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समाचार चक्र संवाददाता
गोड्डा-झारखंड के गोड्डा जिले में प्रशासनिक जिम्मेदारी अब एक ऐसे अधिकारी के हाथों में आई है,जिनकी कहानी सिर्फ एक पद तक सीमित नहीं, बल्कि एक पूरे परिवार की तपस्या का परिणाम है। लोकेश मिश्रा,जिन्होंने 56 वें उपायुक्त के रूप में पदभार ग्रहण किया है, उस विरासत का हिस्सा हैं जिसने यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षा को चार बार नहीं, बल्कि एक ही घर से चार सफलताओं में बदल दिया।एक साधारण परिवार,सीमित संसाधन, और बड़ा सपना-यही था उनकी यात्रा का आधार। उनके पिता,एक ग्रामीण बैंक में कार्यरत प्रबंधक, ने सिर्फ एक बच्चे के सफल होने का सपना नहीं देखा, बल्कि चारों बच्चों को प्रशासनिक सेवा में देखने का संकल्प लिया।यह संकल्प ही आगे चलकर चार सफलताओं में बदल गया तीन आईएएस और एक आईपीएस।
लोकेश मिश्रा की यह उपलब्धि किसी एक दिन का परिणाम नहीं है। यह उन अनगिनत रातों की कहानी है,जहाँ आराम से ज्यादा प्राथमिकता किताबों को दी गई।यह उस अनुशासन का नतीजा है, जहाँ सपनों को किसी कारणों से बड़ा रखा गया।अब गोड्डा के लिए यह सिर्फ एक नए उपायुक्त का आगमन नहीं है,बल्कि एक ऐसे नेतृत्व की शुरुआत है जो जमीनी सच्चाइयों को समझता है।जो जानता है कि एक छोटे घर से निकलकर बड़े फैसले कैसे लिए जाते हैं।गोड्डा जैसे जिले के लिए,जहाँ विकास की चुनौतियाँ अभी भी स्पष्ट हैं, लोकेश मिश्रा से उम्मीदें स्वाभाविक रूप से अधिक हैं।उनकी पृष्ठभूमि यह संकेत देती है कि वे सिर्फ फाइलों तक सीमित रहने वाले अधिकारी नहीं होंगे,बल्कि जमीनी स्तर पर बदलाव लाने की कोशिश जरूर करेंगे.
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