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ललन झा@समाचार चक्र
अमड़ापाड़ा। गरीबों, पिछड़ों और जरूरतमंदों को आवास योजना से आक्षादित करने के अभियान में भी भ्रष्टाचार! बड़ा सवाल है! जनजातीय व आदिवासी जन सामान्य के समग्र कल्याण व उत्थान के लिए काम करने वाली सरकार का भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी के दावे प्रखंड में खोखले साबित हो रहे हैं। हमारी प्रशासनिक व पंचायती राज व्यवस्था की पंचायत अथवा ग्राम्य स्तरीय इकाई गरीबों का शोषण कर रहे हैं। जरूरतमंद ग्रामीण लाभुकों का दोहण कर रहे हैं। पीएम आवास प्लस में योग्य या अयोग्य लाभुकों के नाम जोड़ने या हटाने के एवज भी नाजायज वशूली कर रहे हैं। ऐसा मामला प्रखंड के डूमरचीर पंचायत में खुलकर सामने आया है। जिन पंचायत सचिव तथा पंचायत समिति सदस्य को यह महती जिम्मेवारी दी गई थी वही गड़बड़झाला कर रहे हैं। ग्रामीण बीडीओ से इस मामले कड़े एक्सन का फरियाद कर रहे हैं।
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123 योग्य लाभुकों के नाम पीएम आवास प्लस की सूची से हुए गायब
जानकारी मिली है कि इस सरकारी बाबू व जनप्रतिनिधि ने आपसी घालमेल से संबंधित पंचायत के विभिन्न गांवों के 123 योग्य लाभुकों के नाम सत्यापन की आड़ में सूची से डिलीट कर दिया है। यह मामला गहन जांच का विषय है। चूंकि, जिनके नाम हट गए उन्हें आवास लाभ से पुनः आक्षादित करना आसान नहीं है। हालांकि पता यह भी चला है कि जांचोपरांत उल्लिखित संख्या बढ़ भी सकती है।
ग्रामीणों ने बीडीओ को लिखित शिकायत देकर अवैध राशि वसूली और नाम छंटने की है पुष्टि
पंचायत के बड़ा बासको गांव के दर्जनों आदिवासी महिला-पुरुषों ने आवास जियो टैग के नाम पांच सौ से दो-दो हजार रुपए अवैध वसूली की पुष्टि शिकायत पत्र में किया है। पैसे नहीं देने की स्थिति में पूर्वाग्रह वश सही व्यक्तियों के नाम भी सत्यापन के दौरान हटा देने की बात कही है। ये लोग इस हरकत से आहत और आक्रोषित भी हैं।
क्या कहते हैं बीडीओ
प्रमोद कुमार गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि मामला जब मेरे संज्ञान में आया तो मैंने जांच किया और शिकायत को सत्य पाया है। संबंधित पंचायत सचिव की कार्य शैली सरकारी नियमों के प्रतिकूल है। उनके विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।

