समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़। विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस के अवसर पर गुरुवार को झारखंड विकास परिषद द्वारा “सुरक्षित बचपन के लिए दामिन” परियोजना के तहत डुमेरचिर +2 हाई स्कूल में जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र-छात्राओं को मानव तस्करी के खतरों, उसके कारणों एवं बचाव के उपायों की जानकारी देकर उन्हें सतर्क और जागरूक बनाना था।कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुई। विद्यालय के प्राचार्य एवं शिक्षकों ने अतिथियों का स्वागत किया।परियोजना समन्वयक मनोरंजन सिंह ने विश्व मानव तस्करी विरोधी दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गरीबी,अशिक्षा, बेरोजगारी और जागरूकता की कमी के कारण बच्चे एवं महिलाएं मानव तस्करों के जाल में फंस जाते हैं।उन्होंने छात्रों से नौकरी, शिक्षा या विवाह के नाम पर दिए जाने वाले झूठे प्रलोभनों से सावधान रहने की अपील की और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 अथवा पुलिस को देने का आग्रह किया।शिक्षक हेमंत कुमार ने मानव तस्करी की रोकथाम पर विस्तार से जानकारी देते हुए कहा कि तस्कर अक्सर बेहतर नौकरी और अधिक आय का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं। उन्होंने अभिभावकों, शिक्षकों और समुदाय से बच्चों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा बाहर भेजने से पहले पूरी जानकारी सुनिश्चित करने की अपील की।इस अवसर पर शिक्षक संदीप महतो ने कहा कि शिक्षा ही शोषण और गरीबी के खिलाफ सबसे सशक्त हथियार है। उन्होंने बच्चों से नियमित रूप से विद्यालय आने और अपने भविष्य को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा को प्राथमिकता देने का आह्वान किया।कार्यक्रम में सामुदायिक कार्यकर्ता लक्ष्मी हेंब्रम ने गांवों में मानव तस्करी के तरीकों और अपने जमीनी अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि किस प्रकार तस्कर मीठी बातों और झूठे वादों के जरिए लोगों को बहकाकर उनका शोषण करते हैं। उनके अनुभवों ने बच्चों को सतर्क रहने का महत्वपूर्ण संदेश दिया।कार्यक्रम में लगभग 200 छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। बच्चों ने मानव तस्करी के विरुद्ध जागरूक रहने का संकल्प लिया तथा कार्यक्रम के अंत में जागरूकता पंपलेट एवं सूचना सामग्री का वितरण किया गया।समापन अवसर पर विद्यालय प्रबंधन एवं झारखंड विकास परिषद के प्रतिनिधियों ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा और मानव तस्करी की रोकथाम के लिए ऐसे जागरूकता अभियान भविष्य में भी लगातार चलाए जाएंगे। कार्यक्रम को सफल बनाने में विद्यालय परिवार, जेवीपी के फील्ड कार्यकर्ताओं एवं स्वयंसेवकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

