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Maqsood Alam
(News Head)

अग्निशमन विभाग में मैन पावर की कमी, अधिकारी को भी पकड़नी पड़ती है स्टेयरिंग

तीन-तीन वाहन के लिए सिर्फ पांच कर्मी ही मौजूद,एक वाहन में कम-से-कम छह कर्मी की जरूरत

Gunjan Saha
(Desk Head)

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समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। अग्निशमन विभाग मैनपावर की कमी से जूझ रहा है। हालांकि विभाग में कर्मियों की कमी आज की नई बात नहीं है, यह विभाग शुरुआती दिनों से ही कर्मियों की कमी झेल रही है। मैन पावर की भारी कमी के बावजूद विभाग में पदस्थापित पदाधिकारी और कर्मी अपनी जिम्मेवारी को बखूबी ईमानदारी पूर्वक निभाते आ रहे हैं। यहां ईमानदारी शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया जा रहा है कि जरूरत पड़ने पर स्वयं अग्निशमालय पदाधिकारी भी वाहन का स्टेयरिंग पकड़ने में हिचकते नहीं है। अगर वैसी स्थिति आ गई तो विभाग में तैनात एकमात्र अधिकारी स्वयं वाहन का स्टेयरिंग थाम लेते हैं। यही वजह है कि मैन पावर की कमी के बावजूद पूरे जिले में आगलगी की घटनाओं से निपटने में सफल हो पाते हैं।

पांच कर्मी मिलकर बुझाते हैं आग

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अग्निशमन विभाग में सिर्फ पांच कर्मी ही तैनात हैं। इनमें अग्निक चालक और हवलदार शामिल हैं। यही पांच कर्मी मिलकर पूरे जिले में आग बुझाते हैं। इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगलगी की घटनाओं से निपटने में कर्मियों को कितनी मशक्कत करनी पड़ती है। इसका भी सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि अग्निशमन विभाग या खुद कर्मियों पर कोई दाग ना लगे, किसी तरह का सवाल खड़े ना हो, इसलिए इन्हें अपनी जिम्मेदारी को निभाने के लिए आधी रात को भी तैयार रहना पड़ता है।

कितने कर्मियों की है जरुरत

अग्निशमन विभाग में वर्तमान में तीन-तीन वाहन है। इस हिसाब से विभाग का मानना है कि एक वाहन में कम-से-कम 6 कर्मियों की आवश्यकता पड़ती है। इसमें चार अग्निक चालक, एक हवलदार और एक प्रधान चालक की जरूरत पड़ती है। इस हिसाब से तीन-तीन वाहन के लिए कम से कम 18 कर्मियों की आवश्यकता है।

अधिकारी को भी संभालना पड़ता है मोर्चा

अग्निशमालय पदाधिकारी को भी घटनाओं से निपटने के लिए मोर्चा संभालना पड़ता है। यह एकाध बार की बात नहीं, बल्कि मैनपावर की कमी की वजह से अक्सर ही उन्हें मोर्चा संभालना होता है। यहां तक कि उन्हें खुद वाहन का स्टेयरिंग पकड़ना पड़ता है। हालांकि अग्निशमालय पदाधिकारी को इस बात से जरा सा भी संकोच नहीं है और ना ही किसी तरह की हिचक होती है।

और भी है चुनौतियां

अग्निशमन विभाग के पास और भी कई सारी चुनौतियां हैं। इनमें जिला मुख्यालय से प्रखंडों में घटना के वक्त समय पर पहुंचना एक बड़ी चुनौती शामिल है। उल्लेखनीय है कि अग्निशमन विभाग जिला मुख्यालय में कार्यरत है। जिला मुख्यालय या सदर प्रखंड पाकुड़ को छोड़कर अमड़ापाड़ा, हिरणपुर, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर और पाकुड़िया प्रखंड भी है। जिसकी मुख्यालय से दूरी विभाग के लिए मुश्किल खड़ी कर देती है। अगर अमड़ापाड़ा, हिरणपुर, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर या पाकुड़िया प्रखंड से आगलगी की सूचना आती है और वाहन लेकर जाना होता है, तो दूरी की वजह से वाहन को पहुंचने में काफी वक्त लग जाता है। वहीं अगर पाकुड़ सदर प्रखंड की बात करें तो ग्रामीण इलाकों में संकीर्ण रास्तों की वजह से भी वाहन लेकर समय पर पहुंचना भी कठिन चुनौती है।

विभाग को जल्द मिलेगी एक छोटी वाहन

अक्सर ग्रामीण इलाकों में घटना स्थल तक वाहन ले जाने में संकीर्ण रास्ता बाधक बन जाता है। इन संकीर्ण रास्तों वाले मोहल्ले में घटनाओं से निपटने के लिए कर्मियों को काफी मशक्कत करनी पड़ती है। लेकिन यह मुश्किल भी बहुत जल्द दूर होने वाली है। विभाग को जल्द ही एक छोटी अग्निशमन वाहन उपलब्ध होगी।

अग्निशमालय पदाधिकारी ने कहा

अग्निशमालय पदाधिकारी अजय कुमार सिंह ने कहा कि मैनपावर की कमी जरूर है। पर सभी कर्मी अपनी ड्यूटी को फर्ज मानकर चलती है और इमानदारी से काम करते हैं। उन्होंने कहा कि कुछ चुनौतियां भी हैं, पर यहां सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त है। ईंधन की भी दिक्कतें नहीं है। ईंधन का भुगतान समय पर मिल जाता है। उन्होंने कहा कि मैंने 25 जनवरी 2025 को पाकुड़ में जॉइनिंग किया था। तब से आज तक आगलगी की 91 मामलों में सफलता पूर्वक काम किया है।

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