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मकसूद आलम/अबुल क़ासिम की रिपोर्ट
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“जहाँ एक ओर मां अपने बच्चों की परवरिश में पूरी तरह समर्पित रहती हैं, वहीं कुछ महिलाएं ऐसी भी हैं जो मातृत्व के साथ-साथ प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभा रही हैं. मदर्स डे पर पाकुड़ उपायुक्त मेघा भारद्वाज से विशेष बातचीत पर आधारित रिपोर्ट…”
PAKUR (JHARKHAND)
मैं यहां अपनी मां की वजह से ही हूं। जिन्होंने मुझे यहां तक पहुंचाने में काफी सपोर्ट किया। ये बातें महिला दिवस पर खास बातचीत में पाकुड़ जिले की नव पदस्थापित डीसी मेघा भारद्वाज ने कही है। उन्होंने कहा कि माता-पिता की वो मेहनत ही होती है,जो हम उनसे सीखते हैं और उन्होंने जो संस्कार हमें दिया है,उन्हीं के कारण आज मैं यहां तक पहुंची हूं। डीसी मेघा भारद्वाज ने कहा कि हमारी माता जी का तो इसमें बहुत ही ज्यादा हाथ रहा है। मेरी मां खुद भी बहुत ही मेहनती है और उनका जो भी कड़ी मेहनत का नेचर रहा है और हमें जो भी सिखाया,उन्हीं के बदौलत आज मैं यहां तक पहुंची हूं।
बहुत ही इंपॉर्टेंस होते हैं फैमिली सपोर्ट—
डीसी मेघा भारद्वाज ने कहा कि ऑफिस का बहुत सारा काम रहता है और मेरी एक बहुत छोटी बच्ची भी है,तो उसको भी देखना पड़ता है। इसमें सबसे ज्यादा सपोर्ट जो है मेरी खुद की मां का मिला है। उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर फैमिली का सपोर्ट बहुत इंपॉर्टेंट रहता है। जब मैं ऑफिस के काम में बिजी रहती हूं,मां ही सारा संभालती हैं और बाकी जो घर में होते हैं,मेरे पेरेंट्स हैं, मेरे भाई हैं,उन सब का भी काफी सपोर्ट रहता है। मैं यह मानती हूं कि फैमिली के सपोर्ट के बिना कोई भी इंसान फ्री होकर काम नहीं कर पाता है। घर परिवार का इतना सपोर्ट रहता है तो मैं मेंटली बहुत ही फ्री रहती हूं और अच्छे से अपनी ड्यूटी आवर्स में काम कर पा रही हूं
काफी भावुक करने वाला पल था,जब पहली बार ऑफिस ज्वाइन की—
डीसी मेघा भारद्वाज ने कहा कि मैं आज भी उस पल को याद करती रहती हूं,जब मैं पहली बार ऑफिस ज्वाइन किया। ऐसे तो मदरहुड में बहुत भावुक पल आते हैं,मैं फर्स्ट टाइम जब ऑफिस ज्वाइन किया,एक तो पहली बार ऑफिस ज्वाइन करना थोड़ा अजीब सा फीलिंग हो रहा था,ऑफिस का पहला दिन और परिवार से थोड़ी दूरी, यह दोनों चीजें,ये पल मेरे लिए काफी भावुक करने वाला था। दो-तीन महीने का वह एक ऐसा पीरियड था,जब मैं फैमिली से दूर खुद को एडजस्ट कर रही थी। यूं तो नई जगह,नया माहौल,शुरू-शुरू में एडजस्ट करने में सामान्य तौर पर सबको टाइम लगता है।मेरे साथ भी ऐसा ही था।मेरे लिए भी और बच्चे के लिए भी एक भावनात्मक स्थिति उत्पन्न होने जैसा था।उन्होंने कहा कि आप कहीं भी रिप्लेस हो सकते हैं,लेकिन बच्चों के जीवन में आप रिप्लेस नहीं हो सकते। इस चीज को मेरे फैमिली ने समझा और संभाला भी,उन्होंने मुझे काफी सपोर्ट किया।
माताओं को मैसेज—
डीसी मेघा भारद्वाज ने कहा कि मैं पाकुड़ आने के बाद काफी सारे बच्चों और माताओं से भी मिली हूं। मैं सभी माताओं को संदेश देना चाहती हूं कि आप अपना भी ख्याल रखें। आप स्वस्थ रहेंगी,मजबूत रहेगी,तभी अपने बच्चों को भी एक अच्छा जीवन दे पाएंगी।उन्होंने कहा कि माताएं अपने बच्चों के पोषण को लेकर भी काफी जागरूक रहे। अपने स्वास्थ्य पर पूरा ध्यान रखें। उन्होंने कहा कि गांव में हमारे पास काफी अच्छी-अच्छी चीजें हैं,जो बिना बहुत ज्यादा मेहनत के हम उन चीजों को बच्चों को खिलाकर कुपोषण से मुक्त रख सकते हैं। जिला प्रशासन की तरफ से जल्द ही हम एक प्रोग्राम लॉन्च करने जा रहे हैं। जिसमें इस चीज को टारगेट करेंगे कि बच्चें कुपोषण की सर्कल से बाहर आए। माताएं जो अक्सर एनेमिक हो जाती हैं, क्योंकि वह अपनी देखभाल अच्छे से नहीं कर पाती है। इस प्रोग्राम के जरिए हम माताओं को पोषण के प्रति जागरूक करेंगे और बच्चों को भी खान-पान के प्रति विशेष तौर पर जागरूक करने का काम करेंगे। इसमें माताओं को मानसिक रूप से मजबूत किया जाएगा। जिससे कि अपने जीवन में खुद के साथ-साथ बच्चों के बीच बैलेंस मेंटेन कर सकें।


