विज्ञापन
समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। सदर प्रखंड अंतर्गत लखीनारायणपुर गांव में सियार हमले की घटनाओं को लेकर वन विभाग गंभीर दिख रहा है। प्रभावित क्षेत्रों में क्विक रिएक्शन टीम (क्यूआरटी) कैंप कर रही है। वन प्रमंडल पदाधिकारी (डीएफओ) सौरव चंद्रा मामले को स्वयं गंभीरता से लिया है और नजर बनाए हुए हैं। ग्रामीणों की ओर से वन विभाग से पांच मांगें रखी गई थी। जिस पर डीएफओ सौरभ चंद्रा ने सकारात्मक परिणाम का आश्वासन दिया था। बता दें कि ग्रामीण 12 मई को ही डीएफओ सौरभ चंद्रा से मिले थे और मांगों का ज्ञापन सौंपा गया था। ग्रामीणों की ओर से पांच प्रमुख मांगों को रखा गया था। इनमें अविलंब सम्मान जनक मुआवजा, हिंसक जानवरों को पकड़ने के लिए विशेष सर्च ऑपरेशन, वन रक्षकों की स्थाई रात्रि गश्ती, स्ट्रीट लाइट एवं सोलर फेंसिंग की व्यवस्था और हेल्पलाइन नंबर जारी करने तथा त्वरित प्रतिक्रिया दल की स्थापना की मांग शामिल थी। ग्रामीणों की इन मांगों को गंभीरता से लेते हुए डीएफओ सौरभ चंद्रा ने क्विक रिएक्शन टीम का गठन कर दिया है। यह टीम गांव में कैंप कर रही है। प्रभावित क्षेत्रों में रात्रि गस्त और सुरक्षा को लेकर सक्रिय है। वन विभाग की ओर से प्रावधान के मुताबिक उचित मुआवजा का भी आश्वासन दिया गया है। हालांकि तत्काल मृत बच्ची के परिजनों को पचास हजार रुपए और घायल बच्चों के परिजनों को पांच-पांच हजार रुपए वन विभाग के अधिकारी गांव पहुंचकर पूर्व में ही दे चुकी है। इधर स्ट्रीट लाइट और सोलर फेंसिंग की व्यवस्था की जो मांग की गई है, ग्रामीण उस इंतजार में है। अगर इस मांग को छोड़ दिया जाए, तो बाकी सभी मांगों पर वन विभाग की टीम पूरी गंभीरता से काम करती नजर आ रही है। बता दें कि गत आठ मई की रात सियार ने एक घर में घुसकर तीन माह की बच्ची अफीफा खातून को उठा ले गया था। जिसे मारकर सियार ने अपना शिकार बना लिया। बच्ची के शव का कुछ अवशेष ही एक झाड़ी में पड़ा मिला था। तीन माह की मासुम के शिकार के बाद उसी रात उसी बच्ची की चार साल की सगी बहन को भी निशाना बनाने की कोशिश की गई। हालांकि सियार इस बार अपने मनसूबे पर सफल नहीं हो पाया। लेकिन बच्ची सियार के हमले से घायल हो गई। इसके बाद लगातार दूसरे तीसरे दिन भी सियार के झुंड छोटो-छोटे बच्चों को निशाना बनाकर हमले करता रहा। जिसमें कम-से-कम चार बच्चे घायल हो गए। इन्हीं घटनाओं को लेकर भाजपा अल्पसंख्यक राष्ट्रीय मंत्री डॉ मिसफीका हसन के नेतृत्व में ग्रामीणों ने डीएफओ से मिलकर मांगों का ज्ञापन सौंपा था।
विज्ञापन
विज्ञापन

