पाकुड़। मुफस्सिल थाना क्षेत्र अंतर्गत कांकरबोना, जामतल्ला और झिकरहटी गांव बमबाजी की घटनाओं को लेकर बदनाम रहा है। पिछले दो सालों की बात करें तो इन गांवों में आधे दर्जन से भी ज्यादा बमबाजी की घटनाएं हो चुकी है। जिसमें एक महिला की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए। इन मामलों में कुछ जमीन विवाद और कुछ वर्चस्व से जुड़े हैं।झिकरहटी पश्चिमी में घर के सामने कचरा फेंकने को लेकर बमबाजी हुई थी।

जिसमें एक महिला की जान चली गई थी। यह मामला जमीन विवाद का था। वहीं झिकरहटी पश्चिमी में ही वर्चस्व की लड़ाई में कई दफा बमबाजी की घटनाएं हो चुकी है। यह कहना गलत नहीं होगा कि इन गांवों में बात-बात पर कुछ लोग बमबाजी पर उतर आते हैं। लोगों में दहशत फैलाना अब इनका मानो काम रह गया है। ऐसे लोगों की वजह से आम ग्रामीणों का जीना मुश्किल हो गया है। पिछले साल भी कांकरबोना और जामतल्ला गांव में बमबाजी हुई थी। जिसमें एक मासूम बच्ची सहित तकरीबन आधे दर्जन लोग घायल हो गए थे।

पुलिस ने घटना के दिन ही एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इसी मामले में हाल ही में एक और व्यक्ति को जेल भेजा गया है। घटना को लेकर थाना में केस दर्ज किया गया था। जिसमें कई लोगों को आरोपी बनाया गया था।लेकिन सिर्फ दो व्यक्ति ही पुलिस के शिकंजे में आया। शेष आरोपी खुलेआम घूमते रहे। पुलिस की कार्रवाई से बचते रहे। जिससे गांवों में दहशत फैलाने वाले ऐसे लोगों का मनोबल बढ़ा हुआ है।
इसके पीछे नेताओं की पैरवी के आगे पुलिस की सुस्ती एक बड़ी वजह बताई जा रही है। बमबाजी जैसे मामलों में भी नेताओं की पैरवी की वजह से मामला दब जाता है। पिछले साल घटना को अंजाम देने वाले इन्हीं दोनों गुटों में शनिवार को फिर से बमबाजी हो गई। इसे साफ शब्दों में समझ सकते हैं कि शनिवार की बमबाजी की घटना, पिछले साल हुई घटना से जुड़ा हुआ है और इस घटना में कमोबेश वही सारे लोग जुड़े हुए हैं। पुलिस को ऐसे लोगों से सख्ती से निपटने की जरूरत है। अन्यथा इस तरह के अपराधी किस्म के लोगों में डर खत्म हो जाएगा और ऐसे अपराधिक जघन्य घटनाएं होती रहेगी।