Homeपाकुड़हत्यारे को उम्रकैद,पुलिस की ‘घोर लापरवाही,पर डीजीपी को भेजी फैसले की प्रति
Maqsood Alam
(News Head)

हत्यारे को उम्रकैद,पुलिस की ‘घोर लापरवाही,पर डीजीपी को भेजी फैसले की प्रति

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़। महेशपुर थाना कांड संख्या 169/2023 में पाकुड़ के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम (एडीजे-1) कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए हत्या और जानलेवा हमले के दोषी सोबेन मरांडी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने मामले की जांच में पुलिस की गंभीर चूक पर कड़ी टिप्पणी करते हुए निर्णय की प्रति झारखंड के मुख्य सचिव,पुलिस महानिदेशक और पाकुड़ एसपी को आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजने का आदेश दिया है।

आदिवासी मेले में हुई थी पहचान,फिर शुरू हुआ विवाद

मामला वर्ष 2023 का है। अभियोजन के अनुसार, सूचिका सोनोती टुडू की पहचान एक आदिवासी मेले में कार्यक्रम प्रस्तुत करने के दौरान सोबेन मरांडी से हुई थी। इसके बाद दोनों के बीच फोन पर बातचीत होने लगी। इस रिश्ते को लेकर सोनोती के माता-पिता विरोध करते थे। इसी रंजिश में आरोपी सोबेन मरांडी आधी रात को तलवार/गुप्ती जैसे घातक हथियार लेकर घर में घुस गया।आरोप है कि उसने मदन टुडू पर जानलेवा हमला कर उनकी हत्या कर दी। बीच-बचाव करने पहुंची मृतक की पत्नी रोशो मुर्मू पर भी हमला किया गया, जिससे उसके सिर और चेहरे पर गंभीर चोटें आईं।

सिर्फ पांच गवाहों के भरोसे था पूरा मुकदमा

मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल पांच गवाहों को न्यायालय में पेश किया गया। लेकिन अनुसंधान में गंभीर खामियां सामने आईं। जांच अधिकारी कैला उरांव ने जब्ती सूची में दर्ज तलवार/गुप्ती और खून से सने कपड़ों को न्यायालय में प्रदर्शित नहीं कराया। इन वस्तुओं की फोरेंसिक जांच भी नहीं कराई गई।इतना ही नहीं,घायल रोशो मुर्मू की इंजरी रिपोर्ट भी न्यायालय के रिकॉर्ड पर पेश नहीं की गई। कुछ गवाह अपने पूर्व बयानों से मुकर गए। इन परिस्थितियों के कारण अभियोजन का मामला कमजोर दिखाई देने लगा।

पीपी की दलील और अदालत का अहम हस्तक्षेप

मामले में लोक अभियोजक लुकास कुमार हेमब्रम ने अभियोजन का पक्ष मजबूती से रखा।उन्होंने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि अनुसंधान अधिकारी की चूक के कारण न्याय प्रभावित नहीं होना चाहिए। उन्होंने चश्मदीद घायल गवाह के बयान को दोषसिद्धि के लिए महत्वपूर्ण बताया।मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए अदालत ने भी सक्रिय हस्तक्षेप किया। न्यायालय ने घायल चश्मदीद गवाह रोशो मुर्मू से सीधे सवाल किए। रोशो ने अदालत के समक्ष घटना और अपने सिर पर आई चोटों का स्पष्ट विवरण दिया।अदालत ने उसके मौखिक साक्ष्य को विश्वसनीय मानते हुए आरोपी सोबेन मरांडी को दोषी करार दिया। फैसले में अनुसंधान अधिकारी की कार्यप्रणाली पर ‘घोर लापरवाही’ जैसी गंभीर टिप्पणी भी की गई।

चार धाराओं में सुनाई गई सजा

दोषी सोबेन मरांडी को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में निम्न सजा सुनाई गई—

:–धारा 302 (हत्या): आजीवन सश्रम कारावास और ₹1 लाख जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास।

:–धारा 307 (जानलेवा हमला): आजीवन सश्रम कारावास और ₹50 हजार जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास

:— धारा 326 (घातक हथियार से गंभीर चोट): सात वर्ष का सश्रम कारावास और ₹25 हजार जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास।

:–धारा 452 (गृह-अतिचार): पांच वर्ष का सश्रम कारावास और ₹25 हजार जुर्माना। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास।अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।

पीड़िता को मिलेगा दो लाख रुपये का मुआवजा—

अदालत ने दोषी पर लगाए गए कुल 2 लाख जुर्माने की पूरी राशि घायल पीड़िता रोशो मुर्मू को देने का आदेश दिया है। इसके साथ ही जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत पीड़िता को नियमानुसार अतिरिक्त मुआवजा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया है।

पुलिस की जांच पर अदालत की सख्त टिप्पणी—

इस फैसले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू पुलिस अनुसंधान में बरती गई लापरवाही पर अदालत की गंभीर नाराजगी है। हथियार और खून से सने कपड़ों को न्यायालय में पेश नहीं करना, फोरेंसिक जांच नहीं कराना और घायल पीड़िता की चिकित्सा रिपोर्ट रिकॉर्ड पर नहीं लाना जैसे बिंदुओं को अदालत ने गंभीरता से लिया।इसके बावजूद एक विश्वसनीय घायल चश्मदीद के मौखिक साक्ष्य के आधार पर अदालत ने न्याय सुनिश्चित किया। साथ ही पुलिस अनुसंधान की खामियों को उच्च स्तर पर संज्ञान में लेने के लिए फैसले की प्रति मुख्य सचिव, डीजीपी और पाकुड़ एसपी को भेजने का निर्देश दिया।

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