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Maqsood Alam
(News Head)

लाभुकों ने डीलर अरुण ठाकुर पर लगाए गंभीर आरोप,एक किलो चावल-गेहूं काटने और विरोध पर राशन नहीं देने की शिकायत

शिकायत में एक ही परिवार के नाम पर कई राशन कार्ड,सरकारी नौकरी व संपन्न परिवारों के राशन उठाव पर भी उठे सवाल, जांच की मांग

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़। गरीब और जरूरतमंद परिवारों को खाद्य सुरक्षा देने वाली सार्वजनिक वितरण प्रणाली में गड़बड़ी के आरोपों ने सवाल खड़े कर दिए हैं। लिट्टीपाड़ा थाना क्षेत्र के मोहलबोना पंचायत से जुड़े ग्रामीणों ने राशन डीलर अरुण ठाकुर पर मनमाने तरीके से राशन वितरण करने, लाभुकों के हिस्से में कटौती करने और विरोध करने पर राशन नहीं देने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए उपायुक्त, पाकुड़ को लिखित शिकायत सौंपी है। शिकायत के साथ ग्रामीणों के हस्ताक्षर भी संलग्न हैं।

हर कार्डधारी से एक किलो चावल और गेहूं काटने का आरोप—

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उपायुक्त को दिए आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि संबंधित डीलर द्वारा लाभुकों को निर्धारित मात्रा के अनुसार राशन नहीं दिया जा रहा है। शिकायत में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि प्रत्येक कार्डधारी से एक किलोग्राम चावल और एक किलोग्राम गेहूं की कटौती की जा रही है। आरोप है कि लाभुकों द्वारा कटौती का विरोध करने पर उन्हें राशन नहीं देने की धमकी दी जाती है।यदि शिकायत में लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो यह मामला गरीब लाभुकों के अधिकारों में सीधी सेंध से जुड़ा गंभीर विषय बन सकता है।

डीलर के गोदाम की व्यवस्था पर भी सवाल—

शिकायत में राशन वितरण स्थल की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिस गोदाम से राशन वितरण किया जाता है, वहां तीन दरवाजे खुले रखे जाते हैं, जिससे राशन के हेरफेर की आशंका बनी रहती है। शिकायतकर्ताओं ने नियमित और पारदर्शी तरीके से एक ही निर्धारित द्वार से राशन वितरण कराने की मांग की है।

डीलर के परिवार के राशन कार्ड भी जांच के घेरे में-—

शिकायत में डीलर के परिवार से जुड़े राशन कार्डों की भी जांच की मांग की गई है।आवेदन के मुताबिक,डीलर के नाम से छह सदस्यों वाला एक राशन कार्ड दर्ज है। शिकायतकर्ताओं ने दावा किया है कि इस कार्ड में शामिल परिवार के सदस्यों में एक पुत्र सरकारी नौकरी करता है और बहू के इंजीनियर होने का उल्लेख किया गया है।ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि यदि परिवार आर्थिक रूप से सक्षम है और उसके सदस्य सरकारी नौकरी सहित अन्य पेशों में हैं, तो क्या वह सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत राशन पाने की पात्रता रखता है.इसका जवाब रिकॉर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

बेटों के नाम पर भी राशन कार्ड होने का दावा—

शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि डीलर के परिवार के सदस्यों के नाम से अलग-अलग राशन कार्ड बनाए गए हैं। आवेदन में दावा है कि इनमें से कुछ लोग वर्तमान में संबंधित गांव में निवास नहीं करते हैं,फिर भी उनके नाम से राशन का उठाव किया जा रहा है।इसके अलावा एक अन्य कार्ड को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने सवाल उठाए हैं। आवेदन में कहा गया है कि संबंधित परिवार वर्तमान में हिरणपुर बाजार में रह रहा है और आर्थिक रूप से संपन्न है, इसके बावजूद राशन उठाने का आरोप है।

डीलर के बेटे पर भी उठे सवाल—

दस्तावेज में डीलर के पुत्र विनोद ठाकुर का भी उल्लेख है। शिकायत के अनुसार, एक राशन कार्ड में तीन सदस्य दर्ज हैं और आरोप लगाया गया है कि विनोद ठाकुर अपने पिता अरुण ठाकुर के साथ मिलकर राशन वितरण का कार्य करता है तथा परिवार के बच्चों को पाकुड़ में रखता है।इन तमाम आरोपों की वास्तविकता क्या है,यह संबंधित विभाग द्वारा राशन कार्ड, ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड, लाभुकों के आधार सीडिंग, स्टॉक रजिस्टर, उठाव एवं वितरण पंजी और गोदाम में उपलब्ध स्टॉक की जांच के बाद ही सामने आ सकती है।ग्रामीणों ने उपायुक्त से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, कथित रूप से अपात्र राशन कार्डों की जांच और यदि गैरकानूनी तरीके से राशन का उठाव हुआ है तो उसकी वसूली की मांग की है। साथ ही दोषी पाए जाने पर संबंधित डीलर के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।

गरीबों के राशन में एक किलो भी कटौती तो बड़ा सवाल—

सार्वजनिक वितरण प्रणाली का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद परिवारों तक निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न पहुंचाना है। ऐसे में यदि किसी लाभुक के हिस्से से नियमित रूप से खाद्यान्न काटे जाने का आरोप सामने आता है तो यह महज राशन की मात्रा का मामला नहीं,बल्कि सरकारी खाद्य सुरक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल है।अब निगाहें जिला आपूर्ति विभाग की जांच पर टिकी हैं। क्या राशन कार्डों का भौतिक सत्यापन होगा? क्या ई-पॉस मशीन के रिकॉर्ड और वास्तविक वितरण का मिलान किया जाएगा? क्या स्टॉक रजिस्टर की जांच होगी? और यदि आरोप सही मिले तो जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होगी?इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही मिलेगा। फिलहाल ग्रामीणों की लिखित शिकायत ने लिट्टीपाड़ा क्षेत्र की सार्वजनिक वितरण प्रणाली की कार्यप्रणाली को सवालों के घेरे में ला दिया है।

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