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Maqsood Alam
(News Head)

धनुवा की मौत के 60 घंटे बाद भी कोयला पथ अवरुद्ध : परिजन व ग्रामीण अपने स्टैंड पर अड़े

कोयला प्रबंधन व प्रशासन की ग्रामीणों से नहीं बनी बात

ललन झा@समाचार चक्र
ललन झा@समाचार चक्र

अमड़ापाड़ा थाना क्षेत्र के पचुवाड़ा रांगा टोला निवासी धनुवा तूरी के कोयला लोड डंपर की चपेट में आने से हुई मौत मामले के 60 घंटे बाद भी कोई निदान नहीं निकल पाया है। हालात यथावत है। डिमांड पूरी न होने से आक्रोषित परिवार व परिजन मृतक धनुआ तुरी की लाश पोस्टमॉर्टम के बाद भी सड़क के बीचोबीच रख दी गई है। लाश से दुर्गंध आने लगी है। परिजन व ग्रामीण अपनीं मांगों पर अड़े हुए हैं।

एक ओर जहां कंपनी के अलावे पुलिस-प्रशासन उन्हें मनाने में लगी हुई है वहीं, बीते तीन दिनों से कोयला का परिवहन पूर्णतः ठप हो गया है। पिछले करीब साठ घंटों से कोयला परिवहन के अवरुद्ध हो जाने से प्रबंधन, ट्रांसपोर्टर, वाहन मालिक के अलावे सरकार को राजस्व, रेल माल भाड़ा, जीएसटी आदि के माध्यम से करोड़ों रुपये का नुकसान हो चुका है।

समाचार लिखे जाने तक स्थिति यथावत बनी हुई थी। मौके पर अमड़ापाड़ा बीडीओ कुमार देवेश द्विवेदी, थाना प्रभारी सह इंस्पेक्टर गोपाल कृष्ण यादव ग्रामीणों व परिजनों को समझाने का निरंतर प्रयास कर रहे हैं।

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उल्लेखनीय है कि गत शुक्रवार को प्रातः तकरीबन 7 बजे रांगा टोला के समीप 42 वर्षीय धनुआ तुरी की मौत कोयला लोड डंपर की चपेट में आने से हो गई थी। इससे आक्रोशित ग्रामीणों ने 17 डंपरों के अलावे पुलिस के पीसीआर वैन समेत एक बोलेरो के शीशे तोड़ डाले थे। लाश को बीच सड़क पर रखकर सड़क को जाम कर दिया था। ग्रामीण 12 लाख रूपये मुआवजे के साथ धनुआ के बच्चों की परवरिश, शिक्षा, नौकरी व विवाह की मांग करने लगे। कंपनी के वार्ता सफल नहीं होने पर प्रशासनिक अधिकारियों के अनुरोध पर परिजन लाश का पोस्टमार्टम कराने के लिए राजी हो गए। परंतु, पुनः शनिवार को लाश को सड़क किनारे रख कर अपनी मांगों को मनवाने के ग्रामीण अड़े रहे।

शनिवार को भी सहमति नहीं बनने पर परिजन व ग्रामीण लाश का अंतिम संस्कार नहीं किया बल्कि, रविवार को लाश को बीच सड़क पर रखकर पुनः अपनी मांगों को दुहराने लगे। बीडीओ व थाना प्रभारी के मान मुनव्वल के बावजूद ग्रामीण टस से मस नहीं हुए। जानकारी के मुताबिक ग्रामीण 7 लाख रुपए मुआवजा व तमाम सुविधाओं के अलावा एक लाख रुपये दाह संस्कार व एक लाख रुपये ग्रामीण भोज की डिमांड पर अड़े थे। जबकि, सूत्रों की मानें तो कंपनी 6 लाख रुपये मुआवजा, बच्चों को तमाम सुविधा देने पर राजी थी। समाचार भेजे जाने तक प्रशासन की मौजूदगी में ग्रामीण व कंपनी के बीच वार्ता जारी थी।

बीडीओ ने कहा

कुमार देवेश द्विवेदी ने कहा कि उच्चाधिकारियों के निर्देशों का अनुपालन किया जा रहा है। ग्रामीणों को निरंतर समझाने का प्रयास जारी है। परिजनों की विधि सम्मत मांगों को पूरा किया जाएगा।

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