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Maqsood Alam
(News Head)

संत जेवियर्स स्कूल कोटालपोखर में वन्यजीव सप्ताह,बच्चों ने उठाई संरक्षण की आवाज,नदी को प्रदूषित करने वालों को सोचने की जरूरत

समाचार चक्र संवाददाता

कोटालपोखर-गंगा में डॉल्फिन का दिखना सिर्फ एक खूबसूरत नजारा नहीं, बल्कि नदी के स्वस्थ होने का संकेत है। लेकिन जिस नदी को हम जीवनदायिनी कहते हैं,उसी में बढ़ता प्रदूषण, प्लास्टिक-कचरा,मछली पकड़ने के जाल और नदी के प्राकृतिक प्रवाह से छेड़छाड़ इस दुर्लभ जलीय जीव के अस्तित्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं। इसी गंभीर मुद्दे को विद्यार्थियों तक पहुंचाने के उद्देश्य से कोटालपोखर स्थित संत जेवियर्स स्कूल में वन्यजीव सप्ताह का आयोजन किया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्राचार्य फादर डॉ. स्टीफन राज एवं फॉरेस्टर राणा रंजीत चौधरी ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में साहिबगंज वन प्रमंडल के डीएफओ प्रबल गर्ग आइएफएस मौजूद रहे। उनके साथ कंसल्टेंट आशुतोष कुमार,सृष्टि गंगा प्रहरी सोसायटी के अध्यक्ष मुकेश चौधरी,प्रोजेक्ट ऑफिसर अमित मिश्रा, शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।

डॉल्फिन का संकट, नदी के भविष्य का संकेत—-

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कार्यक्रम में विद्यार्थियों को बताया गया कि गंगा डॉल्फिन भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव है। यह गंगा-ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र की महत्वपूर्ण मीठे पानी की प्रजाति है। इसकी दृष्टि बेहद कमजोर होती है और यह इकोलोकेशन के जरिए पानी में अपने आसपास की वस्तुओं तथा शिकार का पता लगाती है।लेकिन सवाल यह है कि जब नदियां ही सुरक्षित नहीं रहेंगी तो डॉल्फिन कहां बचेगी.नदी में प्लास्टिक और कचरा डालना, प्रदूषण बढ़ाना, अत्यधिक जल दोहन, मछली पकड़ने के जाल में डॉल्फिन का फंसना, बांध-बैराज और नदी के प्राकृतिक प्रवाह में बदलाव जैसी गतिविधियां इसके लिए गंभीर खतरा हैं। ऐसे में डॉल्फिन का संरक्षण केवल वन विभाग या किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि नदी से जुड़े हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

बच्चों ने उठाया बड़ा सवाल—-

विद्यालय के प्राचार्य फादर डॉ. स्टीफन राज ने कहा कि वन्यजीव केवल जंगल की शोभा नहीं हैं। वे प्रकृति की खाद्य-श्रृंखला और पारिस्थितिक तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। किसी एक प्रजाति का खत्म होना पूरे पारिस्थितिक तंत्र को प्रभावित कर सकता है।मुख्य अतिथि डीएफओ प्रबल गर्ग ने विद्यार्थियों को वन्यजीवों और विशेष रूप से गंगा डॉल्फिन के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनने का संदेश दिया। उन्होंने बच्चों से स्वयं जागरूक होने के साथ आसपास के लोगों को भी पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रेरित करने की अपील की।

‘गंगा डॉल्फिन बचाओ, गंगा बचाओ’ का संकल्प—

कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने वन्यजीव संरक्षण, जैव-विविधता और पर्यावरणीय चुनौतियों पर संवाद किया। उन्हें वनों की कटाई, अवैध शिकार, प्रदूषण और प्राकृतिक आवासों के विनाश से होने वाले नुकसान की जानकारी दी गई।अंत में विद्यार्थियों ने वन्यजीवों एवं प्रकृति की रक्षा करने, गंगा डॉल्फिन सहित जलीय जीवों के संरक्षण में सहयोग करने तथा समाज में पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने की शपथ ली।वन्यजीव सप्ताह का संदेश साफ था,डॉल्फिन को बचाना है तो पहले नदी को बचाना होगा। क्योंकि नदी सिर्फ पानी की धारा नहीं, बल्कि हजारों जीवों और करोड़ों लोगों के जीवन की धारा है।

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