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अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। झारखंड में साल 2024 में संपन्न हुए विधानसभा चुनाव में पाकुड़ सीट पूरे राज्य में चर्चाओं में रहा। यह सीट कई कारणों से सुर्खियों में रहा। इनमें एक बड़ी वजह पहली बार चुनावी जंग में उतरी कांग्रेस की वर्तमान विधायक निसात आलम की ऐतिहासिक जीत थी। पूर्व मंत्री आलमगीर आलम की धर्मपत्नी निसात आलम ने अपनी पहली ही चुनावी जंग में विरोधियों के पसीने छुड़ा दिए। अचानक से राजनीति में उनकी एंट्री लोगों में चर्चा का विषय बन गया। उनके सामने चुनाव में कई चुनौतियां मुंह बाए खड़ी थी। पति आलमगीर आलम का मान सम्मान और प्रतिष्ठा को बचाना, पार्टी के भरोसे पर खरा उतरना, जनता और मतदाताओं का विश्वास हासिल करना, इन तमाम चुनौतियों का सामना करना था। पहली बार घर की दहलीज से निकल कर राजनीति में उस अहम वक्त पर कदम रखना, जब ये सारी चुनौतियां सामने खड़ी हो, एक गृहिणी महिला के लिए सबकुछ आसान नहीं होता। इसके बावजूद निसात आलम ने चुनौतियों का डटकर सामना किया और कामयाबी हासिल कर अपनी काबिलियत को साबित कर दिखाया। पाकुड़ विधानसभा सीट पर उनकी ऐतिहासिक जीत पूरे प्रदेश में सुर्खियां बन गई । अपने नाम ना सिर्फ जीत दर्ज कराई, बल्कि सबसे ज्यादा वोटों से जीत का रिकॉर्ड बना डाला। यह जीत इतना अप्रत्याशित था कि विरोधी दलों के प्रत्याशी काफी पीछे रह गए। निसात आलम ने 1 लाख 55 हजार 827 रिकॉर्ड वोट हासिल कर विरोधियों के पसीने छुड़ा दिए। उनकी जीत का अंतर 86 हजार 29 वोटों का रहा, जो अब तक की सबसे बड़ी जीत रही। इस तरह से पाकुड़ की जनता को दशकों बाद निसात आलम के रूप में एक महिला विधायक मिली। जिनसे आम जनता को काफी उम्मीदें हैं और निसात आलम जनता की उम्मीदों पर खरी उतरती नजर भी आ रही है। उनकी जीत की चर्चाओं में महिला वोटरों का बड़ा योगदान शामिल रहा। लोगों का मानना है कि महिलाओं ने चुनाव में काफी दिलचस्पी दिखाई और निसात आलम के पक्ष में वोट किया। आज विधायक निसात आलम खासकर महिलाओं के लिए काफी लोकप्रिय नेत्री बन गई है।
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