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समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। सदर प्रखंड अंतर्गत जन वितरण प्रणाली के अनाज गोदाम में नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही है। यहां खुलेआम ओवरलोड, पिकअप की जगह ट्रैक्टर का उपयोग कर सरकारी नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है। यह भी सूचना है कि कुछ डीलरों को बिना नापतोल के भी अनाज दे दिया जाता है। परिवहन अभिकर्ता के लिए निविदा में उल्लिखित शर्तों को दरकिनार कर काम हो रहा है। यह सब कुछ विभाग के अधिकारियों की नजरों के सामने हो रहा है। जानकार बताते हैं कि गोदाम से राशन डीलर को अनाज नाप-तोल कर दिया जाना है। परिवहन अभिकर्ता के लिए निविदा में ट्रैक्टर का प्रावधान बिल्कुल भी नहीं है। पिकअप वैन में अनाज लोड कर डीलर के दुकान तक पहुंचाना है। लेकिन यहां ट्रैक्टर का खुलेआम इस्तेमाल हो रहा है। आमतौर पर ट्रैक्टर का इस्तेमाल कृषि कार्य में होता है। ओवरलोड की बात करें तो जानकार का मानना है कि पिकअप वैन में 04 टन अनाज ही लोड किया जा सकता है। लेकिन पिकअप वैन के बदले गलत तरीके से ट्रैक्टरों के इस्तेमाल के साथ-साथ 04 टन की जगह लगभग 08 टन अनाज लोड कर दिया जाता है। जो निर्धारित मात्रा से दो गुना ज्यादा है। इधर सूत्रों के मुताबिक गोदाम में अनाज के रखरखाव में भी नियमों की अनदेखी हो रही है। आंगनबाड़ी और स्कूल को आवंटित होने वाली अनाज को गोदाम अलग रखने का प्रावधान है। लेकिन आंगनबाड़ी और स्कूल को आवंटित अनाज को अलग से नहीं रखा जाता है। सूत्रों का कहना है कि आंगनबाड़ी और स्कूल से संबंधित अनाज का स्टॉक का मिलान करने पर गड़बड़ियां सामने आ सकती है। अगर ऐसा है तो कहीं ना कहीं जिम्मेदारी पर सवाल खड़े होना लाजमी है। इधर एजीएम राजीव पंडित ने कहा कि पिकअप का तो प्रावधान है, पर जिला से प्राप्त नंबरों के आधार पर ही वाहन में अनाज लोड दिया जाता है। उन्होंने ओवरलोड को लेकर माना कि 04 टन अनाज लोड करने का प्रावधान है। अभिकर्ता को शायद कुछ बचत होता होगा, इसलिए ज्यादा लोड कर लिया जाता है। उन्होंने बिना नापतोल की बातों पर कहा कि अनाज नाप-तोल कर ही दिया जाता है। कुछ डीलर है, जो बिना नापतोल के एवरेज में अनाज ले लेते हैं। आंगनबाड़ी और स्कूल को आवंटित अनाज को अलग से रखने की बात पर कहा कि अलग-अलग अनाज को रखना संभव नहीं है।
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