समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। सदर प्रखंड अंतर्गत रामचंद्रपुर पंचायत को बिचौलियों ने मिलकर लूट का चारागाह बना दिया है। रामचंद्रपुर एवं बेलडांगा सहित तारानगर पंचायत के दर्जन भर बिचौलियों ने मनरेगा योजनाओं पर बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां कर सरकारी राशि का बंदरबांट किया है। इनमें से खुद रामचंद्रपुर और बेलडांगा गांव के बिचौलियों के द्वारा योजनाओं में गड़बड़ी करने की चर्चाएं हैं। मनरेगा के तहत सिंचाई कूप निर्माण, तालाब या डोभा और वृक्षारोपण, दीदी बाड़ी योजनाओं में गड़बड़ी की ज्यादा ही चर्चाएं है। सिंचाई कूप निर्माण में प्राक्कलन की खुलेआम धज्जियां उड़ाई गई है। दस इंच जोड़ाई का नियम है और चिमनी ईंटों का इस्तेमाल का प्रावधान है। लेकिन दस की जगह पांच इंच की जोड़ाई की गई है। किसी किसी योजना में तो ढाई इंच की जोड़ाई की भी सूचनाएं हैं। चिमनी ईंटों की जगह बंगला भट्ठी का घटिया ईंट का इस्तेमाल किया गया है। इतना ही नहीं प्राक्कलन को ताक पर रखकर गहराई भी कम किया गया है। इन चर्चाओं के बीच सूत्रों का दावा है कि एक भी सिंचाई कूप में नियम के तहत काम नहीं किया गया है। रामचंद्रपुर पंचायत में कम से कम 70 से 75 सिंचाई कूप का निर्माण हुआ है। अगर पांच दस सिंचाई कूप का भी पारदर्शिता के साथ जांच किया जाए, तो सरकारी राशि के लूट का बड़ा खुलासा हो सकता है। इतना ही नहीं बिचौलियों को भुगतना के लिए एमबी बनाने की भी जरूरत नहीं पड़ती है। सूत्रों का दावा है कि 70 से 75 सिंचाई कूप का निर्माण हुआ है। इनमें से दस पंद्रह का ही एमबी बना होगा। सूत्रों के मुताबिक शेष सिंचाई कूप का एमबी बनाए बगैर ही फर्जी तरीके से राशि की निकासी कर ली गई है। अभियंताओं और मुखिया को धोखे में रखकर बिचौलियों ने फर्जीवाड़ा कर राशि निकाला है। मुखिया के भोलेपन का भी बिचौलियों ने खूब फायदा उठाया है।सिंचाई कूप निर्माण में एक गड़बड़ी यह भी सामने आई है कि योजना तो रामचंद्रपुर पंचायत के नाम से स्वीकृत किया गया है, लेकिन निर्माण कुमारपुर पंचायत में हुआ है। इसमें बिचौलिया के रुप में कोई सहायक अध्यापक (पूर्व में पारा शिक्षक) का नाम सामने आ रहा है। इसकी गहराई से जांच होने पर बिचौलियों का भंडाफोड़ हो सकता है। तालाब और डोभा निर्माण में भी काफी गड़बड़ियां की गई है। जिसकी गहराई की जांच करने पर लूट का खुलासा हो सकता है। अधिकतर योजना स्थल पर तो बोर्ड भी नहीं लगा है और जहां बोर्ड लगा हुआ था, वहां से या तो बोर्ड हटा दिया गया है या फिर तोड़ दिया गया है। ताकि योजना से संबंधित जानकारी को छिपाया जा सके। इधर वृक्षारोपण योजनाओं की बात करें तो रामचंद्रपुर पंचायत में वृक्षारोपण के नाम पर बड़ा खेल हुआ है। जितनी जमीन नहीं, कागज में उससे ज्यादा जमीन दिखाकर योजना स्वीकृत किया गया है। अगर एक एक कर वृक्षारोपण योजनाओं की जांच की जाएं तो लाखों की लूट का बड़ा खुलासा हो सकता है। एक-एक बिचौलियों ने दस-दस या इससे भी ज्यादा वृक्षारोपण योजना विभिन्न लाभुकों के नाम से स्वीकृत कराया है। रामचंद्रपुर पंचायत में दीदी बाड़ी योजनाओं में भी बिचौलियों ने जमकर लूट मचाई है। सूत्रों का दावा है कि अधिकतर योजनाएं धरातल पर गायब मिलेंगे। लेकिन कागज पर योजनाएं फल-फूल रहा है। इन सभी योजनाओं की उच्च स्तरीय जांच कराने की जरूरत है। इधर डीडीसी को मामले से अवगत कराने के लिए संपर्क साधने का प्रयास किया गया। लेकिन संपर्क नहीं हो पाया।

मुखिया ने कहा
मुखिया दुलाल पहाड़िया ने कहा कि बिचौलिया मुझे वैल्यू नहीं देते हैं। मैं सिंचाई कूप में पांच इंच की जोड़ाई अपने नजर से तो नहीं देखा। लेकिन लोकपाल सिंचाई कूप के जांच के लिए आए थे। लोकपाल ने पांच इंच जोड़ाई की बात कही थी। मुखिया ने कहा कि वृक्षारोपण में गड़बड़ी को लेकर मैंने डिमांड रोकवा दी है। बिना पेड़ लगाए भी डिमांड का दबाव दिया जा रहा था। पूरे पंचायत में वृक्षारोपण योजनाओं का डिमांड बंद है। एमबी भी नहीं दिखाया जाता है, इसलिए भी डिमांड रोक दिया गया है।
