समाचार चक्र संवाददाता
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पाकुड़। नगर परिषद का चुनाव परवान पर है। प्रत्याशी जनसंपर्क में जुटी हुई है। प्रचार प्रसार का शोर हर तरफ है। शहर में जिस गली से गुजरिए प्रत्याशियों के प्रचार प्रचार का शोर सुनाई पड़ रहा है। प्रत्याशियों की ओर से मतदाताओं को रिझाने की हर कोशिश की जा रही है। अपने एजेंडे या मुद्दों को जनता के बीच रख रहे है। इनमें सबसे अहम मुद्दा शहर में गंगा का शुद्ध पेयजल आपूर्ति का है। किसी भी प्रत्याशी से पूछिए तो उनका पहला विजन पाइपलाइन से शहर में गंगाजल की आपूर्ति ही है। यह वही शुद्ध गंगाजल आपूर्ति वाली योजना है, जो पिछले तकरीबन 13 सालों से अधर में लटका हुआ है। हालांकि योजना का लगभग 90 फीसदी काम पूरा हो चुका है। लेकिन शहर वासियों के लिए दुर्भाग्य ही है कि करोड़ों की लागत से इस योजना को धरातल में उतारने के लिए एक दशक से भी ज्यादा समय बीत गए। लेकिन अभी तक योजना का काम पूरा नहीं हुआ। इससे कहीं ना कहीं शहर वासी भी उब चुके हैं। तेरह सालों से आश्वासन और झूठी वादों से जनता परेशान हो चुके हैं। इसी योजना को अब हर कोई प्रत्याशी प्रमुखता के साथ उठा रहे हैं।
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लेकिन देखने वाली बात यह होगी कि शहर वासियों पर इसका कितना असर पड़ेगा। इसलिए कि 13 साल से पाकुड़ शहर की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरसती आ रही है। इतने सालों तक अगर सच कहा जाए तो सिर्फ ये प्रत्याशी ही नहीं, बल्कि नगर परिषद से बाहर निकल कर भी किसी जनप्रतिनिधि या किसी भी राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को सही ढंग से नहीं उठाया। शायद यही वजह है कि पेयजल आपूर्ति जैसी एक जरूरी योजना को 13 सालों में भी धरातल पर उतारा नहीं जा सका। अब जब चुनाव की बारी आई तो हर कोई इसे मुद्दा बनाने लगे। ऐसे में जनता प्रत्याशियों के ऐसे मुद्दों या वादों पर कैसे भरोसा करें। यह भी सच है कि काफी सारे प्रत्याशी पेयजल आपूर्ति की इस योजना को लाने और दिशा देने में अपनी अपनी श्रेय भी जरूर ले रहे हैं। यूं कहे कि शहरी पेयजल आपूर्ति योजना को लाने और दिशा देने में श्रेय लेने की होड़ सी मची है, दूसरी तरफ शेष बचे कार्य को पूरा कर जल्द ही शहर वासियों को गंगा का शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के वादे किए जा रहे हैं। अब आने वाला समय ही बताएगा कि जनता किस पर भरोसा जताती हैं। फिलहाल प्रत्याशियों का प्रचार प्रसार जोर शोर से चल रहा है। शहरी पेयजल आपूर्ति योजना के साथ-साथ साफ-सफाई व्यवस्था को दुरुस्त बनाने, ड्रेनेज सिस्टम को मजबूत बनाने, बेघरों को सरकारी आवास दिलाने, शहर वासियों को जाम से मुक्ति दिलाने जैसे मुद्दों को भी प्रमुखता से रखे जा रहे हैं।




