अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। जिले के महेशपुर प्रखंड के रोलाग्राम के रहने वाले 29 साल के अबू ताहिर अंसारी को बचपन से ही क्रिकेट खेलने का शौक था। क्रिकेट में अपना भविष्य भी तलाश रहे थे। जिला स्तर पर महेशपुर टीम से खेलना भी शुरू किया था। पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट में अपना भविष्य तलाश रहे अबू ताहिर शारीरिक रूप से खेलकूद के लिए पूरी तरह फिट थे। लेकिन अचानक ही एक हादसे से कुछ देर के लिए मानो उनका सारा सपना ही टूट कर बिखर गया। साल 2021 का 4 दिसंबर का दिन था। जब अबू ताहिर अपने दोस्त के साथ कार से कहीं जा रहे थे। इसी दौरान वह कार हादसे का शिकार हो गया। इस हादसे ने अबू ताहिर को पूरी तरह झकझोर दिया। फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी और खुद को साबित कर दिया। दरअसल कार हादसे में उन्हें अपना बाया हाथ गंवाना पड़ गया। इसके बाद जैसे उनकी दुनिया ही थम गई। अक्सर ऐसी स्थिति में इंसान पूरी तरह टूट जाते हैं और अपने लक्ष्य के रास्ते से खुद को अलग कर लेते हैं। इंसान को लगता है कि अब उनके पास कोई चारा नहीं है। लेकिन अबू ताहिर के साथ ऐसा बिल्कुल भी नहीं था। उन्होंने खुद को संभाला और क्रिकेटर बनने के ख्वाब को आंखों में बसाए मन ही मन रास्ता तलाशने लगा। इसके बाद अबू ताहिर ने कुछ ऐसा कर दिखाया कि शारीरिक रूप से कमजोर युवाओं के लिए मिसाल बन गया। पाकुड़ जिला क्रिकेट एसोसिएशन की ओर से शहर के रानी ज्योतिर्मयी स्टेडियम में आयोजित किए जा रहे सीनियर क्रिकेट लीग टूर्नामेंट में दूसरे दिन 13 दिसंबर को महेशपुर टीम की ओर से अबू ताहिर को मैदान देख मौजूद तमाम लोग हैरत में पड़ गए। पहले तो लोगों को लगा कि इतने बड़े आयोजन में यह खिलाड़ी क्या खेल पाएंगे। लेकिन जैसे ही अबू ताहिर ने मैदान में अपना जलवा दिखाना शुरू किया, तो सारे हैरान रह गए। अब स्टेडियम के चारों तरफ मौजूद दर्शकों की तरफ से अबू ताहिर के लिए तालियां गूंजने लगी।

इस दौरान मौजूद पूर्व क्रिकेटरों को अबू ताहिर की जमकर तारीफें करते नजर आए। अबू ताहिर की तेज गेंदबाजी की धार जहां बल्लेबाजों को काफी ज्यादा परेशान कर रही थी, वहीं क्षेत्ररक्षण के दौरान उनकी ओर गेंद जाने पर बल्लेबाज जल्दी रन के लिए नहीं भाग रहे थे। अपनी स्पेल के सात ओवर में उन्हें कोई सफलता तो नहीं मिली, लेकिन सिर्फ 46 रन ही खर्चे। हालांकि उनकी गेंदबाजी के दौरान दो-दो बार विकेट चटकाने का मौका भी आया। लेकिन क्षेत्ररक्षकों ने दोनों अवसर को गंवा दिया। अबू ताहिर ने बैटिंग में तो कमाल ही कर दिया और 33 रनों की बेहतरीन पारी खेली। पहली पारी के खत्म होने के बाद स्टेडियम में बातचीत के दौरान अबू ताहिर ने बताया कि बचपन से ही मुझे क्रिकेटर बनने का सपना था। मैंने इसके लिए काफी मेहनत किया। मुझे बॉलिंग और बैटिंग दोनों में काफी दिलचस्पी है।फील्डिंग में भी काफी मजा आता है। मैंने पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट में काफी समय बिताया। मैं इंडिया के लिए खेलना चाहता था। मैं महेंद्र सिंह धोनी को अपना आईकॉन मानता हूं और उन्हें फॉलो करते हुए अपने लक्ष्य की दिशा में चलना शुरू किया। इसी बीच 4 दिसंबर 2021 को मेरा कार एक्सीडेंट हो गया। जिसमें मैं गंभीर रूप से घायल हो गया और एक हाथ चला गया। इस दौरान मुझे लगा कि मेरा सब कुछ चला गया है। मैं उस वक्त काफी रोता था। मुझे एक बार के लिए लग रहा था कि अब आगे कुछ होने वाला नहीं है। लेकिन मैंने हौसला नहीं खोया और मोटिवेशन के वीडियो देखने लगे। लगातार मोटीवेट करने वाले वीडियो ने मुझे नई दुनिया दिखाई। मुझे हौंसला मिला और मैं फिर से खेलना शुरू किया। अबू ताहिर ने बताया कि मेरे पिताजी अबुल हुसैन, माताजी, भाई सहित परिवार के सारे लोग और दोस्तों ने काफी हौंसला दिया। इसके बाद मुझे डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया (डीसीसीआई) के बारे में पता चला। मैं डीसीसीआई से कांटेक्ट किया और फिर मुझे ट्रायल के लिए कॉल हुआ। मैंने ट्रायल दिया और उसमें पास भी हो गए। इसके बाद मैं पीछे मुड़कर नहीं देखा। अबू ताहिर ने बताया कि डीसीसीआई से अक्टूबर में ही राजस्थान में हुए टूर्नामेंट में खेल कर आया हूं। इंडियन कैंप के लिए भी मेरा चयन हुआ है। उड़ीसा में भी खेलने के लिए मेरा नाम आया है। अबू ताहिर ने बताया कि मैं इंडिया टीम के लिए खेलना चाहता हूं। उन्होंने एक सवाल के जवाब में कहा कि जब मैदान में उतरता हूं तो मुझे किसी तरह की हिचकिचाहट नहीं होती, बल्कि लोगों के प्यार से मुझे और ज्यादा हौंसला मिलता है। इस सीनियर लीग टूर्नामेंट में महेशपुर टीम से मुझे खेलने का मौका मेरे साथी खिलाड़ियों ने दिया। मैं अपने सभी साथी और मुझे हौंसला देने वालों का तहे दिल से शुक्रिया अदा करता हूं। मैं उनसे दुआ की गुजारिश करता हूं कि अपने देश के लिए खेलने का सपना पूरा हो। यह थी अबू ताहिर जैसे जिंदादिल खिलाड़ी की दास्तां, जिन्होंने उस पंक्ति को सही साबित कर दिखाया, जिसमें कहा गया है कि आसमान की ऊंचाइयों को छूने के लिए पंखों की नहीं, बल्कि हौंसलों की जरूरत होती है। अबू ताहिर के इस हौंसलें को सलाम है।
