पाकुड़। मनरेगा कर्मियों का वेतनमान एवं स्थायीकरण की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। इधर मनरेगा कर्मियों ने शनिवार को 41 वें दिन भी समाहरणालय के पास धरना प्रदर्शन किया। मौके पर मौजूद बीपीओ अजीत टुडू ने कहा कि इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि वर्तमान में ग्रामीणों के लिए विकास कार्य को धरातल पर लाने में मनरेगा कर्मियों का बहुत बड़ा योगदान है। अपनी मांगों को लेकर सरकार के पास बार-बार जा रहे हैं। लेकिन सरकार की ओर से हमारी मांगों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि हमारे सभी मनरेगा कर्मी झारखंड वासी हैं। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने हमें स्थायीकरण करने का लालच देकर सत्ता हासिल किया और अब वादाखिलाफी कर रहे है। उन्होंने कहा कि सरकार का कार्यकाल खत्म होने को है। परंतु हमारी मांगों के विषय को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। अजीत टुडू ने कहा कि हम अपनी जायज मांगों को लेकर आंदोलन पर बैठे हैं और तब तक बैठे रहेंगे, जबतक हमें वेतनमान तथा स्थायीकरण का लाभ नहीं मिल जाता। उन्होंने कहा कि राज्य स्तर पर मनरेगा कर्मी का वेतनमान लागू है। जबकि हम क्षेत्रीय कर्मियों को इससे वंचित रखना पूर्णतः अनुचित है। सभी विधायकों ने हमारी मांगों को जायज ठहराते हुए मुख्यमंत्री से वेतनमान, स्थायीकरण लागू करने का अनुरोध किया है। इस संबंध में विपक्षी पार्टी ने भी हमारी मांगों को लेकर सदन में प्रदर्शन किया है। परंतु सरकार अभी तक नींद से नहीं जाग पाई है।
ग्रामीण विकास मंत्री और मुख्यमंत्री के इस हठधर्मिता के चलते आज ग्रामीण रोजगार एवं योजना लाभ से वंचित हो रहे हैं। मजदूर पलायन करने को विवश है। आज लगभग 50 लाख मजदूर झारखंड से अन्य प्रदेश में रोजी-रोटी कमाने को मजबूर हो गए हैं। यदि हमारी मांगों को समय रहते पूरा नहीं किया गया तो इसका खामियाजा सरकार को आने वाले दिनों में भुगतना पड़ सकता है।
Maqsood Alam
(News Head)
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