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Maqsood Alam
(News Head)

अमड़ापाड़ा में 171 शिक्षकों के भरोसे 10 हजार छात्र-छात्राओं के प्रारंभिक शिक्षा की बुनियाद

यहां एक शिक्षक के भरोसे हैं मॉडल स्कूल के 200 से अधिक छात्र,63 स्कूलों में हैं सिर्फ एक ही शिक्षक

ललन झा@समाचार चक्र
अमड़ापाड़ा। प्रखंड में प्रारंभिक शिक्षा के हालात अच्छे नहीं हैं। सिर्फ टैब, किताब, यूनिफॉर्म, एमडीएम और सायकिल बांट देने से शिक्षा के स्तर में सुधार की परिकल्पना नहीं की जा सकती। खासकर बेहतर प्राईमरी या मिडिल एजूकेसन के लिए आवश्यक संसाधनों, सुविधाओं अथवा इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास सरकार या विभाग का प्रशंसनीय पहल तो है। किन्तु, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का आऊटपुट भी दिखना चाहिए। सबसे पहले शिक्षकों की कमी दूर होनी चाहिए। अगर छह से बारहवीं कक्षा वाले स्कूल में दो सौ से अधिक छात्र-छात्राओं के बीच एक ही शिक्षक हों तो अनुमान लगाया जा सकता है कि वहां अध्यापन का स्तर कैसा होगा? ऐसा उदाहरण यहां का मॉडल स्कूल है। यही हाल यहां के अपग्रेडेड मिडिल, मिडिल और प्राईमरी स्कूलों का भी है। लंबे समय से अधिकांश स्कूल शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। जब बच्चों की बुनियादी शिक्षा ही कमजोर होगी तो हायर एजूकेसन का औचित्य ही नहीं रह जाएगा !

अमड़ापाड़ा में 63 एक शिक्षकीय विद्यालय हैं

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प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां 28 प्राईमरी, 15 अपग्रेडेड मिडिल, 3 मिडिल और 1 मॉडल स्कूल के अलावा 16 अपग्रेडेड प्राईमरी स्कूल हैं जहां सिर्फ एक-एक शिक्षक ही हैं। प्राइमरी को छोड़ यदि मिडिल और मॉडल स्कूल में कंबाइंड क्लास संचालित कर बच्चों को पढ़ाई जाय तो कैसे? हालांकि एक शिक्षकीय प्राथमिक विद्यालयों में भी मिली-जुली कक्षाएं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान नहीं कर सकतीं। यदि कक्षा प्रथम से पंचम को छोड़ भी दिया जाय तो क्या कक्षा प्रथम से अष्टम और कक्षा छह से बारह तक के विद्यार्थियों को क्या कोई एक शिक्षक पढा सकता है ? अंदाजा सहज लगाया जा सकता है। अलावा इसके कभी शिक्षक को ट्रेनिंग में शरीक होना पड़ता है तो कभी रिपोर्ट तैयार करने में व्यस्त रहना पड़ता है। अस्वस्थता या इमरजेंसी में ऐसे विद्यालयों में ताले लटक जाएं तो जवाबदेह कौन?

प्रखंड में कक्षा प्रथम से अष्टम तक कुल 9389 बच्चे और (सरकारी व पारा मिलाकर) 171 शिक्षक हैं

कुल छात्र -छात्राओं की बात करें तो जानकारी मिली है कि वर्ग प्रथम से अष्टम तक यहां इनकी संख्या लगभग 10 हजार है। जबकि 62 सरकारी और 109 पारा यानि कुल 171 शिक्षक हैं। जबकि 40 बच्चों पर यदि एक शिक्षक हों तो यह संख्या 250 होनी चाहिए। बहरहाल, सिस्टम को सर्वप्रथम शिक्षकों की कमी दूर करने की दिशा में गंभीर होना चाहिए।

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