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समाचार चक्र संवाददाता
पाकुड़।झारखंड उच्च न्यायालय की सख्ती के बाद पाकुड़ जिला प्रशासन हरकत में आ गया है।तालाब एवं सार्वजनिक जलस्रोतों पर अतिक्रमण के मामले में हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देश के अनुपालन को लेकर जिला प्रशासन ने एक ओर जहां तीन सदस्यीय जांच दल का गठन किया है,वहीं दूसरी ओर अंचल कार्यालय ने विवादित पोखर की भूमि को उसके मूल स्वरूप में बहाल करने का नोटिस भी जारी कर दिया है। अब इस पूरे मामले पर 31 जुलाई को होने वाली हाईकोर्ट की अगली सुनवाई से पहले प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।मामला झारखंड उच्च न्यायालय में लंबित अवमानना वाद से जुड़ा है। Contempt Case (Civil) No. 88 of 2026 में याचिकाकर्ता अफरोज खान द्वारा सार्वजनिक तालाब पर अतिक्रमण का मामला उठाया गया था।सुनवाई के दौरान माननीय न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने राज्य सरकार की ओर से दायर अंतरिम आवेदन पर सुनवाई करते हुए पाकुड़ प्रशासन को 29 जुलाई 2026 तक अतिक्रमण हटाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई पूरी कर अनुपालन शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश दिया है।मामले की अगली सुनवाई 31 जुलाई को निर्धारित की गई है।
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जांच के लिए बनी तीन सदस्यीय टीम—
उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए जिला विधि शाखा, पाकुड़ ने अनुमंडल पदाधिकारी,अंचल अधिकारी सदर एवं कार्यपालक पदाधिकारी, नगर परिषद को शामिल करते हुए तीन सदस्यीय जांच दल गठित किया है।जांच दल को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित स्थल का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का सत्यापन करे तथा विस्तृत संयुक्त जांच प्रतिवेदन उपायुक्त को सौंपे,ताकि समय पर न्यायालय में अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके।
अतिक्रमणकारियों को नोटिस,तालाब अस्तित्व में लाने का निर्देश —
इधर अंचल कार्यालय, पाकुड़ ने भी हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में कार्रवाई तेज कर दी है। अंचल अधिकारी द्वारा जारी नोटिस में मौजा-पाकुड़, थाना संख्या-128, खाता संख्या-588, प्लॉट संख्या-1345 की भूमि को सरकारी अभिलेखों में पोखर बताया गया है।
नोटिस में कहा गया है कि भूमि का स्वरूप बदलकर अन्य उपयोग किया गया है,जो संताल परगना काश्तकारी अधिनियम,1949 की धारा-35 तथा उच्च न्यायालय के आदेश के विरुद्ध है।संबंधित रैयतों को निर्देश दिया गया है कि वे भूमि को पुनः पोखर के मूल स्वरूप में बहाल करें। यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो प्रशासन स्वयं अतिक्रमण हटाकर भूमि को मूल स्वरूप में बहाल करेगा और इस कार्रवाई का पूरा खर्च संबंधित व्यक्तियों से वसूला जाएगा।
29 जुलाई तक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश, अतिक्रमणकारियों को नोटिस जारी कर अस्तित्व में लाने का निर्देश
हाईकोर्ट के इस आदेश को सार्वजनिक तालाबों और जलस्रोतों की सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि सरकारी तालाबों पर अवैध कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और प्रशासन को समयबद्ध कार्रवाई कर जवाबदेही निभानी होगी।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकुड़ प्रशासन 29 जुलाई की समय-सीमा के भीतर अतिक्रमण हटाकर न्यायालय को संतोषजनक अनुपालन रिपोर्ट सौंप पाएगा?इस मामले पर अब पूरे जिले की नजरें टिकी हैं। यदि प्रशासन समयबद्ध कार्रवाई करता है,तो यह न केवल हाईकोर्ट के आदेश का पालन होगा, बल्कि सार्वजनिक जलस्रोतों की रक्षा और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मिसाल भी बनेगा।


