समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़-जिले में आउटसोर्सिंग के तहत कार्यरत कर्मचारियों की समस्याएं अब खुलकर सामने आने लगी हैं। कर्मचारियों से पूरी ईमानदारी और जिम्मेदारी के साथ काम लेने के बावजूद समय पर मानदेय का भुगतान नहीं होना, वार्षिक मानदेय वृद्धि से वंचित रखना और वेतन के अनुरूप भविष्य निधि (पीएफ) जमा नहीं किए जाने जैसे गंभीर मुद्दों को लेकर जिला आउटसोर्सिंग कर्मचारी संघ ने आवाज बुलंद की है। रविवार को शहर के लड्डूबाबू आमबगान में संघ की बैठक जिला अध्यक्ष प्रेमलता हेम्ब्रम की अध्यक्षता में हुई। इसमें चार सूत्री मांगों पर विस्तार से चर्चा करते हुए संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से हस्तक्षेप की मांग की गई।बैठक में कर्मचारियों ने आउटसोर्सिंग व्यवस्था के तहत काम करने वाले कर्मियों की समस्याओं और उनके आर्थिक हितों पर चर्चा की। संघ का कहना है कि कर्मचारी सौंपे गए दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करते हैं, लेकिन इसके बदले उन्हें समय पर मानदेय और अन्य जरूरी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि कर्मचारियों से पूरी जिम्मेदारी की अपेक्षा करने वाली व्यवस्था उनके अधिकारों के प्रति कितनी जवाबदेह है।
काम पूरा,फिर भी समय पर मानदेय नहीं–
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जिला अध्यक्ष प्रेमलता हेम्ब्रम ने कहा कि आउटसोर्सिंग कर्मचारी काफी मेहनत करते हैं और उन्हें जो भी जिम्मेदारी सौंपी जाती है, उसका ईमानदारीपूर्वक निर्वहन करते हैं। इसके बावजूद मानदेय का भुगतान समय पर नहीं किया जाता है। उन्होंने कहा कि अन्य कर्मचारियों के मानदेय में प्रत्येक वर्ष वृद्धि होती है, लेकिन आउटसोर्सिंग कर्मियों को इस लाभ से वंचित रखा जाता है। संघ ने प्रशासन से मांग की है कि कर्मचारियों के वार्षिक मानदेय में उचित वृद्धि सुनिश्चित की जाए, ताकि बढ़ती महंगाई के बीच उन्हें आर्थिक राहत मिल सके।
पीएफ कटौती और जमा राशि पर उठाए सवाल—
संघ ने भविष्य निधि (पीएफ) को लेकर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। प्रेमलता हेम्ब्रम के अनुसार,कर्मचारियों के मासिक मानदेय के अनुरूप पीएफ की कटौती और जमा की व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि आउटसोर्सिंग कंपनियों द्वारा वेतन के अनुरूप पीएफ जमा नहीं किया जाता है और इसे समय पर जमा करने की जरूरत है। संघ ने मांग की कि पीएफ से संबंधित पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो तथा कर्मचारियों को उनकी जमा राशि का सही विवरण उपलब्ध कराया जाए।

दो कंपनियों के रवैये पर नाराजगी–
बैठक में प्रेमलता हेम्ब्रम ने शिव लाल प्राइवेट लिमिटेड,झरना कॉलोनी, साहेबगंज और राइडर सिक्योरिटी सर्विस का उल्लेख करते हुए दोनों आउटसोर्सिंग कंपनियों पर मनमाने रवैये का आरोप लगाया। संघ का कहना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए और उनके मानदेय तथा पीएफ से जुड़े मामलों में स्पष्ट जवाबदेही तय होनी चाहिए। हालांकि, इन आरोपों पर संबंधित कंपनियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग–
संघ की बैठक में चार सूत्री मांगों के तहत समय पर मानदेय भुगतान,वार्षिक मानदेय में वृद्धि,मासिक मानदेय के अनुरूप पीएफ कटौती तथा पीएफ की राशि समय पर जमा करने की मांग उठाई गई। कर्मचारियों ने प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित कंपनियों की कार्यप्रणाली की जांच कराने और कर्मियों के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने का आग्रह किया।बैठक में सचिव अंजू अनिता टुडू, उपसचिव मुस्तफिजुर रहमान, कोषाध्यक्ष जोहरुल इस्लाम, सौरव घोष, रेणुका हेम्ब्रम, प्रीतिलता हेम्ब्रम, डोली निकुंज टुडू, रीना सोरेन, बिना हेम्ब्रम, अंजू कुमारी, अंजुला मुर्मू, सुप्रिया हेम्ब्रम, सुमित्रा कुमारी, परवेज खान, अंकित कुमार, संदीप कुमार, मिंटू शेख सहित सैकड़ों कर्मचारी मौजूद थे।

