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Maqsood Alam
(News Head)

सदर अस्पताल की बदहाली पर कांग्रेस का तीखा हमला-कहीं पंखे गायब,कहीं गंदगी का अंबार,मरीजों की पीड़ा पर कौन देगा जवाब

पाकुड़ सदर अस्पताल के औचक निरीक्षण में अव्यवस्थाओं का खुलासा, मरीजों ने नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार पर उठाए सवाल,अस्पताल प्रबंधन ने जल्द सुधार का दिया भरोसा

समाचार चक्र संवाददाता

पाकुड़-स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के दावों के बीच सोनाजोड़ी स्थित सदर अस्पताल की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। कांग्रेस जिला अध्यक्ष श्रीकुमार सरकार के नेतृत्व में कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार,निरीक्षण के दौरान साफ-सफाई की कमी,खराब या गायब पंखे,पेयजल की समस्या और मरीजों के साथ कथित दुर्व्यवहार जैसी कई शिकायतें सामने आईं। इन परिस्थितियों ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

वार्डों में गर्मी से बेहाल मरीज,सफाई व्यवस्था पर सवाल–

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निरीक्षण के दौरान कांग्रेस प्रतिनिधियों ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों में साफ-सफाई की स्थिति पर नाराजगी जताई।उनका आरोप है कि कई वार्डों में पंखे खराब मिले, जबकि कुछ स्थानों पर पंखे उपलब्ध ही नहीं थे।भीषण गर्मी के बीच इलाज करा रहे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।सवाल यह है कि जब अस्पताल में भर्ती मरीज पहले से बीमारी और शारीरिक पीड़ा से जूझ रहे हैं,तो उन्हें बुनियादी सुविधाओं के लिए भी क्यों परेशान होना पड़े? अस्पताल में साफ-सफाई,हवा और शुद्ध पेयजल जैसी आवश्यक सुविधाएं किसी पर एहसान नहीं,बल्कि मरीजों की बुनियादी जरूरतें हैं।

नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार पर मरीजों की शिकायतें—

औचक निरीक्षण के दौरान मरीजों और उनके परिजनों ने नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार को लेकर भी शिकायतें कीं। प्रतिनिधिमंडल के अनुसार, मरीजों ने नर्स इंदु ठाकुर पर कथित तौर पर दुर्व्यवहार करने,मनमानी करने और मरीजों व उनके परिजनों को फटकार लगाने के आरोप लगाए।हालांकि, इन शिकायतों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित नर्स का पक्ष सामने आना बाकी है। ऐसे में अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी है कि शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

ऑपरेशन के बाद मरीजों को रखने वाली जगह पर भी गंदगी का आरोप—

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने अस्पताल अधीक्षक डॉ. सोहैल अनवर और सिविल सर्जन के समक्ष समस्याओं को उठाया। प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के बाद मरीजों को जिस स्थान पर रखा जाता है,वहां भी साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। उन्होंने आशंका जताई कि ऐसी परिस्थितियों में मरीजों को संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।इसके अलावा, खराब पंखों और शुद्ध पेयजल की समस्या को भी गंभीर बताया गया। प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था दुरुस्त की जाए, सभी वार्डों में पंखों की उपलब्धता सुनिश्चित हो और मरीजों को स्वच्छ पेयजल मिले।

आरोपों पर अस्पताल अधीक्षक का जवाब,मुझे निशाना बनाया जा रहा है—

शिकायतों पर प्रतिक्रिया देते हुए अस्पताल अधीक्षक डॉ. सोहैल अनवर ने कहा कि कुछ लोग उन्हें निशाना बना रहे हैं और बदनाम करने के लिए तरह-तरह के हथकंडे अपनाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें अस्पताल का प्रभार संभाले अभी केवल दो महीने हुए हैं।डॉ. अनवर के मुताबिक, पूर्व में अस्पताल की स्थिति काफी खराब थी और अब व्यवस्था को धीरे-धीरे पटरी पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सामने आई समस्याओं को जल्द दूर किया जाएगा। चिकित्सकों की कमी का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इस समस्या के समाधान के लिए भी जल्द कदम उठाए जाएंगे।

बयान और जमीनी हकीकत के बीच कितना फासला—

अस्पताल अधीक्षक का यह कहना कि उन्हें केवल दो महीने पहले प्रभार मिला है, प्रशासनिक परिस्थितियों को समझने का एक पक्ष हो सकता है। लेकिन मरीजों के लिए सबसे बड़ा सवाल यह है कि उन्हें आज बेहतर इलाज,स्वच्छ वातावरण,पर्याप्त पंखे और सम्मानजनक व्यवहार कब मिलेगा।
यदि अस्पताल में अव्यवस्थाओं की शिकायतें सामने आई हैं, तो उनका समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि नियमित निगरानी, जवाबदेही और समयबद्ध कार्रवाई से होगा। मरीजों और उनके परिजनों की शिकायतों की निष्पक्ष जांच भी जरूरी है, ताकि वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

अब निगरानी और कार्रवाई की बारी—

सोनाजोड़ी सदर अस्पताल में सामने आई शिकायतों ने स्वास्थ्य व्यवस्था की जवाबदेही पर बहस छेड़ दी है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने समस्याओं को अधिकारियों के समक्ष रखा है। अब निगाहें अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग पर हैं कि साफ-सफाई, पंखों, पेयजल, नर्सिंग स्टाफ के व्यवहार और चिकित्सकों की कमी जैसे मुद्दों पर कितनी तेजी से कार्रवाई होती है।क्योंकि अस्पताल में आने वाला मरीज किसी राजनीतिक बयान या प्रशासनिक सफाई का इंतजार नहीं करता,उसे समय पर इलाज, स्वच्छ वातावरण और मानवीय व्यवहार चाहिए। यही किसी भी सरकारी अस्पताल की असली कसौटी है।

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