ललन झा@समाचार चक्र
अमड़ापाड़ा। दिनदहाड़े हथियार लहराते अपराधी आते हैं,लाखों के स्वर्णाभूषण समेटते हैं,दो राउंड फायरिंग करते हैं और फिर बेखौफ निकल जाते हैं।पीछे रह जाता है दहशत में डूबा कारोबारी और पुलिस की कार्रवाई का इंतजार। अमड़ापाड़ा के किशुन वर्मा ज्वेलर्स में 2 सितंबर को हुई लूट की वारदात ने सिर्फ एक स्वर्ण व्यवसायी को नहीं,बल्कि पूरे स्वर्ण कारोबार की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।घटना के चार दिन बाद भी लूटकांड का खुलासा नहीं होना पुलिस की कार्यशैली और अपराधियों पर शिकंजे को लेकर सवाल पैदा कर रहा है। आखिर हथियारबंद अपराधी दिनदहाड़े वारदात को अंजाम देकर फरार कैसे हो गए? पुलिस की गश्ती व्यवस्था कहां थी? घटना के बाद अपराधियों तक पहुंचने के लिए कितनी तेजी से कार्रवाई हुई?और सबसे बड़ा सवाल क्या अपराधियों को कानून का भय रह गया है?
मिनटों में लूट,गोलियां चलाकर फरार हुए अपराधी—
2 सितंबर को दोपहर करीब तीन बजे तीन नकाबपोश हथियारबंद अपराधी किशुन वर्मा ज्वेलर्स में घुसे। देखते ही देखते लाखों के आभूषण लूट लिए। वारदात के दौरान अपराधियों ने दो राउंड फायरिंग की और हथियार लहराते हुए मौके से फरार हो गए। दुकान में मौजूद मालिक के पुत्र आकास वर्मा और एक कर्मचारी ने भागकर अपनी जान बचाई।यह सिर्फ चोरी या लूट की घटना नहीं थी,बल्कि खुलेआम कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली वारदात थी। सवाल यह है कि यदि अपराधी दिन के उजाले में हथियार के बल पर इतनी बड़ी वारदात को अंजाम देकर निकल सकते हैं, तो आम कारोबारी और आम नागरिक खुद को कितना सुरक्षित महसूस करें.
पुलिस के सामने चुनौती,लेकिन परिणाम कब—
घटना के बाद पुलिस जांच,अपराधियों की तलाश और संभावित ठिकानों पर दबिश की बात स्वाभाविक है। लेकिन व्यवसायियों की बेचैनी का कारण यही है कि नतीजा कब सामने आएगा?
अपराधियों की गिरफ्तारी और लूटे गए सामान की बरामदगी ही इस मामले में पुलिस की कार्रवाई की वास्तविक कसौटी होगी।जब तक अपराधी पकड़े नहीं जाते,तब तक बाजार में भय का माहौल बना रहना स्वाभाविक है।एक वारदात के बाद यदि अपराधी पकड़ में नहीं आते,तो क्या यह अगली वारदात के लिए उनका हौसला नहीं बढ़ाता? यही सवाल अब स्वर्ण व्यवसायियों के बीच सबसे अधिक चर्चा में है।
सिर्फ अमड़ापाड़ा नहीं, पूरे राज्य में स्वर्ण कारोबारी चिंतित—
अखिल भारतीय स्वर्णकार समाज एवं ज्वेलर्स एसोसिएशन के प्रांतीय अध्यक्ष गोपाल प्रसाद सोनी और आरकेएसएम के राष्ट्रीय संरक्षक उमेश प्रसाद ने दावा किया कि पिछले दो-तीन महीनों में राज्य के विभिन्न जिलों में डेढ़ दर्जन से अधिक ज्वेलरी दुकानों में लूट की घटनाएं हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि औसतन सप्ताह में करीब दो ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं।यदि यह दावा सही है तो मामला किसी एक थाना या एक जिले तक सीमित नहीं रह जाता। यह स्वर्ण व्यवसायियों की सुरक्षा और राज्य की कानून-व्यवस्था से जुड़ा गंभीर सवाल बन जाता है।
अपराधियों के डर से क्या दुकानें बंद कर दें—
अमड़ापाड़ा पहुंचे गोपाल प्रसाद सोनी ने सरकार और प्रशासन पर तीखा सवाल खड़ा करते हुए कहा कि स्वर्ण व्यवसायी सरकार को राजस्व देते हैं, फिर उनकी सुरक्षा में सेंधमारी क्यों हो रही है? उन्होंने कहा कि कारोबारी घर और दुकान दोनों जगह असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।उन्होंने पुलिस कप्तान से अमड़ापाड़ा लूटकांड का जल्द खुलासा करने और अपराधियों को गिरफ्तार करने की मांग की। साथ ही व्यवसायियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर पहल की मांग करते हुए कहा कि जरूरत पड़ी तो संगठन धरना देगा।उमेश प्रसाद ने भी राज्य में लगातार हो रही ऐसी घटनाओं को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की बात कही।
व्यवसायियों को हथियार का लाइसेंस देने की मांग—
स्वर्ण व्यवसायियों की सुरक्षा के लिए संघ की ओर से जरूरतमंद एवं इच्छुक व्यवसायियों को सरल प्रक्रिया के तहत शस्त्र अनुज्ञप्ति देने की मांग भी उठाई गई। तर्क दिया गया कि जब कारोबारी अपनी जान-माल को लेकर भय में रहेंगे तो व्यापार करना मुश्किल होगा।लेकिन यहां भी एक बड़ा सवाल है-क्या कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी अब कारोबारी अपने हाथों में हथियार लेकर निभाएंगे.व्यवसायियों को सुरक्षा के लिए हथियार रखने की जरूरत महसूस होना अपने आप में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर टिप्पणी है। सरकार और पुलिस प्रशासन को यह देखना होगा कि कारोबारी सुरक्षा के लिए हथियार को विकल्प क्यों मानने लगे हैं।
अब सवाल सिर्फ गिरफ्तारी का नहीं, भरोसे का है—
अमड़ापाड़ा की घटना के बाद पुलिस के सामने चुनौती सिर्फ तीन अपराधियों को पकड़ने की नहीं है। चुनौती व्यवसायियों के टूटते भरोसे को वापस कायम करने की भी है।पुलिस को यह बताना होगा कि अपराधियों तक पहुंचने के लिए क्या कार्रवाई चल रही है, जांच किस दिशा में आगे बढ़ी है और कब तक इस मामले का पटाक्षेप होगा। क्योंकि बाजार में फैली दहशत सिर्फ एक दुकान के शटर से नहीं मिटेगी।दिनदहाड़े हथियारबंद अपराधी लूट कर निकल जाएं और कई दिनों तक पुलिस के हाथ खाली रहें—यह स्थिति सामान्य नहीं मानी जा सकती।
