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समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। झारखंड का सबसे पिछड़ा जिला पाकुड़ काफी सारी समस्याओं से जूझ रहा है। इनमें एक बड़ी समस्या बिजली आपूर्ति की है। अलग राज्य गठन के बाद से ही बिजली की समस्या से जनता त्रस्त हैं। तकरीबन 25 साल बीत जाने के बावजूद बिजली की समस्या का स्थाई निदान आज तक नहीं निकला। नेताओं की चुनाव के दौरान गला फाड़ फाड़ कर बिजली आपूर्ति को सुधारने का वादा झूठ ही साबित होता रहा। कांग्रेस, बीजेपी, झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित तमाम राजनीतिक दलों के नेता चुनावी भाषणों में बिजली को खास मुद्दा बनाया। लेकिन काम किसी ने भी नहीं कर दिखाया। इसी का खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है। आज जब गर्मी से लोग परेशान हैं, बिजली रात-रात भर गायब हो जाती है। दिन में भी वही स्थिति है। पिछले करीब एक सप्ताह से बिजली की दुर्दशा लोगों को रुला रही है। लेकिन किसी नेता के मुंह से एक शब्द नहीं निकलती। नेताओं की खामोशी से जनता में आक्रोश दिख रहा है। बिजली विभाग के प्रति भी लोगों में काफी नाराजगी है। यह नाराजगी इसलिए भी ज्यादा है कि गर्मी में निर्बाध रूप से बिजली देने की बात कह कर तकरीबन एक महीने तक मेंटेनेंस का काम चला और बिजली काटी गई। मेंटेनेंस के नाम पर घंटों बिजली काट दिया गया कि गर्मी आने से पहले नियमित रूप से बिजली आपूर्ति के लिए तैयारी किया जा रहा है। इस दौरान नेताओं के जुबान से भी इसी तरह की बातें सुनने को मिली। आज जब गर्मी चरम पर है, घर से निकलना भी मुश्किल हो रहा है, ऐसे में बिजली के बिना घर में रहना भी मुश्किल हो गया है। आखिर बिजली में सुधार कब आएगा, इस पर विभाग या नेताओं के बयान क्यों नहीं आ रहे। जबकि जनता नेताओं के बयान आने का इंतजार कर रहे हैं।
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