में तालाब और डोभा निर्माण कर पैसे की निकासी का मामला पंचायत में चर्चा का विषय बना हुआ है। कई ग्रामीणों ने नाम न छापने के शर्त पर बताया कि पंचायत में इस तरह मनरेगा योजना में गड़बड़ी कभी नहीं हुआ। इन योजनाओं की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

वहीं चर्चा है कि पंचायत के उपमुखिया और वार्ड सदस्यों की देखरेख में दोनों योजनाओं का काम किया गया है। इधर पंचायत सचिव जगदीत भद्र ने योजनाओं में किसी भी तरह की गड़बड़ी की बातों से इंकार किया है।

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