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अबुल काशिम@समाचार चक्र
पाकुड़। सदर प्रखंड के पोड़ाबगान गांव के प्रतिभाशाली बेटे अशादुल आलम ने नीट परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर अपने क्षेत्र और परिवार का नाम रोशन किया है। उनके इस बड़े मुकाम को हासिल करने पर माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू छलक आए, जो उनकी वर्षों की मेहनत और संघर्ष की सार्थकता को दर्शाते हैं। नीट जैसी कठिन राष्ट्रीय प्रवेश परीक्षा में ग्रामीण परिवेश से आकर सफलता पाना, अपने आप में एक बहुत बड़ी मिसाल है। सीमित संसाधनों के बावजूद अशादुल की यह उपलब्धि इस बात को साबित करती है कि पक्के इरादे और लगन से किसी भी मुश्किल परिस्थिति को पार किया जा सकता है। यह सफलता अशादुल के परिवार और उनके गांव के लिए बेहद गर्व का पल है। यह क्षेत्र के अन्य युवाओं को भी मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रेरित करेगा।
घर में खुशी का माहौल
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इस समय अशादुल के घर में खुशी का माहौल है। पिता मुख्तार हुसैन और मां गुलशन बीवी की आंखों में बेटे की इस शानदार सफलता की खुशी साफ झलक रही है। भाई जारिफ आलम और बहन सबीना खातून खुशी से झूम रहे हैं। अशादुल ने बताया कि उन्हें 577 अंक मिले है। जबकि ऑल इंडिया रैंक 19,663 है। अशादुल ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया। कहा कि मेरी सफलता के पीछे मेरे अब्बू और अम्मी का वो हौंसला है, जिससे मैं यहां तक पहुंच पाया हूं। अब्बू और अम्मी ने ही मुझे मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। उनका हमेशा से सपना रहा है कि मैं डॉक्टर बनकर देश और गरीबों की सेवा करूं। मुझे उस दिन सबसे ज्यादा खुशी मिलेगी, जब अल्लाह ताला की रहमत से डॉक्टर बनकर अपने माता-पिता के सपनों को साकार कर पाऊंगा। अशादुल ने बताया कि उनकी प्रारंभिक शिक्षा कक्षा एक से पांच तक गांव में ही उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय पोड़ाबगान में हुआ है। जबकि उत्क्रमित उच्च विद्यालय बेलडांगा में आठवीं कक्षा तक पढ़ाई की है। इसके बाद नौंवी से इंटर तक की पढ़ाई पाकुड़ शहर के राज प्लस टू में पूरी की है। इंटर की पढ़ाई पूरी होने के बाद घर से ही ऑनलाइन कोचिंग कर नीट की तैयारी शुरू की। इसके बाद बंगाल के कलियाचौक स्थित एडवांस नीट इंस्टीट्यूट में दो साल तक तैयारी की और एग्जाम दिया। इस साल मुझे यह सफलता मिली।
आठ से नौ घंटे करते थे स्टडी
अशादुल ने अपनी स्टडी को लेकर बताया कि हर दिन आठ से नौ घंटे स्टडी करते थे। उन्होंने बताया कि भोर बेला (सुबह) में स्टडी सबसे ज्यादा अच्छा लगता था।
शिक्षित परिवार में पला-बढ़ा है अशादुल, पिता पारा टीचर व गृहिणी हैं मां
अशादुल आलम एक शांत स्वभाव का होनहार युवा है। वह एक शिक्षित परिवार में पला-बढ़ा है। उनके पिता मुख्तार हुसैन गांव में ही उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय पोड़ाबगान में साल 2023 से पारा टीचर (अब सहायक अध्यापक) के रूप में कार्यरत हैं। मां गुलशन बीवी गृहिणी हैं। भाई जारिफ आलम उत्क्रमित उच्च विद्यालय बेलडांगा में नौंवी कक्षा में पढ़ाई कर रहा है। वहीं अशादुल की बहन सबिना खातून केकेएम कॉलेज में जूलॉजी में ऑनर्स कर रही है।
परिणाम आते ही माता-पिता की भर आईं आंखें
आशादुल के पिता मुख्तार हुसैन ने कहा कि वह बेटे की सफलता से काफी खुश हैं। जिस रोज गुरुवार को परिणाम आया, रात के लगभग 11:00 बज रहे थे। इतनी रात को भी अशादुल के परिणाम के इंतजार में सभी उत्सुकता से बैठे हुए थे। अशादुल और खुद पिता मुख्तार हुसैन मोबाइल पर नजरें गड़ाए बैठे थे। इसी दौरान नीट का परिणाम जारी होता है।परिणाम आते ही घर में खुशियां छा गई। यह माहौल किसी उत्सव से कम नहीं था। मां-बाप के वर्षों का सपना पूरा हो रहा था। पिता मुख्तार हुसैन और मां गुलशन बीवी की आंखों में खुशी के आंसू थे। अगले दिन सुबह गांव में जैसे ही अशादुल की सफलता की खबरें फैली, गांव में भी खुशी छा गई।


