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Maqsood Alam
(News Head)

साहिबगंज में निर्धारित दर से महंगे डीएपी -यूरिया की बिक्री का आरोप,विधानसभा में मामला उठने के बाद जांच कमेटी गठित करने की मांग

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़-किसानों को निर्धारित दर पर खाद उपलब्ध कराने के सरकारी दावों के बीच डीएपी और यूरिया की कथित कालाबाजारी एवं अधिक कीमत पर बिक्री का मामला अब विधानसभा तक पहुंच गया है।पाकुड़ के विधायक निसात आलम ने झारखंड सरकार के कृषि,पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के मंत्री को पत्र भेजकर मामले की गंभीरता से जांच कराने तथा एक उच्चस्तरीय समिति गठित कर एक माह के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने का आग्रह किया है।विधायक ने अपने पत्र में कहा है कि सरकार की ओर से किसानों को उचित मूल्य पर खाद उपलब्ध कराने के लिए डीएपी की कीमत 1,350 रुपये प्रति बोरी और यूरिया की कीमत 266.50 रुपये प्रति बोरी निर्धारित की गई है।साथ ही राज्य के सभी अनुज्ञप्तिधारी थोक उर्वरक विक्रेताओं को निर्धारित दर पर ही खाद की बिक्री करने का निर्देश दिया गया है।

साहिबगंज में तय कीमत से काफी अधिक पर खाद देने का आरोप—-

विधायक के अनुसार, क्षेत्र भ्रमण के दौरान किसानों एवं खुदरा उर्वरक विक्रेताओं की ओर से मौखिक एवं लिखित शिकायतें प्राप्त हुई हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि साहिबगंज जिले के एक थोक उर्वरक विक्रेता द्वारा खुदरा विक्रेताओं को डीएपी 1,850 रुपये प्रति बोरी और यूरिया 350 रुपये प्रति बोरी की दर से उपलब्ध कराया जा रहा है।यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो निर्धारित सरकारी दर की तुलना में डीएपी पर 500 रुपये प्रति बोरी और यूरिया पर 83.50 रुपये प्रति बोरी अधिक राशि वसूली जा रही है। इसका सीधा असर अंततः किसानों की जेब पर पड़ने की आशंका है।

विधानसभा में तारांकित प्रश्न,विभाग के जवाब पर उठाए सवाल

पत्र में विधायक ने उल्लेख किया है कि इस संबंध में उनके द्वारा विधानसभा में तारांकित प्रश्न भी पूछा गया था। विभाग की ओर से दिए गए जवाब में कहा गया कि निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर उर्वरक दिए जाने संबंधी किसी भी प्रकार की शिकायत अब तक प्राप्त नहीं हुई है।विधायक ने विभाग के इस जवाब को संतोषप्रद नहीं बताया है। उनका कहना है कि उन्हें उपलब्ध कराए गए लिखित आवेदन की प्रति में किसानों और खुदरा विक्रेताओं द्वारा खाद की अधिक कीमत वसूले जाने की शिकायत की गई है। ऐसे में विभाग के पास शिकायत नहीं पहुंचने की बात और क्षेत्र से प्राप्त शिकायतों के बीच विरोधाभास दिखाई देता है।

सिर्फ कागजी जवाब नहीं,जमीनी जांच जरूरी

विधायक निसात आलम ने कृषि मंत्री से मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन करने की मांग की है। उन्होंने समिति को मामले की जांच कर एक महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश देने का आग्रह किया है।उनका उद्देश्य स्पष्ट है कि यदि निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद की बिक्री हो रही है तो इसकी वास्तविकता सामने आए और दोषी पाए जाने वालों पर कार्रवाई हो। साथ ही किसानों को समय पर और निर्धारित दर पर डीएपी एवं यूरिया उपलब्ध कराया जा सके।

किसानों के लिए खाद की कीमत क्यों है अहम?

खेती के मौसम में डीएपी और यूरिया किसानों के लिए बेहद महत्वपूर्ण उर्वरक हैं। ऐसे में यदि निर्धारित मूल्य और वास्तविक बिक्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर हो तो इसका सीधा असर खेती की लागत पर पड़ता है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए अतिरिक्त कीमत का बोझ उनकी आर्थिक स्थिति को और प्रभावित कर सकता है।अब सवाल यह है कि क्या किसानों से निर्धारित मूल्य से अधिक राशि वसूली जा रही है? यदि हां, तो खाद की आपूर्ति श्रृंखला में यह अंतर कहां पैदा हो रहा है—थोक विक्रेता के स्तर पर, खुदरा विक्रेता के स्तर पर या कहीं और?विधायक की मांग के बाद उच्चस्तरीय जांच होती है या नहीं और जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं, इस पर किसानों एवं कृषि क्षेत्र से जुड़े लोगों की नजरें टिकी हैं।

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